लुटने का सीजन,सावधान रहिये ...

आईपीओ एक जोखिम भरा निवेश है व्यक्तिगत निवेशकों के लिए !

दुनिया के साथ देश भले ही ' ओमीक्रान ' की लहरों में उलझता नजर रहा हो लेकिन देश के धनपशुओं की नजर आपकी जेब पर है ,इसलिए ' ओमीक्रान ' के साथ-साथ इनसे भी सावधान रहिये. देश के चुनिंदा धनपशु आपको मुनाफे का लालच देकर आईपीओ के जरिये आपकी जेबें खाली कराने की तैयारी कर चुके हैं .

घर बैठे मुनाफ़ा कमाने के लिए अधिकतर मध्यम वर्गीय भारतवासी आईपीओ का सहारा लेता है .आईपीओ का मतलब आपकी जेब से रुपया निकालकर उद्योग खड़ा करना और इसके बदले अकूत मुनाफे में से कुछ हिस्सा आपको भी देना .आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ  का बाजार चालू जनवरी-मार्च की तिमाही में भी गुलजार रहेगा। तिमाही के दौरान 23 कंपनियां आईपीओ के जरिये 44,हजार  करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही हैं। मर्चेंट बैंकरों ने यह जानकारी दी। आईपीओ से राशि जुटाने के मामले में प्रौद्योगिकी आधारित कंपनियां सबसे आगे रहेंगी। 

आईपीओ के जरिये आपकी जेब से रुपिया निकालने वाली कंपनियां बैंको से पहले ही मोटी रकम निकाल चुकी होती हैं,लेकिन इनका पेट नहीं भरता,तब ये अपना स्माराज्य बढ़ने के लिए जनता की जेबें थथोलना शुरू कर देती हैं. हमारी सूचना के मुताबिक़ मार्च तिमाही के दौरान जिन कंपनियों के आईपीओ के जरिये धन जुटाने की उम्मीद है... उनमें ओयो (8,430 करोड़ रुपये) और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी कंपनी डेल्हीवरी (7,460 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इनके अलावा अडाणी विल्मर (4,500 करोड़ रुपये), एमक्योर फार्मास्युटिकल्स (4,000 करोड़ रुपये), वेदांत फैशंस (2,500 करोड़ रुपये), पारादीप फॉस्फेट्स (2,200 करोड़ रुपये), मेदांता (2,000 करोड़ रुपये) और इक्सिगो (1,800 करोड़ रुपये) के आईपीओ भी तिमाही के दौरान आने की उम्मीद है।स्कैनरे टेक्नोलॉजीज, हेल्थियम मेडटेक और सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज भी समीक्षाधीन तिमाही के दौरान आईपीओ ला सकती हैं। 

रिकूर ​​क्लब के संस्थापक एकलव्य कहते हैं कि-' जनता से पूंजी जुटाने के लिए की जाती है, जिससे उनके शेयर की तरलता बढ़ती है और साथ ही मूल्य की खोज में भी मदद मिलती है।' ''लर्नऐप.कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रतीक सिंह का तर्क है कि  प्रौद्योगिकी कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर विस्तार करना चाहती हैं और इसके लिए उन्हें पूंजी की जरूरत होती है। ऐसे में वे आईपीओ मार्ग के जरिये धन जुटाना पसंद करती हैं।

आईपीओ का मतलब है सार्वजनिक प्रस्ताव यानि  जब एक कंपनी अपने सामान्य स्टॉक या शेयर पहली बार जनता के लिए जारी करती है तो उसे आइपीओ अथवा " सार्वजनिक प्रस्ताव " कहा जाता है यह अधिकतर छोटी, नई कंपनियों द्बारा जारी किए जाते हैं जो अपने व्यापार को बढाने के लिए पूँजीचाहती हैं, पर अब यह बड़ी निजी-स्वामित्व वाली कंपनियों द्बारा भी जारी किए जाते हैं ,बल्कि अब सरकार भी अपने नवरत्नों के लिए इस खेल में शामिल हो चुकी है 

