केन्द्रीय पर्यटन मंत्री ने वितरित किए प्रमाण-पत्र…

ऐतिहासिक ग्वालियर किले का विकास अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मापदण्डों के अनुरूप होगा : श्री रेड्डी

 

ग्वालियर। पर्यटन के अंतर्राष्ट्रीय मापदण्डों के अनुरूप ऐतिहासिक ग्वालियर किले का विकास किया जायेगा। केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर यह काम करेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर भारत सरकार देश के 75 ऐतिहासिक स्मारकों (मोन्युमेंट) को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने जा रही है। इसी तर्ज पर ग्वालियर किले का विकास होगा। यह बात केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जी.किशन रेड्डी ने कही। श्री रेड्डी आईआईटीटीएम ग्वालियर (भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान) में आईआईटीएफसी (इन्क्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट फैसिलिटेटर) तथा आईआईटीजी (इन्क्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट गाइड) प्रोग्राम से जु़ड़े देश भर के प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित कर रहे थे।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित हुए कार्यक्रम में केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री रेड्डी ने घोषणा की कि आईआईटीएफसी आईआईटीजी सर्टिफिकेट कोर्स में शामिल होने वाली महिलाओं की आधी फीस माफ रहेगी। इस अवसर पर आईआईटीएफसी आईआईटीजी प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 3050 गाइड फैसिलिटेटर को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। मंगलवार को आईआईटीटीएम में आयोजित हुए कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर तथा केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। आईआईटीटीएम में केन्द्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट, सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, भारत सरकार के पर्यटन विभाग की एडिशनल डायरेक्टर जनरल रूपिंदर बरार, आईआईटीटीएम के निदेशक आलोक शर्मा भाजपा जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी मंचासीन थे।

 

केन्द्रीय पर्यटन मंत्री रेड्डी ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से भारत सहित समूची दुनिया के पर्यटन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। भारत सरकार ने पर्यटन को फिर से ऊँचाईयां प्रदान करने के लिये कारगर कदम उठाए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि भारत सरकार ने विदेशी पर्यटकों की बीजा फीस माफ कर दी है। पहले पाँच लाख पर्यटकों से कोई वीजा फीस नहीं ली जायेगी। सरकार 170 देशों के पर्यटकों को -टूरिस्ट वीजा दे रही है। साथ ही 20 देशों के दूतावासों में विशेष रूप से पर्यटन अधिकारी की नियुक्ति भी सरकार ने की है। श्री रेड्डी ने बताया कि सरकार की पर्यटन हितैषी नीति की बदौलत भारत की पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक रैंकिंग अब 34 हो गई है, जो वर्ष 2015 में 52 थी।

इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री रेड्डी ने कहा भारत के पास सबसे प्राचीन सभ्यता संस्कृति और पूर्वजों की विरासत है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे विश्वास के साथ टूरिज्म से जुड़कर भारत की शान बढ़ाएं। पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनायें हैं। श्री रेड्डी ने निवेशकों से भी आह्वान किया कि वे टूरिज्म सेक्टर में बढ़-चढ़कर निवेश करें। यह सेक्टर हर तरह से फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, फेस्टिवल, बीच, वाईल्ड लाईफ, वैलनेस, ईको, मेडीकल, गल्फ, क्रूज, फिल्म, रिवर, ग्रीन टूरिज्म इत्यादि पर्यटन सेक्टर में अपार संभावनायें मौजूद हैं। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि पर्यटन क्षेत्र का विकास समय की माँग है।

 

पर्यटन रोजगार सृजित करने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने पर्यटन को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार देने की बात कही। श्री तोमर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ग्वालियर-चंबल अंचल क्षेत्र के पर्यटन स्थलों के विकास पर भारत सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत हाल ही में लगभग 100 करोड़ रूपए की राशि खर्च की है। केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा कि पर्यटन और नागर विमानन विभाग एक सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों ही विभागों के समन्वय से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के भी अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने कहा पर्यटन और नागर विमानन विभाग के जरिए आर्थिक रूप से गुणात्मक लाभ होता है। उन्होंने इस अवसर पर केन्द्रीय पर्यटन मंत्री से आग्रह किया कि गाइड के व्यवहारिक प्रशिक्षण में पारंपरिक और रोचक गाइड शैली को जरूर अपनाएं। पुराने गाइड का इसमें सहयोग लिया जा सकता है।

केन्द्रीय पर्यटन एवं रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने छुपे हुए पर्यटन स्थलों को उजागर करने पर बल दिया। साथ ही आह्वान किया कि सबसे पहले हम अपने देश और आसपास के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करें। श्री भट्ट ने कहा भारत सरकार पर्यटन को सर्वव्यापी एवं सर्वस्पर्शी बनाना चाहती है। सरकार की मंशा है कि पर्यटन से रोजगार के बड़े अवसर पैदा हों। सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि पर्यटन उद्योग भर नहीं है, पर्यटन एक दूसरे को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम करता है। उन्होंने डोमेस्टिक टूरिज्म की जरूरत को प्रतिपादित करते हुए कहा कि आईआईटीटीएम के आईआईटीएफसी और आईआईटीटीजी प्रशिक्षण पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।