स्मार्ट ग्वालियर ! 

भिखारियों के रूप में बाहरी लोगों की जमात

ग्वालियर में दिनों-दिन लगातार बाहरी लोगों का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है। जो व्यस्ततम बाजारों के फुटपाथ ओं पर ड्राई फ्रूट्स, कपड़े जूते आदि बेचने का कार्य कर रहे हैं। जो फुटपाथ लोगों के पैदल चलने के लिए बनाए गए हैं बातों पर इन लोगों ने कब्जा कर अपनी दुकानें सजा लीं है। इस प्रकार की दुकान है पड़ाव फूल से लेकर फूल बाग गुरुद्वारा तक, थाटीपुर चौराहे से लेकर कुमार पुरा तक, मोती महल बायजाताल आदि क्षेत्रों में देखी जा सकती हैं। इनकी की वजह से पैदल चलने वालों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पर चलने को मजबूर हैं। यही कारण है कि आए दिन यह पैदल चलने वाले लोग किसी न किसी गाड़ी की चपेट में आकर अपनी जान गवा देते हैं या गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। दुकान लगाने वाले लोगों के साथ जो परिवार हैं यानी कि इनकी महिला साथी इनके बच्चे वह शहर के चौराहे पर भीख मांगने का कार्य करते हैं। इनका भीख मांगने का तरीका भी इतना शातिर होता है कि लोग इन्हें पैसा देने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जैसे ही किसी चौराहे पर लाल बत्ती होती है वैसे ही ये महिलाएं, बच्चे (जिनमें 4 साल से लेकर आठ 10 साल तक के बच्चे शामिल हैं)

 कुछ महिलाएं तो गोदी में या पीठ पर छोटे-छोटे बच्चों को लिए रहती हैं। कई महिलाएं तो इनमें गर्भवती हैं और अपने पेट की नुमाइश करते हुए लोगों से पैसे मांगते हैं। इनकी इस दशा और इनकी भाव -भंगिमा और भीख मांगने के अंदाज से प्रभावित होकर लोग इन्हे पैसे देने पर मजबूर हो जाते हैं। जब कोई इन लोगों को पैसा नहीं देता तो ये लोग वाहन पर बैठे वाहन चालक के महिला साथी या बुजुर्ग के कपड़े खींच कर गिड़गिड़ाने लगते हैं तो फिर ना चाहते हुए भी लोग इन पर तरस खाकर पैसे देने को मजबूर हो जाते हैं। अब तो इन लोगों ने एक नया तरीका भी इजाद कर लिया है। उनकी महिला साथी ₹2 वाली डॉट-पैन को ₹10 में बेचने, छोटे-छोटे बच्चे हाथों में कपड़ा लेकर गाड़ी साफ करने का बहाना करते  हुए लोगों से पैसे मांगने का कार्य करते हैं। इनके कुछ पुरुष साथी चार पहिया वाहन की साइड विंडो का कवर आदि बेचने के बहाने चौराहे पर इनके साथ ही रहते हैं। ग्रीनलाइट होते ही यह लोग साइड से खड़े होकर गुड़िया गुटखा खाते हुए आपस में मौज मस्ती करते हुए भी दिखाई देते हैं। फूल बाग चौराहा गोला का मंदिर चौराहा बारादरी चौराहा जैसे क्षेत्र के लोगों का अघोषित अड्डा बनते जा रहे हैं। 

इन लोगों ने अब तो अपनी झोपड़ियां अभी इन क्षेत्रों में स्थाई रूप से फूलबाग मैदान के पास,गोला का मंदिर भिंड रोड पर बना ली है। यूं तो ग्वालियर शहर में कहीं भी झोपड़पट्टी दिखाई नहीं देती है लेकिन इन लोगों के पिछले लॉक डाउन के बाद से ही ग्वालियर में इन लोगों की आमद अचानक से बढ़ती ही जा रही है। पहले यह लोग सिर्फ स्टेशन के आस-पास फुटपाथ पर दिखाई देते थे लेकिन अब यह पूरे शहर में फैल चुके हैं। में कुछ स्थानों पर तो इन लोगों ने पॉलिथीन और त्रिपाल के सहारे अपनी अस्थाई झोपड़ियां भी बना ली है। इस प्रकार की झोपड़ियां फूलबाग चौराहे के पास गोला का मंदिर चौराहे के पास भिंड रोड पर देखी जा सकती है। तो क्या इस बात की खबर शासन प्रशासन को नहीं है ? यह एक सोचनीय पहलू है, और यदि शासन को इसकी खबर है तो फिर शहर में इस प्रकार की अवैध झोपड़ियां क्यों बनने दी जा रही है ? अभी तक जो स्थानीय भिखारियों की फौज अचलेश्वर मंदिर या साईं बाबा मंदिर पर ही देखने को मिलती थी । अब बाहर से आए इन भिखारियों की फौज चौराहे पर कैसे जमा हो रही है ? 

क्या इसके पीछे शहर में कोई रैकेट काम कर रहा है। क्योंकि पहनावे और बातचीत से तो ये लोग स्थानीय नहीं लगते हैं। तो आखिर फिर कौन है ये लोग ?  कहां से आए हैं और अचानक से शहर में इनकी तादात इतनी कैसे बढ़ गई ?  यह गौर करने वाली बात है कि कहीं शहर में अचानक से बढ़ रहे क्राइम के लिए भी तो यही लोग जिम्मेदार तो नहीं है ! बुधवार को संसद में द जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन ) एंडोवमेंट बिल 2001  किशोर न्याय (बालकों का देखभाल व संरक्षण ) विधेयक 2021 पर चर्चा चर्चा हुई। उस चर्चा में भी लावारिस, छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल और उनके प्रोटेक्शन को लेकर सांसदों के द्वारा चर्चा की गई। जुवेनाइल एक्ट यह भी कहता है कि इस प्रकार रोड पर भीख मांगने वाले छोटे-छोटे बच्चों को शासन मुख्यधारा में लाने के लिए उनके रहने,खाने व शिक्षित करने की व्यवस्था करेगा। तो फिर शासन चौराहे पर भीख मांगने वाले इन बच्चों के प्रति क्यों उदासीन है ? एटा चौराहे से हटाकर इनके रिहैबिलिटेशन सेंटर क्यों नहीं पहुंचाया जा रहा है।

                                                                                                                - रवि यादव