मूल पदस्थापना का पता नहीं विभाग ने दिया दूसरे कार्यालय का प्रभार एवं वित्तीय अधिकार…

पद और अधिकार का दुरुपयोग कर निकाला वेतन एवं एरियर

ग्वालियर। बृजेष चतुर्वेदी। ग्वालियर संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा विभाग मैं पूर्व संयुक्त संचालक अरविंद सिंह का स्थानांतरण ग्वालियर से होशंगाबाद होता है और उज्जैन से आरके उपाध्याय का स्थान पर ग्वालियर आदेश प्राप्त होने पर आरके उपाध्याय ग्वालियर में कार्यभार ग्रहण कर लेते हैं परंतु 4 वर्षों से ग्वालियर में जमे रहने के कारण अरविंद सिंह को ग्वालियर से इतना लगाव हो गया कि वह ग्वालियर छोड़ना नहीं चाह रहे थे।

श्रीसिंह ग्वालियर छोड़कर नहीं गए और विभाग उनका स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया जिस पर आरके उपाध्याय माननीय न्यायालय की शरण में चले गए माननीय न्यायालय द्वारा श्री उपाध्याय को स्थगन आदेश दे दिया गया तथा अरविंद सिंह को कार्यमुक्त कर दिया परंतु विभाग द्वारा न्यायालय के स्थगन आदेश की भावना को दरकिनार कर दिसंबर 2020 में अरविंद सिंह का कार्यमुक्ति आदेश निरस्त कर दिया 8 अक्टूबर 2020 से दिस 17 दिसंबर 2020 तक की अवधि में अरविंद सिंह अनुपस्थित रहे और 17 दिसंबर 2020 को कार्य मुक्ति आदेश निरस्त होने पर दोबारा संयुक्त संचालक कार्यालय ग्वालियर में उपस्थित हो गए । 

लेकिन 24 मार्च 2021 को माननीय उच्च न्यायालय  द्वारा आरके उपाध्याय के पक्ष में फैसला दिया  विभाग ने इस फैसले का भी सम्मान नहीं किया और लोक शिक्षण संचनालय भोपाल के अप्रैल के आदेश में अरविंद सिंह को विधि प्रकोष्ठ ग्वालियर का प्रभार दे दिया गया साथ ही वित्तीय अधिकार भी दे दिए इसका फायदा उठाते हुए अरविंद सिंह ने 8 अप्रैल 2020 से 17 दिसंबर 2020 तक के बिना स्वीकृत अवकाश का वेतन वह एरियर आहरण कर लिया । 

यहां सोचने वाली बात है की संयुक्त संचालक कार्यालय से अंतिम वेतन प्रमाण पत्र होशंगाबाद के लिए जारी होता है तो फिर ग्वालियर से इनका वेतन आहरण कैसे हो गया और संयुक्त संचालक विधि प्रकोष्ठ का प्रभार इनके पास था तो मूल पदांकन कहा था ? क्योंकि अरविंद सिंह को प्रभार दिया गया था ना कि स्थानांतरण किया गया था ! इसका जवाब विभाग व शासन किसी के पास नहीं है ! क्या  विभाग उन्हें बचाने में इसीलिए वित्तीय अनियमितता जैसी बड़ी घटना के बाद भी विभाग मौन बना बैठा है ऐसा प्रतीत होता है कि श्री सिंह ने ये कारनामा विभाग व शासन की सहमति से किया है।  

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्वालियर में रहते हुए अरविंद सिंह ने आश्चर्यचकित करने वाली कई कारनामों को अंजाम दिया है जैसे नवंबर 2019 में ग्वालियर संभाग के श्योपुर जिले के 40 विद्यालयों का एक ही दिन में ऑडिट और ग्वालियर संभाग में अनुकंपा नियुक्ति 4 पद रिक्त के विरोध लगभग 24 नियुक्तियां जैसे कारनामों को भी अंजाम दिया है जिसकी सूचना लोक शिक्षण संचनालय तक पहुंच गई परंतु अरविंद सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं हुई बल्कि उन्हें बचाया गया।