माँ त्रिशला के बधाई गीतों पर नृत्य करते हुए महिलाओं ने निकाली रथयात्रा…

रथ में सवार होकर निकले अहिंसा के अवतार महावीर स्वामी

ग्वालियर। कोरोना के चलते पिछली दो साल सादगी से मनाई जा रही। जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर का  जन्मोत्सव इस बार भव्यता के साथ घरों  से निकालकर सड़को किसी प्रकार की बंदिशे न होने पर महावीर जंयती महोत्सव समिति एवं अखिल जैन समाज वृहत्तर ग्वालियर के तत्वाधान श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी 2621 वाॅ जन्म कल्याणक महोत्सव पर आज गुरुवार को मेडिटेंशन गुरू विहसंत सागर एवं मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में देव, शास्त्र, गुरू की विशाल रथयात्रा गाजे बाजे के साथ दौलतगंज जैन मंदिर से निकाली गई। रथयात्रा मे श्रद्धालुओ ने केशरिया टोपी पहनकर निकाले। आयोजन समिति के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि देव शास्त्र, गुरू की विशाल रथयात्रा मुनिश्री विहसंत सागर महाराज व मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज के सानिध्य में गाजेबाजे के साथ दौलतगंज जैन मदिर से प्रारंभ हुई। इस रथयात्रा में सबसें आगे युवा जैन व्धजा लेकर एवं डीजे की धुन पर युवक और युवातिया नृत्य कर थे। 

रथयात्रा में जैन समाज की शाखाओ की महिलायें रंगबिरगी चुनरी व भक्ति गराब डाडिया नृत्य के साथ महावीर के जन्म पर माॅ त्रिशला माता के लिए बधाईयां गा रही थी। मुनिराज सभी भक्तो को अशीर्वाद देते हुए चल रहे थे। सबसे पीछे हाथी के रथ पर माॅ जिनवाणी और चांदी के रथ पर अहिंसा के अवतार महावीर स्वामी विराजमान थे। यह रथयात्रा दोलतगंज से प्रारंभ होकर पाटनकर चोराहे, राम मदिर, गस्त का ताजिया, डीडवाना ओली, सराफा बाजार, जीवाजी चैक, माधोगंज, बाडा, दाना ओली से होती हुई नई सडक स्थित चंपाबाग बागिची पहुची। कार्यक्रम स्थल मे मेडिटेशन गुरू विहसंत सागर एवं मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज के सानिध्य में पं0 चन्द्र प्रकाश जैन के मार्गा दर्शन में भगवान महावीर का अभिषेक हुआ। जिन मुख्यमार्गो से रथयात्रा गुजरी जैन समाज और संस्थाओ ने अपने घर के द्वारे पर भव्य रंगोली बनकर रथ की आगवानी के साथ मुनिराजों के पदाप्रक्षालन कर भगवान महावीर की भव्य आरती उतारी। रथयात्रा स्वागत के लिए श्रद्धालुओ ने जगह जगह स्वल्पाहर शीतल पेयजल की स्टाॅल लगाकर पुष्पवर्षा  कर आत्मिक स्वागत किया। 


मेडिटेशन गुरू विहसंत सागर मुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुये कहा कि महावीर स्वामी की अहिंसा महज हिंसा पर अंकुश नही है। यह छोटे से छोटे प्राणी के लिये प्रेम और करूणा की जीवन दृष्टि है। अहिंसा भारत की आत्मा है। विश्व प्रेम और विश्वशांति की धूरी है। अहिंसा से बढ़कर कोई धर्म नही है हिंसा से बढ़कर कोई पाप नही है। एक अहिंसा से जुडना धर्म के समस्त पहलुओ से जुड़ जाना है। अहिंसा की इबादत समग्र इंसानियत की इबादत है। मुनिश्री विश्वसूर्य सागर मौजूद थे। महोत्सव समिति मुख्य संयोजक निर्मल पाटनी, डॉ वीरेन्द्र गंगवाल, अजित शास्त्री, अजित वरैया, महेंद्र टोंग्या, बालचंद्र जैन, अनुराग जैन, विनय कासलीवाल, मुकेश जैन, पंकज बाकलीवाल, प्रवीण गंगवाल, धर्म वरैया, प्रवक्ता सचिन जैन सहित मुनिश्री के चरणो मे श्रीफल चरण कर आशीवार्द लिया। आभार संयोजक विनय कासलीवाल ने किया। महावीर जंयती महोत्सव समिति एवं अखिल जैन समाज वृहत्तर ग्वालियर के तत्वाधान में महाराज बाड़ा पर शाम को 6 : 00बजे से महाराज बड़े प्रभु गुणगान महोत्सव मेले का आयोजन हुआ। 

इसी दौरान मेले का शुभारंभ मंच का उद्घाटन महेंद्र दीपक जैन व दीप प्रज्वलित अनिल माधवी शाह ने मुनिश्री विहसंत सागर महाराज के सानिध्य में किया। मुनिश्री विहसंत सागर ने राष्ट्र के नाम अहिंसा ओर शाकाहार का संदेश दिया। कार्यक्रम संयोजक महेंद्र जैन व संजीव अजमेरा ने स्वागत किया। चक्रेश सीमा जैन सहित लोगो ने हाथों में दीपक लेकर 1008 दीपो से भगवान महावीर स्वामी की महाआरती संगीतमय की। 20 फुट ऊंचे मंच भव्य भगवान महावीर स्वामी का प्रथम पालना  डॉ अनिल जैन ने झुलाया व लोगो ने पहुँचकर झुलाया। पांच तरह की अलग अलग महावीर स्वामी के जीवन पर झांकिया लगाई गई। बाहर से आई सुप्रसिद्ध भजन गायक प्राची जैन मुंबई, रूपक जैन व दीपक जैन दिल्ली के सगीतकरो ने एक शाम महावीर के नाम भजन सांध्य में भक्त झूमे, 2621 वें जन्मकल्याणक पर दीपक संस्थाओ की महिलाओ ने प्रज्वलित बैको की सीढ़ियों पर किये। महिलाओ ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए। सचालन महेंद्र जैन ने आभार मुख्य संयोजक निर्मल पाटनी ने किया।