 मेरे हिसाब से आईपीओ एक जोखिम भरा निवेश है व्यक्तिगत निवेशकों के लिए, यह भविष्यवाणी करना कठिन है कि शेयर अपने प्रारंभिक दिन के व्यापार और निकट भविष्य में कैसा प्रदर्शन करेंगे क्योंकि  उनके पास कंपनी का विश्लेषण करने के लिए पर्याप्त आंकड़े नही होते हैं साथ ही अधिकतर आईपीओ उन कंपनियों के हैं जो एक अस्थायी विकास के दौर से गुज़र रही हैं, इसलिए उनके भविष्यगत मूल्य के सन्दर्भ में अनिश्चितता बनी रहती है.स्थापित कंपनियां इसका अपवाद होती हैं लेकिन वे भी किसी भी वक्त आपको डूबा सकती हैं.इसलिए आईपीओ के जरिये कमाई का काम किसी जुए से ज्यादा नहीं ,तो कम भी नहीं है

कम आमदनी के कारण इस घर  बैठे माध्यम  से पैसा  कमाने  के फेर  में मैंने  भी अपनी  पूंजी  गंवाई  है ,इसलिए आपको बता  दूँ  कि पिछले 10 साल में आए ज्यादातर आईपीओ ने निवेशकों का पैसा डूबाया है. जबकि इस दौरान बाजार के सेंटिमेंट में नाटकीय सुधार देखने को मिला है. पिछले दशक में भारतीय शेयर बाजार ने इतिहास में तेजी का सबसे बड़ा दौर देखा है.उपलब्ध  आंकड़ों के अनुसार, साल 2008 से आए 164 आईपीओ में से 100 आईपीओ के शेयर अपने इश्यू प्राइस के नीचे कारोबार कर रहे हैं. शेष शेयरों ने सकारात्कम रिटर्न दिया है. केवल 44 कंपनियों ने 10 फीसदी से अधिक रिटर्न दिया है. इस दौरान सेंसेक्स ने 100 फीसदी की छलांग लगाई है.

पुराना अनुभव बताता है कि सूचीबद्ध होने के समय आईपीओ थोड़ी-बहुत तेजी दिखाते हैं. मगर कुछ समय बाद यह बढ़त हवा हो जाती है. ऐसे में जो निवेशक आईपीओ के बाद शेयरों को लंबे समय तक बनाए रखते हैं, उन्हें घाटा होने के आसार बढ़ जाते हैं. साथ ही इंवेस्टमेंट बैंक भी ज्यादा वैल्यूएशन की मांग कर रहे हैं. इस वजह से आईपीओ के निवेशक को होने वाला मुनाफा घट रहा है. जनता की जेब से पैसा निकालने के लिए  कई कंपनियां आईपीओ पेश करने से पहले कंपनी की बेहतरीन तस्वीर पेश करती हैं. फिर वे फ्लॉप हो जाते हैं.

अतीत में झांकें तो ज्यादातर कंपनियां निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहती हैं. इस वजह से आईपीओ में निवेश सही रणनीति नहीं हैं. निवेशकों को कंपनी के मौजूदा और भविष्य के प्रदर्शन पर गौर करना चाहिए. वाजिब कीमत वाली कंपनी पर दांव खेलना ही मुनासिब होगा. पैसा डूबोने वाले आईपीओ में सबसे ऊपर इसमें गैमॉन इंडिया, श्रीराम ईपीसी, डीबी रियल्टी, रिलायंस पावर, जेपी इंफ्राटेक जैसी कंपनियों के शेयर अपनी 90 फीसदी से ज्यादा वैल्यू गंवा चुके हैं. ये कंपनियां 2008 की मंदी से पहले सूचीबद्ध हुई थीं.ये इंफ्रास्ट्रक्चर और रीयल एस्टेट कंपनिया हैं .

प्रायवेट सेक्टर की कंपनियां तो पैसा डुबाती  हैं किन्तु सरकारी कंपनियां भी इस खेल में पीछे नहीं हैं. सरकारी कंपनियों के आईपीओ के मामले में एकाध अपवाद को छोड़ दें, तो सरकारी कंपनियों के कुल सेंटिमेंट कोई खास उत्साह नहीं जगाता है. वैल्यू के आधार पर उनकी क्वालिटी पर हमेशा ही संशय रहता है.बहरहाल  मेरा  उद्देश्य  आपको हतोत्साहित  करना नहीं बल्कि सावधान करना है .यदि  आपके  पास  जोखिम  उठाने  की क्षमता  है तो आप  जरूर  इस खेल में शामिल  हों .पता  नहीं कब  आपकी किस्मत  चमक  जाए  ?

- राकेश  अचल