जेल में चल रही भाग श्रीमद् भागवत कथा के रुकमणी विवाह प्रसंग को किया जीवंत...

जेल सुपरिटेंडेंट बने दूल्हा, तो सैकड़ों बंदी बने बाराती

जेल सुपरिटेंडेंट को द्वारकाधीश का स्वरूप मानकर उनकी जीवन संगनि ने रुकमणी रूप में पहनाई जयमाला तो संपूर्ण जेल परिसर तालियों की  गड़गड़ाहट से गूंजने लगा। अवसर था सेंट्रल जेल ग्वालियर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के बीच द्वारकाधीश और रुक्मणी के विवाह के प्रसंग का। कथा में रविवार को रुकमणी विवाह के प्रसंग सुनाया जा रहा था इसी बीच व्यास गद्दी पर बैठे संत गोपाल शरण जिनके द्वारा इस कथा का वाचन भी किया जा रहा है को पता चला कि 21 फरवरी को जेल अधीक्षक मनोज साहू की वैवाहिक वर्षगांठ भी होती है तो उन्होंने इस प्रसंग को जीवंत करने के लिए तुरंत दो वर्मालाएं मंगाई इसके साथ ही वर को बर पगड़ी और  वधु को भी मुकुट के रूप में पगड़ी पहनाई गई, इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई। 

वरमाला का जैसे ही आयोजन आरंभ हुआ वैसे ही जेल परिसर सैकड़ों बंदियों की तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान होने लगा। उसके बाद वहां मौजूद सभी धर्म प्रेमी जेल स्टाफ के सदस्यों बंदियों व कथा में शामिल होना है आए मेहमानों द्वारा श्री साहू और श्रीमती साहू को वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाएं भी दी गई। जीवन में जो व्यक्ति जैसा करता है उसको वैसा फल मिलता है। इसीलिए कहा गया है कि जैसा मन में भाव रखते हुए दान पुण्य किया जाता है उसी तरह के फल ईश्वर व्यक्ति के जीवन फल देता है। कलयुग का लेखा जोखा इसी धरती पर पूरा करना है। 

इसलिए मन का भाव हमेशा प्रसन्न और धार्मिक होना चाहिए यह बात केंद्रीय कारागार में चल रही भागवत कथा के दौरान व्यास गद्दी से संत गोपाल शरण  महाराज ने रविवार की कथा के दौरान कही। केंद्रीय कारागार में भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चौथे दिन की कथा "मन भूल मत जइयो राधा रानी के चरण" भक्ति संगीत के साथ व्यास गद्दी से गोवर्धन की कथा के बाद कृष्ण लीलाओं का वर्णन करते हुए कंस वध एवं रुक्मणी विवाह की कथा में ऐसा लग रहा था मानो कि आज केंद्रीय कारागार मैं विवाह समारोह बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है ।रुकमणी विवाह के अवसर पर जेल अधीक्षक कि आज 25वीं शादी की सालगिरह के अवसर पर जेल अधीक्षक मनोज साहू "दूल्हा "के रूप में सजे हुए थे और उनकी पत्नी रश्मि साहू रुकमणी रूपी दुल्हन के रूप में सजाया गया था 

इस अवसर पर महाराष्ट्रीयन पद्धति से  वेद मूर्ति पंडित जगन्नाथ शास्त्री एवं पंडित प्रसाद मोने द्वारा मंत्रोचार के द्वारा 25 वीं वर्षगांठ के विवाह मिलन अवसर का रूप देकर आज के रुक्मणी विवाह हो आनंदमई बना दिया इस अवसर पर श्री साहू की मां लक्ष्मी साहू द्वारा दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद दिया इस अवसर पर भाजपा नेता अशोक पार्ट्स आरियाने कहा के जेल में भागवत कथा आज भव्य रूप में सुनाई जा रही है वह एक ऐतिहासिक कार्य है और जिसे जेल अधीक्षक श्री साहू अपने कर्तव्यों से हटकर जेल में बंद कैदी भाइयों के मन की भावनाओं को बदलने का जो प्रयास कर रहे हैं वह अनुकरणीय हैं इस अवसर पर उन्होंने भंडारे के लिए 21, हजार रुपए का सहयोग भी प्रदान किया ।

कार्यक्रम में उपस्थित मंशापूर्ण हनुमान मंदिर के महंत गोपाल जी,  मजिस्ट्रेट मानवेंद्र सिंह, यदु नंदिनी ,उप अधीक्षक विपिन दंडोतिया, डीएसपी रितु केबरे, टी आई प्रशांत यादव ,एनके प्रजापति, प्रवीण त्रिपाठी, राजेंद्र सिंह तोमर ,डॉ. सर्वेश  पुरोहित, डॉ. गजेंद्र राजावत, बल्ली यादव सहित अनेकों भक्तगण एवं कैदी बंधु उपस्थित थे कल 22 फरवरी को भागवत कथा में सुदामा चरित्र का पाठ किया जाएगा। धर्म के माध्यम से मन परिवर्तन, जेल अधीक्षक: व्यक्ति के जीवन में अच्छे और बुरे एवं खुशी और गम के भी दिन आते हैं। लेकिन व्यक्ति जीवन में थोड़े से कठिनाइयों के दिनों में या विषम परिस्थितियों में अपने मन पर काबू पा लेता है। 

वह व्यक्ति हमेशा सुखी रहता है और इसके लिए धर्म का माध्यम बहुत महत्वपूर्ण है । यहां आज मेरे विवाह की 25 वीं वर्षगांठ के अवसर पर भगवान द्वारकाधीश माता रुक्मणी के विवाह के प्रसंग को जीवंत करने के लिए मुझे व मेरी पत्नी को इस किरदार के रूप में वरमाला पहनाने का एक अवसर दिया। मेरे वैवाहिक वर्षगांठ के अवसर पर सभी कैदी भाइयों ने मुझे शुभकामनाएं दी हैं। इसके लिए सभी का आभार लेकिन इस अवसर पर मैं इन सभी से यही कहूंगा के आप हमेशा सुखी रहें और ऐसा कोई कार्य न करें कि जिससे फिर इस तरह का फल आपको भोगना पड़े यह कथा सभी कैदी भाइयों के मनों को परिवर्तन करने के लिए सुनाई जा रही है । मेरा भी प्रयास रहता है की भक्ति के कार्यक्रम जेल में चलते रहे जिससे जेल का वातावरण शांति में बना रहे।