इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग में शामिल कर…

WHO ने दी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी

नई दिल्ली। भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को आज विश्व स्वास्थ्य संगठन के पैनल द्वारा आपातकालीन उपयोग सूचीकरण का दर्जा दिया गया है। इसे उन लाखों भारतीयों के लिए बड़ी राहत बताई जा रही है जिन्होंने इसकी डोज ली है औऱ देश से बाहर यात्रा करना चाहते हैं। ग्लोबल हेल्थ बॉडी ने कहा कि तकनीकी सलाहकार समूह (एक स्वतंत्र पैनल जो डब्ल्यूएचओ को टीके की सिफारिशें प्रदान करता है) ने निर्धारित किया है कि कोवैक्सिन COVID-19 से सुरक्षा के लिए मानकों को पूरा करता है। वैक्सीन का लाभ जोखिम से कहीं अधिक है, इसलिए वैक्सीन का उपयोग किया जा सकता है। बता दें कि कोवैक्सिन की दोंनों डोज लेने के बाद भी कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए इसे मान्यता नहीं दी है। 

हालांकि शीर्ष स्वास्थ्य निकाय द्वारा अनुमति मिलने के बाद इस फैसले को अब बदला जा सकता है। हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया और ओमान ने भी यात्रियों के लिए एक वैध वैक्सीन के रूप में कोवैक्सिन को मान्यता दी है। वहीं श्रीलंका, ईरान, मैक्सिको, ग्रीस, फिलीपींस, नेपाल, एस्टोनिया, जिम्बाब्वे और मॉरीशस में यात्रा के लिए COVID-19 टीकों की स्वीकृत सूची में भी कोवैक्सिन को शामिल किया गया है। आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल होने के बाद भारत बायोटेक उन देशों को वैक्सीन भेज सकेगी जो डब्ल्यूएचओ के मार्गदर्शन पर निर्भर हैं। अनुमति मिलने के साथ ही देशों को कोवैक्सिन के आयात की प्रक्रिया में तेजी आने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (यूनिसेफ), पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और जीएवीआई कोवैक्स सुविधा जैसे वैश्विक निकायों को जरूरतमंद देशों को वितरण की अनुमति भी देता है। WHO की मंजूरी से कुछ समय पहले Covaxin की शेल्फ लाइफ को 12 महीने तक के लिए बढ़ा दिया गया था। 

जब इसे पहली बार देश में आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिली थी, तब वैक्सीन की शुरुआत में छह महीने की शेल्फ लाइफ थी। फाइजर/बायोएनटेक और मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा विकसित एडेनोवायरस वेक्टर टीके और चीन के निष्क्रिय टीके सिनोवैक बायोटेक और सिनोफार्म के बाद कोवैक्सिन सातवां ऐसा टीका है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी सूची में शामिल किया है। वैक्सीन ने COVID-19 के खिलाफ 77.8 प्रतिशत प्रभावशीलता और नए डेल्टा संस्करण के खिलाफ 65.2 प्रतिशत सुरक्षा दिखाई है। जून में कंपनी ने कहा था कि उसने चरण 3 परीक्षणों से कोवैक्सिन प्रभावकारिता का अंतिम विश्लेषण समाप्त कर लिया है। कोवैक्सिन और एस्ट्राजेनेका व ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविशील्ड भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले दो टीके हैं।