ऑनलाइन सेंटर के माध्यम से करता था सूचनाओं का आदान-प्रदान…

ग्वालियर में शादी में शामिल होने आया था आतंकवादियों का सहयोगी

ग्वालियर। कंपू क्षेत्र के अवाड़पुरा स्थित चुड़ी वाली मस्जिद के पास रिश्तेदार के घर से पकड़ा गया आतंकवादियों का सहयोगी अड़ूपुरा में शादी में शामिल होने के लिए आया था। शादी संपन्न होने के बाद वह कंपू क्षेत्र में रूक गया था। संदेही ने हाफीज की पढ़ाई की है और भोपाल में ऐशबाग थाना क्षेत्र में रहकर साइबर ऑनलाइन की दुकान संचालित करता था। पुलिस के अनुसार पकड़ा गया संदेही ऑनलाइन सेंटर के माध्यम से बांग्लादेश व अन्य देशों में अपने सहयोगी आतंकवादियों से संपर्क कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करता था। बताया गया है कि एटीएस की टीम ने कंपू थाना क्षेत्र के अवाड़ापुरा स्थित चूड़ी वाली मस्जिद के पास रहने वाले इरफान खान पुत्र अल्लाउद्दीन खान के यहां दबिश देकर तीन दिन पूर्व मोहम्मद शाहरूख पुत्र स्व. मुस्तकीम खान निवासी ऐशबाग को हिरासत में लिया था। शाहरूख 5 मार्च को अडूपुरा में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने आया था। 

बताया गया है कि भोपाल में शाहरूख अपनी विकलांग मां के साथ रहता था। वर्तमान में वह ऑनलाइन सेंटर संचालित करता था। इससे पूर्व वह जोमेटो में काम करता था। एटीएस को संदेह है कि उसने ऑनलाइन सेंटर बांग्लादेशी आतंकवादियों की मदद के लिए खोला था। इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि शाहरूख को ऑनलाइन सेंटर खोलने में पकड़े गए आतंकवादियों ने क्या व कैसी मदद की। ग्वालियर में वर्तमान में 8 बांग्लादेशी रह रहे हैं, इनमें 7 छात्र और एक बांग्लादेशी महिला ने हिंदू युवक से शादी करने के बाद यहां पर बस गई है। 6 छात्र इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थान में शिक्षारत है और 1 शहर के प्रतिष्ठित स्कूल में अध्ययनरत है। इनके अलावा शहर के कई संवेदनशील मोहल्लों में पश्चिम बंगाल के रास्ते आकर रह रहे लोगों का रिकॉर्ड नहीं है ऐसे लोगों की संख्या सैकड़ों में हो सकती है। 

राजधानी भोपाल में बांग्लादेशी आतंकवादी पकड़ जाने के बाद संदिग्ध लोगों के शहरों की घनी आबादी वाले मोहल्लों में रह कर देश विरोधी गतिविधियां संचालित करने और प्रशासन व पुलिस के पास कोई जानकारी न होने का मुद्दा फिर गरम हो गया है। शहर के भी कंपू, माधौगंज, इंदरगंज, बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसे कितने लोग रह रहे है इसकी सूचना नहीं है। सेवानिवृत्त एएसपी एमएल शर्मा का कहना है कि शहर में नगर निगम के सभी वाडऱ्ों में नगर निगम कर्मचारियों का घर-घर तक संपर्क व डाटा रहता है। इसी तरह पुलिस को किराएदारों की जानकारी एकत्र करने का प्रावधान है। पुलिस थानों के वीट सिस्टम में तैनात कर्मचारियों को भी अपनी वीट के घर-घर की जानकारी लेना होती है। नगर निगम व पुलिस के स्तर पर यदि संवेदनशील क्षेत्रों में नए लोगों की जानकारी रखने का सिस्टम विकसित कर कड़ाई से प्रक्रिया को अपनाया जाने पर इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

शहर में नए आने वाले किराएदारों की जानकारी पुलिस द्वारा एकत्र की जाती है। इस प्रक्रिया को कलेक्टर से चर्चा कर धारा 144 के तहत अनिवार्य किए जाने क विचार किया जाएगा - अमित सांघी, एसएसपी