आदिनाथ के मोक्ष के उपंरात गजरजो ने खिंच रथ...

पंचकल्याणक महोत्सव के अंतिम दिन भगवान आदिनाथ को मिला मोक्ष, गजरथ फेरी में उमंड़ा जनसैलाब

ग्वालियर । फूलबाग मैदान अयोध्य नगरी में जैन सिध्दक्षेत्र गोपालचल पर्वत जे इतिहास में राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज, मुनिश्री विजयेश सागर महाराज, विजयेश सागर व ऐलक श्री विनियोग सागर महाराज के सानिध्य में शहर में हुए पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव का गुरुवार को गजरथ फेरी के साथ समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन प्रभु का मोक्ष की ओर गमन हुआ। इस पूरे आयोजन में अनेक प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित किया गया। जिन्हें गोपाचल जैन मंदिर व अन्य मंदिरों में स्थापित किया जाएगा। पंचकल्याणक कार्यक्रम में पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया हुई, जो गर्भ कल्याणक से शुरू होकर और मोक्ष कल्याणक के रूप तक हुई।पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह जैसे ही आदिनाथ को कैलाश पर्वत से निर्वाण के साथ मोक्ष हुआ। वही मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ससंघ सानिध्य मे भगवान जिनेंद्र की शांतिधारा अनिल दीपिका जैन परिवार ने की। प्रतिष्ठाचार्य पं. अजित कुमार शास्त्री एवं सह प्रतिष्ठाचार्य पं. श्री चंद्रप्रकाश जैन ने मंत्रउच्चरण के साथ यज्ञनायक अजय जैन, सौधर्म इन्द्र निहित जैन, कुबेर अनुराग जैन, महा यज्ञनायक मुकेश जैन राकेश जैन सहित इंद्र-इंद्राणियो ने विश्वशांति महायज्ञ में अग्नि प्रकाट कर पूरे विश्वशांति की यज्ञ कुडं मे आहूति देकर कामना करते हुए पूर्णाहूति दी गई। पंचकल्याणक महोत्सव में पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाह एवं  दक्षिण विधानसभा के विधायक प्रवीण पाठक ने पहुँचक मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ससंघ से मंगल आशीर्वाद लिया। पूर्व मंत्री व विधायक जी का सम्मान आयोजन समिति के डॉ वीरेंद्र गंगवाल, श्यामलाल विजवर्गी, अजीत वरैया, अध्यक्ष सिंघई महेशचन्द्र जैन गुरु, संयुक्त अध्यक्ष विकास गंगवाल, महामंत्री पवन जैन पत्रकार, स्वागत अध्यक्ष विमल जैन, अनिल शाह मुख्यसंयोजक बालचंद जैन, विनय कासलीवाल, वीरेंद्र जैन, पंकज जैन आदि ने साफा पहनाकर व स्मृति चिन्ह देकर किया। महोत्सव के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव के अन्तिम दिन भगवान आदिनाथ को मोक्ष प्राप्ति के उपरांत गजरथ फेरी निकाली गई जिसमे कभी संख्या जैन समाज के जनसैलाब उमड़ा पडा। गजरथ रथ मे मुख्य सारथी सिंघई अनिल दीपिका जैन सहित इंद्रा-इंद्राणि सवार होकर भगवान अदिनाथ की प्रतिमा को लेकर बैठे थे। गजरथ फेरी मे मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ससंघ एवं हजारों की संख्या मे जैन समाज के लोगो ने पंडाल की सात परिक्रम लगाई गई। गजरथ के पीछे से महिलाएं भजन गाती एवं हाथो से ढकेलती हुई चल रही थी। उदयपुुर बैड के भजनो पर बालक और बालिकाए नृत्य करते हुए चल रही थे! गजरथ की सात परिक्रम पूर्ण होने के बाद भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया गया।