घाटे की बात कहकर एक बार फिर…

प्रदेश में बिजली के रेट 10 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी !

जबलपुर। राज्य सरकार पर बिजली कंपनियों का 16 हजार करोड़ बकाया घाटे में चल रही बिजली कंपनियां 10% तक बढ़ा सकती है. बिजली के दाम नियामक आयोग में आपत्ति पर बिजली कंपनियों ने जवाब पेश किया. जबलपुर बिजली कंपनियों ने बिजली की दरें बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली है. इसके लिए विद्युत नियामक आयोग के सामने एक याचिका दायर की गई है. 

जबलपुर की नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच नाम की संस्था ने बिजली के दामों को बढ़ाए जाने पर आपत्ति दर्ज की थी. एक याचिका पेश की थी, इसी याचिका के जवाब में बिजली कंपनियों ने जो जवाब दिया है, वह हास्यास्पद है.बिजली के रेट का निर्धारण दरअसल बिजली कंपनियां बिजली के दामों का निर्धारण कुल बिल वसूली और बिजली खरीदी में कुल लागत के अंतर के आधार पर तय करती है. इस बार यह घाटा लगभग 26 सौ करोड़ रुपए का है, इसलिए बिजली कंपनियों का कहना है कि इस 26सौ करोड़ की भरपाई के लिए वे दाम बढ़ाना चाहते हैं. 

राज्य सरकार ने अपने बजट में यह माना है कि कई सब्सिडी योजनाओं की वजह से उन्हें बिजली कंपनियों का 16000 करोड़ रुपया देना है. अगर आप ऐसा बिजली कंपनियों को मिल जाता है तो बिजली कंपनियों का घाटा खत्म हो जाएगा. कंपनियां मुनाफे पर होने की वजह से बिजली के दाम बहुत कम किए जा सकेंगे. क्योंकि अभी मध्य प्रदेश में देश की सबसे महंगी बिजली दी जा रही है.