रेमडेसिविर को लेकर देर रात जिला चिकित्सालय में हंगामा…

जिला अस्पताल प्रबंधन इंजेक्शन लगाने में कर रहा भेदभाव !

शाजापुर। अंधेर नगरी चौपट राजा, टका सैर भाजी, टका सैर खाजा… जिले में इन दिनों स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था इन्ही पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए चल रही है। जिला अस्पताल प्रबंधन पर लगातार रेमडेसिविर इंजेक्शन मरीजों को लगाने में भेदभाव किए जाने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन मौन है, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन की मनमानी और प्रशासन की चुप्पी के कारण कोरोना संक्रमित मरीजों को इंजेक्शन नही लग रहे हैं जिसकी वजह से हर दिन जिला अस्पताल में हंगामा खड़ा हो रहा है। मंगलवार देर रात करीब 1.30 बजे भी इंजेक्शन को लेकर अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ और इस हंगामें के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन गायब हो गए। देररात कुछ मरीजों को इंजेक्शन लगाए जाने का प्रयास करना और फिर हंगामा होने पर इंजेक्शनों का गायब हो जाना अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर संदेह पैदा कर रहा है। 

वहीं आश्चर्य की बात है कि इंजेक्शन के गायब हो जाने पर अस्पताल के जिम्मेदार कुछ भी कहने को तैयार नही हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में कोरोना संक्रमण की वजह से लोगों की जान पर बनी हुई है, ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की मनमानी और जिला प्रशासन की सुस्त कार्यशैली के चलते दिनों दिन जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ती ही जा रही हैं। यही वजह है कि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचने के बाद भी न तो मरीजों को समय पर ऑक्सीजन सिलेंडर दिया जा रहा है और न ही रेमडेसिविर इंजेक्शन मरीजों को लगाए जा रहे हैं, जिसकी वजह से अस्पताल में विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। गौरतलब है कि हर दिन जिला चिकित्सालय में रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलेंडरों को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। 

मंगलवार को भी देररात करीबन 1.30 बजे रेमडेसिविर इंजेक्शन लेकर ड्यूटी डॉक्टर संजय चांदना स्टाफ के साथ संदेहास्पद ढंग से मरीजों को लगाने आए तो वहां मौजूद परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजनों का आरोप था जो गंभीर मरीज हैं जिनके नाम इंजेक्शन की सूची में हैं उनके नाम भेदभाव के चलते गायब कर दिए गए हैं और देररात डॉक्टर संदेहास्पद ढंग से इंजेक्शन क्यों लगा रहे हैं? इस मामले में ड्यूटी डॉक्टर से जब पूछा गया कि जो इंजेक्शन बांट रहे थे वह कहां हैं तो उसका कहना था कि पता नहीं इंजेक्शन कहा हैं। अब इस पूरे मामले में सवाल यह उठता है कि देर रात 1 बजे के बाद ही मरीजों को इंजेक्शन क्यों बांटे जा रहे थे। वहीं हंगामें के बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन कहां गायब हो गए। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नही हैं।

मैं नियमानुसार स्टॉफ के साथ मरीजों को इंजेक्शन बांट रहा था, तभी कुछ लोगों ने हंगामा कर दिया। हंगामें के दौरान इंजेक्शन कहां चले गए मुझे पता नही। - संजय चांदना, ड्यूटी डॉक्टर जिला अस्पताल शाजापुर