शहर की प्रमुख दो समस्याओं में से एक…

आवारा पशुओं के मामले में सक्रिय हुआ नगर निगम !

 

ग्वालियर। शहर की प्रमुख दो समस्याओं में से एक सड़क के जगह-जगह गड्डे और दूसरी थी आवारा पशुओं की मार से महिलाओं व बच्चों के बच्चों की जान का खतरा नगर निगम में पिछले 1 महीने में पहले ही आयुक्त के तौर पर आए किशोर कन्याल साहब ने अपनी अपनी कार्यशैली से ग्वालियर के आवारा पशुओं खासतौर से गायों को पकड़ने की सफल मुहिम चलाकर शहर की महिलाओं व बच्चों पर व बुजुर्गों पर काफी अच्छा प्रभाव डाला है, उनकी जान बचाई है। जहां नगर निगम व पुलिस से आधे शहर को शिकायत रहती थी, अब कम से कम नगर निगम से आवारा आवारा पशुओं को कंट्रोल में करने की शिकायतें कुछ कम हुई हैं। लगता है कि इसी तरह निगमायुक्त कन्याल अपनी सफल कार्यशैली से ग्वालियर शहर को  सफाई की जो खास मुहिम है जिसमें वह महिलाओं से बच्चों से बुजुर्गों से सहयोग मांगते दिखाई दे रहे हैं।

इसमें भी शायद वह कुछ कामयाब रहें और इंदौर के बाद शायद ग्वालियर का नाम आगे बढ़ जाए। ग्वालियर नगर निगम को मात्र 700 करोड रुपए का राजस्व हर साल प्राप्त होता है वर्तमान निगमायुक्त कन्याल चाहते हैं कि इसमें कम से कम 3 गुना इजाफा कर दो हजार करोड़ रूपया इसकी वसूली बढ़ा दी जाए। लोकतंत्र में शायद यह संभव आसानी से तो लगता नहीं है क्योंकि क्योंकि यहां सियासतदां  इस मामले में किसी अफसर को कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सपोर्ट करने को तो तैयार है ही नहीं, पर फिर भी कन्याल शायद पहले ऐसे निगम कमिश्नर पिछले 10 साल में साबित होंगे जो ग्वालियर की जनता को संवेदनशील ढंग से डील करने के लिए याद किए जाएंगे, क्योंकि शहर की सबसे बड़ी दो समस्याओं में से एक समस्या पर उन्होंने काबू पा लिया है। पहली समस्या सड़क के गड्डे कही जा सकती है।

दूसरी आवारा पशुओं ने पिछले 3 साल में कम से कम 100 महिलाओं व बच्चों को चोट पहुंचाकर उनको स्वर्ग का रास्ता तक कटवा दिया है। यह घटना है तो कम से कम हजारों में हुई हैं, लेकिन सौ लोगों को स्वर्ग पहुंचाने का काम इन आवारा पशुओं ने कर दिया है। कई कलेक्टर देखे, सुने गए जो यह कहते हैं कहते रहे कि आवारा पशुओं को पालने वाले और उनको पकड़ उनका दूध निकालकर आवारा छोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, पर अभी तक कुछ ऐसा संभव नहीं हुआ। आज से 15 दिन पहले पुलिस अधीक्षक ने मुझे स्वयं बताया था कि मेरी कार को भी यह आवारा पशु गाय, आवारा सांड टक्कर मारते हैं, क्या किया जा सकता है लेकिन अब आप को टक्कर मारने के दिन शायद दूर हो गए हैं लगता है। 

90 फीसदी आवारा पशुओं पर नगर निगम आयुक्त ने अपनी कार्यशैली के द्वारा अपने कर्मचारियों की मदद से, पुलिस की मदद से, आम जनता के सहयोग से काफी कुछ सफलतापूर्वक काम किया है। इसके लिए बहुत लंबे अरसे के बाद किसी निगमायुक्त को उसकी मात्र 1 महीने के कार्यकाल में इतनी जल्दी सफलता मिल जाना एक के अचंभे की बात है। कन्याल चाहते हैं कि वेस्ट कचरे, गोबर का भी उपयोग ग्वालियर शहर में कुछ सफलतापूर्वक किया जा सके। उसके लिए भी वह दूध डेयरी वालों से चर्चा कर चुके हैं और उनका गोबर खरीद रहे, जो टनों के हिसाब से पहुंच चुका है। नगर निगम जनता को राहत देने लगता है, ग्वालियर में रहे बुच परिवार के सदस्य राकेश श्रीवास्तव, शिवराज सिंह के बाद कोई संवेदनशील आईएएस ऑफिसर ग्वालियर में निगम आयुक्त के तौर पर आए हैं उनका नाम है किशोर कन्याल हम भी उनके अच्छे काम में उनके साथ हैं। संवेदनशील नौकरशाहों को आमजनता का सहयोग व मार्गदर्शन भी जरुरी होना चाहिए।

नईम कुरेशी