मेला को जल्द से जल्द समेटने के निर्देश…

मुख्यमंत्री के आदेश से व्यापारियों में मचा हड़कंप !

ग्वालियर व्यापार मेला लगने के बाद फिर एक बार चर्चा में आ गया है। जैसे-जैसे देश में कोरोना का संकट पैर पसारता जा रहा है वैसे-वैसे मेला पर सवाल उठने लगे कि कहीं मेला से ग्वालियर में कोरोना ब्लास्ट नहीं हो जाये। ग्वालियर में रोज 30-40 नये केस सामने आ रहे है। ऐसे में मेला कहीं कोरोना संक्रमण के लिए साफ्ट टारगेट नहीं बन जाये और ग्वालियर में हाटस्पाट बनकर प्रशासन के हाथ पाव नहीं फूल जाये। मुख्यमंत्री ने बीते रोज बैठक में हालांकि मेला को जल्द से जल्द समेटने का निर्देश दिया है। 

साथ ही होली के मिलन समारोह सहित अन्य सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। कोरोना संकट के मध्यप्रदेश में चरम पर पहुंचने से भोपाल, इंदौर और जबलपुर में रविवार का लाकडाउन भी घोषित कर दिया है। ग्वालियर में भी 10 बजे तक बाजार बंदी की बात कही गई है। मेला पर मुख्यमंत्री के निर्देश आने के बाद व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। 

व्यापारियों का कहना है कि माल भर लिया है और मेला फीस भी भर दी गई है। दुकान लगाने में खर्चा कर दिया है। ऐसे में अब मेला समेटा गया तो हम तो नुकसान में जायेंगे। साथ ही कई व्यापारियों ने बर्बाद होने तक की बात कह डाली। मुख्यमंत्री ने कोविड के पैर पसारने को देखते हुये यह सख्त कदम उठाया है। 15 फरवरी से मेला लगाने का ऐलान हुआ था। मुख्यमंत्री ने स्वयं कार्यालय का उदघाटन किया था। 

सासंद ज्योतिरादित्य सिंधिया की जिद पर मुख्यमंत्री ने बिना लगे मेला का फीता काटा था। अब जाकर भी मेला पूरा नहीं लग पाया है, इलेक्ट्रोनिक्स शोरूमों का निर्माण जारी है। ऐसे में बीच रास्ते में मेला समेटने से व्यापारियों मंव गुस्सा है। वहीं बाहर के व्यापारी तो अपना सामान समेटकर चले गये है। आफ सीजन में लगे मेला में आटोमोबाइल सेक्टर सहित मेला प्राधिकरण और सरकार की तो चांदी हो गई, लेकिन इलेक्ट्रोनिक्स सहित अन्य व्यापारियों को नुकसान होने की चर्चा है।