ग्वालियर के ऐतिहासिक मोहम्मद गौस के मकबरे में…

नमाज के लिए मुस्लिमों को देना पड़ा धरना !

ग्वालियर। चैत्र नवरात्र के साथ ही आज से रमजान भी शुरू हो गए। लेकिन ग्वालियर के ऐतिहासिक मोहम्मद गौस के मकबरे में रमजान के दिनों में नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों को धरना देना पड़ा। ग्वालियर के इतिहास में यह पहला मौका है जबकि पूजा अर्चना अथवा नमाज के लिए श्रद्धालुओं को धरना देने की नौबत आई। ग्वालियर के हजीरा क्षेत्र में ऐतिहासिक मोहम्मद गौस के मकबरे में सालों से नमाज हो रही है लेकिन कोरोना के दौर में प्रतिबंधों के चलते यहां नमाज पर रोक लगा दी गई थी। ऐतिहासिक स्थल होने के साथ-साथ यहां हर साल संगीत सम्राट तानसेन की याद में तानसेन समारोह का भी आयोजन होता है। 

यह क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति से ही यहां सालों से नमाज होती आ रही है। धार्मिक स्थलों पर कोरोना के चलते लगाए गए प्रतिबंध अब हटा लिए गए हैं बावजूद इसके भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यहां मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति नहीं दे रहा था। जिसके विरोध में मुस्लिम अधिकार मंच की अगुवाई में मुस्लिम समुदाय ने धरना शुरू कर दिया। मोहम्मद गौस के मकबरे पर धरने की खबर मिलने के बाद यहां पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अफसरों से बात की तब जाकर मुस्लिम समुदाय को यहां नमाज पढ़ने की अनुमति मिली।  मुस्लिम अधिकार मंच के संयोजक मोहम्मद यूसुफ के मुताबिक रमजान के दिनों में तराबी की नमाज होती है जिसका विशेष महत्व है। 

यूसुफ ने बताया कि उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की तरफ से अभी आधिकारिक तौर पर अनुमति नहीं दी गई है लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें नमाज शुरू करने का भरोसा दिलाया है। वहीं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के इस कदम के पीछे वह साजिश छुपी हुई है जिससे समाज में अमन और शांति बिगड़े। माकपा नेता ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन ग्वालियर किला भी आता है जहां कई धार्मिक स्थल हैं लेकिन निशाना सिर्फ एक समुदाय विशेष को बनाया जा रहा है।