सन्तो की समाधि एवं...

मन्दिर भूमि पर हो रहे भूमि पूजन को बर्दाश्त नहीं करेगा सन्त समाज

ग्वालियर। आज धर्म स्थल संरक्षण समिति, ग्वालियर कार्यालय गंगादास की बड़ी शाला लक्ष्मीबाई कॉलोनी ग्वालियर ने एक पत्रकार वार्ता मानस भवन ग्वालियर मैं लेकर दिनांक 14 जनवरी 2021 को उक्त भूमि पर शिलान्यास आयोजित करने के कार्यक्रम को निरस्त करने के सम्बंध में हम नगरवासी मन्दिर रामजानकी मन्दिर परम्परागत साधू सन्त श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी संयुक्त रूप से श्री रामजानकी मन्दिर सरयू दास जी की बगिची पर अवैधानिक रूप से सन्तो के बिना अनुमति के मंदिर भूमि को हड़पने के षड्यंत्रो को सन्त समाज बर्दाश्त नही करेगा। 

धर्मस्थल संरक्षण समिति ग्वालियर की ओर से पूर्व मंत्री अनुप मिश्रा ने बताया कि शहर रमटा पूरा मौजे में एक प्राचीन धार्मिक स्थान नूरगंज की शाला के नाम से स्थित है उसी परिसर में श्री रामजानकी मन्दिर है। जो कालांतर में सरयू दास की शाला के नाम से विख्यात हुआ। गुरु शिष्य परम्पराओ के तहत सतत स्थान का विस्तार होता गया है, इसी श्रंखला में सन्त निम्नानुसार है। श्रद्धेय कैलाशवासी सन्त रत्नदास जी, सन्त प्रेमदास जी, सन्त लक्ष्मीदास जी, सन्त मोहनदास जी, सन्त रामदास जी, ततपश्चात सरयू दास, दयालदास, हीरादास तथा हरिदास। 

सभी वर्तमान में स्वर्गवासी हो चुके है वर्तमान में हरिदास के शिष्य कमलदास है जो अभी सरयू दास की बगीची थाटीपुर में सेवारत है सन 2011- 12 में सन्त परम्परा के तहत सभी ग्वालियर चम्बल सम्भाग के सन्तो ने मिलकर सर्व सम्मति से इस मठ की महंताई के लिए श्री श्री 1008 बाबा रामदास महाराज दंदरौआ महाराज को उक्त मन्दिर सुपुर्द किया और स्थान का महंत घोषित किया। यह उक्त मठ मन्दिर रामजानकी ट्रस्ट की परंपरा है। प्राचीन काल से ही ग्वालियर रियासत द्वारा रामजानकी मन्दिर से अनेकों ज़मीन मौजा रमटापूरा मौजा गोसुपुर(गांधी रोड़) महलगांव, ग्राम एराया, कछौआ, अकबाई मौजे इत्यादि में मन्दिर हित में लगाई गई जो माफी औक़ाफ़ विभाग में आयुक्त ग्वालियर के अधीन होकर रेकॉर्ड में सम्मिलित है।