एनिमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अन्तर्गत कार्यशाला सम्पन्न…

एनीमिया पर अंकुश लगाने सभी की सहभागिता जरूरी : श्री वर्मा

मुरैना। एनिमिया की व्यापकता को दृष्टिगत रखते हुए एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा सहयोगी विभागो महिला एवं बाल विकास विभाग एवं शिक्षा विभाग के समस्त जिला एवं ब्लाॅक अधिकारीयों का एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन कलेक्टर अनुराग वर्मा की अध्यक्षता में गत दिवस नवीन कलेक्ट्रेट सभाकक्ष मुरैना में हुआ। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आर.सी. बांदिल, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी उपासना राय, एन.आई. के संभागीय समन्वयक ग्वालियर संभाग मिर्जा रफीक वेग सहित स्वास्थ्य व महिला बाल विकास एवं शिक्षा विभाग के समस्त जिला एवं ब्लाॅक अधिकारीगण उपस्थित थे। कलेक्टर अनुराग वर्मा ने अधिकारियों निर्देश देते हुये कहा है कि एनिमिया एक जनव्यापि स्वास्थ्य समस्या है, जिसके निपटाने एवं अंकुश लगाने में समस्त विभागों को एक जुटता के साथ कार्य सम्पादित करना होगा। 

जिसमें सभी की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता हेतु यह आवश्यक है कि हितग्राहियों को आयरन टेबलेट के फायदों के बारे में पता हो, और वह इसका नियमित शेवन करें जिसके लिये सर्वप्रथम हमकांे यह सुनिश्चित करना होगा की जमीनी स्तर पर हर समय कम से कम दो माह हेतु आयरन टेबलेट्स उपलब्ध रहें साथ ही उनका सही मात्रा में वितरण हो एवं कार्य की रिपोर्टिंग गुणवत्तापूर्ण एवं समयानुसार हो। उन्होंने कहा कि समस्त ब्लाॅक प्रतिमाह निपि काॅर्डिनेशन कमेटी की वैठकों का आयोजन कर कार्यक्रम की प्रोग्रेस पर निगरानी रखें। जमीनी कार्यकर्ता हितग्राहियों को खान-पान आदि की सलाह भी प्रदान करें। एन.आई. के संभागीय समन्वयक ग्वालियर संभाग मिर्जा रफीक वेग ने कार्यक्रम का प्रशिक्षण प्रदान करते हुये बताया की खून में यदि हिमोग्लोबिन की मात्रा एक निश्चित मापदंड से कम हो जाती है, तो विभिन्न अंगों में आॅक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती है, जिससे शरीर में कई व्याधियां उत्पन्न होने लगती है, जिसे रक्त अल्पता या एनीमिया कहा जाता है। 

इससे वचाव हेतु यह अत्यन्त आवश्यक है कि हम अपने खानपान का हमेशा ध्यान रखें एवं खानपान में सभी प्रकार के अनाज,हरे पत्तेदार सब्जियां, स्थानीय व मौसमी सब्जी, फल,सभी प्रकार की दालें, अंकुरित दालें, गुड़, चना, मूंगफली आदि को सम्मलित करना चाहिए साथ हीं विटामिन-सी युक्त भोजन (नीम्बू, आंवला, संतरा, अमरुद आदि) करने से ऐसे भोज्य पदार्थ जिनमें फायितिक एसिड अधिक है, उन्हें भिगोकर, अंकुरित करके या उनमें खमीर उठाकर खाने से शरीर में आयरन की पूर्ति होती है साथ ही खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी के सेवन से बचना चाहिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आर.सी. बांदिल ने बताया की वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाडी कार्यकर्ताओं के सहयोग से 6 वर्ष से 59 माह बच्चें हेतु आयरन सीरप एवं 5 से 10 साल के वच्चों हेतु आयरन की पिंक टेबलेट एवं किशोरी बालक, बालिकाओं को आयरन की नीली टेबलेट प्रदान की जा रही है, जिनका नियमित शेवन अत्यन्त आवश्यक है।