खाखी और खादी का खतरनाक गठबंधन !

मुकेश अंबानी के निवास एंटीलिया के बाहर मिले विस्फोटक मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए खुलासे हो रहे हैं। क्राइम ब्रांच एसीपी वजे की गिरफ्तारी के बाद  मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की कथित चिट्ठी के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख की मुश्किलें बढ़ गई हैं। परमवीर सिंह ने महाराष्ट्र के होम मिनिस्टर अनिल देशमुख पर जो गंभीर आरोप लगाए हैं। यह आरोप महज आरोप मात्र नहीं है यह कहीं ना कहीं इस बात की पुष्टि करते हैं कि भ्रष्टाचार को खत्म करने का ढोंग जो राजनीतिक पार्टियां करतीं है और इस भ्रष्टाचार को लेकर अधिकारी,कर्मचारी आम पब्लिक को ही इसके जिम्मेदार ठहराती हैं। 

जबकि वास्तव में भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी जड़ यह राजनीतिक पार्टियां और इनके नेता है जो अवैध रूप से वसूली करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को बाध्य करते हैं। और फिर यही प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए अपनाते हैं। यही कारण है कि भ्रष्टाचार देश के हर विभाग हर संस्था में फैलता जा रहा है। यही कारण है कि लोगों को अपने किसी भी कार्य को करवाने के लिए रिश्वत देना पड़ती है। हमारी बॉलीवुड की फिल्में इन तथ्यों को वर्षों से उजागर करती आ रही है फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है। कि कैसे भ्रष्ट नेता कैसे धन की अवैध वसूली करते हैं। और भ्रष्टाचार की दम पर वे अपने अवैध गोरखधंधों का संचालन करते हैं। 

इस सब का विरोध करने वाली जनता का शोषण करते हैं। अपने आसपास रहने वाले और इनकी जी हाजी जी हजूरी करने वाले लोगों को ये उपकृत भी करते रहते हैं। इनके इन कृतयों का जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है ? यह सब अक्सर हमारी भारतीय फिल्मों में देखने को मिलता है । लेकिन इस सबके बावजूद भी ना तो हमारे देश की राजनीति इसे कोई सबक लेती है ना ही हमारी जनता । जो सच्चाई तो अच्छी तरह से जानती है लेकिन फिर भी वह इसका विरोध करने से कतराती है। राजनीति में जो नेता बाहुबल और पैसे की दम पर अपना मुकाम हासिल करके आ रहा है। उससे इस बात की उम्मीद कैसे की जा सकती है ?  कि वह इमानदारी से जनता के लिए देश के लिए प्रदेश के लिए और समाज के लिए कार्य करेगा। 

इसका जीता जागता उदाहरण देश के सामने प्रस्तुत किया है। मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमवीर सिंह ने,  जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना इतने बड़े भ्रष्टाचार के स्कैंडल का खुलासा किया है। इस मामले  यह सच्चाई तो एक दम निकल कर बाहर आ ही गई कि किस प्रकार राजनेता अपने अधीनस्थ विभागों के अधिकारियों को अवैध वसूली के लिए वाद्ध्यय करते हैं और अपनी जेब भरते हैं। इसके लिए फिर चाहे उन अधिकारियों को अनैतिक, कानून, देश विरोधी गतिविधियों के द्वारा ही पैसे की उगाही ही क्यों न करनी पड़े ? इसी प्रकार की अवैध वसूली के तार एंटीलिया केस मे जुड़ रहे हैं ! एंटीलिया केस को देखते हुए तो यही लगता है कि अभी तक इस प्रकार की अवैध वसूली गुंडे और मवाली लोग बिजनेसमैन आदि को डरा धमका कर वसूली करते थे।  

वही काम अब राजनेता अधिकारियों और महाराष्ट्र में पुलिस से करवाया जा रहा था। संभवत यही वजह रही एंटीलिया के सामने मुकेश अंबानी को धमकाने के लिए स्कॉर्पियो में जिलेटिन की छड़ों रखी गई। जिससे अंबानी परिवार घबराकर डर कर पुलिस को 10-20 करोड़ रुपए अपनी सिक्योरिटी के लिए बतौर रिश्वत मुंबई पुलिस को दे दे और यह पैसा गृहमंत्री की जेब में पहुंचे। क्योंकि गृहमंत्री इस विभाग का मुखिया भी होता है इसलिए पूर्व पुलिस कमिश्नर द्वारा लगाए गए आरोप कहीं ना कहीं सत्य प्रतीत भी होते हैं। क्योंकि आरोप लगाने वाले पूर्व कमिश्नर परमवीर सिंह एजुकेटेड पर्सन है और एक जिम्मेदार महकमे की जिम्मेदारी संभाल रहे थे इसलिए यह आरोप लगाने से पहले उन्होंने भी 10 बार सोचा होगा।  कि वे क्या आरोप और किस पर लगा रहे हैं ?  

इसलिए इन आरोपों को झुठलाया नहीं जा सकता। हालांकि अब पार्टी व सरकार के लोग परमवीर सिंह को झूठा साबित करने के लिए लामबंद हो गए हैं। जमकर राजनीति हो रही है। लेकिन देशमुख जी की संभवत किस्मत खराब थी इसलिए दाव उल्टा पड़ गया और मामला पुलिस के हाथों से फिसलकर एनआईए के हाथों में चला गया जिससे अब मामले की परत दर पर उधड़ती जा रही है। अब यह देखना बाकी है इस मामले में कितनी परतें और उधड़ती है ?  कितने भ्रष्टाचारियों के नाम और सामने आएंगे और इन भ्रष्टाचारियों को सजा मिलेगी या राजनीति इन्हें उपकृत करेगी ! कहा जा रहा है कि अनिल देशमुख से किसी भी वक्त गृहमंत्री पद छिना जा सकता है। हो सकता है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कोई कार्रवाई करें, इससे पहले देशमुख खुद ही इस्तीफा दे दें। 

साथ ही शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की साझा महाविकास अघाड़ी में भी दरार पड़ गई है। कांग्रेस ने देशमुख के इस्तीफे की मांग कर डाली है। परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखी कथित चिट्ठी में आरोप लगाया है कि देशमुख ने सचिन वजे से हर महीने 100 करोड़ की उगाही की मांग की थी। शनिवार रात हुए इस कथित खुलासे के बाद उद्धव सरकार अपने मंत्री के बचाव में आई है। वहीं देशमुख की ओर से कहा गया है कि परमबीर सिंह के आरोप गलत हैं और वे उनके खिलाफ मानहानि का केस करेंगे। बता दें, देशमुख का आरोप है कि पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद ही परमबीर सिंंह ने यह खुलासा क्यों किया? 

साथ ही सचिन वजे की गिरफ्तारी के बाद इतने दिनों तक वे चुप क्यों रहे? तो इस बात का जवाब हम दे देते हैं । प्रोटोकॉल के अनुसार जब कोई व्यक्ति सर्विस में हो तो क्या वह अपने सुपीरियर यानी कि गृहमंत्री के खिलाफ कोई ऐसी बात कह सकता है ? इस प्रकार के इल्जाम लगा सकता है ? जी नहीं ! तो गृह मंत्री ने अपनी इस कारगुजारी को छुपाने के लिए इस प्रकार की बातें कर रहे हैं। इस बीच, सचिन वजे से पूछताछ जारी है। तो श्रीमान राजनेता है तो इस मामले पर राजनीति तो होगी ही होगी। अब देखना बाकी है ऊंट किस करवट बैठता है ?

                       

                                                                                                             - रवि यादव