मुख्यमंत्री के तीखे तेवर…

CM शिवराज ने किया CPA खत्म करने का ऐलान

भोपाल की खराब सड़कों को लेकर नाराज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बरसों पुरानी एजेंसी CPA (राजधानी परियोजना प्रशासन) को तत्काल प्रभाव से समाप्त के निर्देश दे दिए हैं। CPA का अस्तित्व समाप्त करने के ऐलान के साथ ही कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। सीपीए के प्रोजेक्ट और सड़कें अब किसके हवाले होगी, यह सवाल पैदा हो गया है। वर्तमान में एजेंसी के कलियासोत नदी पर 6 करोड़ रुपये का ब्रिज या जेके रोड समेत 25 प्रोजेक्ट चल रहे हैँ। इसके अलावा, 92 किमी सड़कों की देखरेख भी सीपीए ही करता है। 

दरअसल, राजधानी की सड़कें सरकार के दामन पर दाग बन गई हैं। 50% सड़कें ऐसी हैं, जो बारिश में उखड़ चुकी है। कई जगह तो सड़कें गड्ढों में ही गायब हो गई हैं। कोलार, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड, कमला पार्क समेत पुराने शहर की सड़कों की स्थिति सबसे ज्यादा जर्जर है। हालांकि, लीलापोती के तौर पर गड्ढों में मिट्टी और गिट्टी डाल दी गई है। इस कारण सियासत गरमा चुकी है। कांग्रेस नेता सरकार को घेर भी चुके हैं। इसे लेकर CM शिवराज सिंह ने शुक्रवार को बैठक बुलाई। इसमें ही निर्णय लिया गया, CPA को समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने सड़कों की मरम्मत को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। 

सीएपी में 1 अधीक्षण यंत्री, 4 EE, 20 एसडीओ, 50 सब इंजीनियर व करीब 250 कर्मचारियों समेत 325 लोगों का स्टाफ है। इसके अलावा, 1000 से ज्यादा दैनिक वेतनभोगी हैं। वेतन, बिल्डिंग मेंटेनेंस व अन्य कार्यों पर 150 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष खर्च किए जाते हैं। हालांकि, उक्त अधिकारी-कर्मचारी अन्य विभागों के हैं। पीडब्ल्यूडी, पीएचई, नगरीय प्रशासन, वन आदि विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को यहां प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। ऐसे में अफसर-कर्मचारियों को मूल विभाग में भेजा जाएगा। शहर को व्यवस्थित तरीके से डेवलप करने के लिए साल 1960 में आवास एवं पर्यावरण विभाग के अंतर्गत CPA का गठन किया गया था। इसका काम भोपाल शहर की सड़कों को बनाना और उनका मेंटेनेंस करना था। इसके अलावा, उसके जिम्मे पर उद्यान, बिल्डिंग निर्माण, पुल-पुलियाएं बनाने आदि के काम भी आ गए। वीआईपी रोड से लेकर एनेक्सी भी सीपीए ने ही बनाए हैं। 

हालांकि, एनेक्सी को लेकर सीपीए के अफसर कई बार रडार पर आ चुके हैं। सूत्र बताते हैं, CPA को समाप्त करने के लिए कई दिन पहले से ही स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी थी। यह भी सामने आ रहा है कि अब सीपीए का काम पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया जाएगा, क्योंकि सीपीए के अधिकांश काम निर्माण से जुड़े हैं। सरकारी भवनों का मेंटेनेंस पीडब्ल्यूडी बेहतर तरीके से कर सकता है। पीडब्ल्यूडी मंत्री गोपाल भार्गव जब भोपाल के प्रभारी मंत्री थे, तब सड़कों की एक एजेंसी तय करने का मुद्दा उन्होंने उठाया था। 

वहीं, उन्होंने संबंधित एजेंसी के बोर्ड भी सड़कों पर लगवाए थे। इसके अलावा भोपाल के पूर्व महापौर आलोक शर्मा भी सड़कों के निर्माण को लेकर एक एजेंसी तय करने की बात कह चुके हैं। जब वे महापौर थे, तब यह मुद्दा काफी उछला था। ऐसा नहीं है, सीपीए सिर्फ सड़कों का काम ही देखता था। नए शहर को खूबसूरती देने में उसकी बड़ी भूमिका रही है। नए मंत्रालय एनेक्सी बनाने से लेकर VIP रोड जैसे कई बड़े काम उसने ही किए हैं। इसके अलावा, अभी 25 से ज्यादा प्रोजेक्ट चल भी रहे हैं। मयूर जैसे पार्क भी सीपीए के हवाले हैं। हालांकि, एनेक्सी में लिफ्ट मैनेजमेंट को लेकर कई बार सीपीए के अफसर रडार पर आ चुके हैं।