आदमी के संस्कारों की संवाहक है मातृभाषा...

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। मातृभाषा आदमी के संस्कारों की संवाहक है। मातृभाषा के बिना, किसी भी देश की संस्कृति की कल्पना बेमानी है। मातृभाषा हमें राष्ट्रीयता से जोड़ती है और देश प्रेम की भावना उत्प्रेरित करती है। मातृ भाषा आत्मा की आवाज़ है तथा यह एक देश को माला की लड़ियों की तरह पिरोती है। मां के आंचल में पुष्पित -पल्लवित हुई भाषा बालक के मानसिक विकास को शब्द व पहला सम्प्रेषण देती है। 

मातृभाषा ही सबसे पहले इंसान को सोचने-समझने और व्यवहार की अनोपचारिक शिक्षा और समझ देती है।  बांग्लादेश के भाषा संघर्ष को सम्मान देते हुए 17 नवंबर, 1999 को यूनेस्को ने इसे स्वीकृति दी। इस दिवस का उद्देश्य है कि विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा मिले। 

बांग्लादेश अपनी स्वतंत्रता से भी पहले सन 1952 से इस दिवस को बंगभाषा गरिमा दिवस के रूप में मनाता आ रहा है। आज के दिन मातृभाषा को सम्मान देते हुए बांग्लादेश में सरकारी अवकाश रहता है और सभी बांग्लादेशी अपनी मातृभाषा के प्रति समर्पित रहने का संकल्प लेते हैं। मुझे गर्व है कि मेरी मातृ भाषा हिन्दी है और मातृ बोली अवधी। दुनिया के सभी भाषा के भाषियों को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामना।