मोदी के यूरोप दौरे का दूसरा दिन ...

तीन देशों के राष्ट्राध्यक्षों और  पोप से भी मुलाकात होगी 


शनिवार को मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत तीन राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे कैथोलिक क्रिश्चियन्स के सबसे बड़े धर्म-गुरु पोप फ्रांसिस और सेक्रेट्री ऑफ स्टेट कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन से भी बातचीत करेंगे। पोप से मुलाकात प्रधानमंत्री के ऑफिशियल शेड्यूल का हिस्सा नहीं थी, क्योंकि विदेश मंत्रालय ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। हालांकि, अब यह तय हो गया है कि पोप से मिलने के लिए मोदी वेटिकन सिटी जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूरोप दौरे का आज दूसरा दिन है।

पोप फ्रांसिस से मुलाकात के लिए प्रधानमंत्री वेटिकन सिटी जाएंगे। पोप और मोदी की यह पहली मुलाकात होगी। इस पर नजरें होंगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री सेक्रेट्री ऑफ स्टेट कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन से भी मुलाकात करेंगे। दुनिया में इस मुलाकात का अच्छा संदेश जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी पोप से मिल रहे हैं। मोदी और बाइडेन के बीच भी संक्षिप्त मुलाकात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मोदी की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। दोनों के बीच पिछले महीने आकुस (AUKUS) के मसले पर भी बातचीत हुई थी। हालांकि, तब ये बातचीत फोन पर हुई थी। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच सबमरीन डील को लेकर काफी तनातनी हुई थी और इसका असर सीधे तौर पर कहीं न कहीं AUKUS पर होता नजर आ रहा था। हालांकि, फिलहाल जो बाइडेन और मैक्रों की बातचीत हो चुकी है और मामला ठंडा होता नजर आ रहा है।

मोदी की कोशिश होगी कि किसी भी तरह AUKUS देशों के बीच मतभेद न हों। क्योंकि, अगर ऐसा होता है तो चीन हिंद और प्रशांत महासागर में इसका फायदा उठा सकता है और कोई भी देश ये नहीं चाहेगा। मोदी-मैक्रों की मुलाकात में आपसी संबंधों पर विस्तार से बातचीत होना तय है।

उधर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन इस समिट में वर्चुअली शामिल हो रहे हैं। यानी इस बात की कोई संभावना नहीं है कि इस विश्व मंच पर दोनों देशों के नेताओं से प्रधानमंत्री की मुलाकात होगी। भारत और रूस के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं और मजबूत रक्षा सहयोग है। लेकिन, चीन को लेकर न सिर्फ दुनिया फिक्रमंद है, बल्कि भारत को खास तौर पर चीन से खतरा है।

लद्दाख का मसला अब तक सुलझा नहीं है और 14 दौर की बातचीत के बाद भी पूरी तरह कुछ क्षेत्रों से सैन्य वापसी नहीं हो सकी है। ऐसे में भारत चाहेगा कि दक्षिण चीन सागर के तमाम सहयोगियों को एक साथ चीन के विस्तारवादी इरादों के खिलाफ लाया जाए। यहां इंडोनेशिया भी होगा और सिंगापुर भी। मोदी इन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मुलाकात करेंगे।