रविवार को महानवमी और दशहरा एक साथ…

दुर्गाष्टमी आज, जानिए मां महागौरी पूजन विधि

अष्टमी - आज आश्विन शुक्ल पक्ष की उदया तिथि अष्टमी और दिन शनिवार है। अष्टमी तिथि आज सुबह 6 बजकर 59 मिनट तक ही रहेगी उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। ऐसे में इस साल महा अष्टमी का व्रत 23 अक्टूबर (शुक्रवार) को मनाई गई। हालांकि कहीं कहीं लोग इसे 24 अक्टूबर को भी मना रहे हैं। इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है। कन्या को भोजन करवाया जाता है और उन्हें गिप्ट बांटे जाते हैं।

पूजन विधि - अष्टमी के दिन सबसे पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में लकड़ी की चौक पर महागौरी की प्रतिमा स्थापित करें। मां के आगे दीपक जलाएं और फल, फूल अर्पित करें। मां की आरती के बाद कन्या पूजन करें। आज महाअष्टमी के दिन देवी दुर्गा के महागौरी  के निमित्त उपवास किया जाता है, लेकिन धर्मशास्त्र का इतिहास चतुर्थ भाग के पृष्ठ- 67 पर चर्चा में ये उल्लेख भी मिलता है कि पुत्रवान व्रती इस दिन उपवास नहीं करता। साथ ही वह नवमी तिथि को पारण न करके अष्टमी को ही व्रत का पारण कर लेता है।

महागौरी का बीजमंत्र - 

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके.

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते

नवमी - पंचाज के मुताबिक, इस बार महानवमी तिथि का प्रारंभ 24 अक्टूबर (शनिवार) को सुबह 06 बजकर 58 से होगा, जो अगले दिन 25 अक्टूबर (रविवार) को सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। ऐसे में महानवमी का व्रत 24 अक्टूबर को रखा जाएगा। जिन घरों में महानवमी की पूजा होती है, वहां इस दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस तरह शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन या कुमारी पूजा, महाष्टमी और महानवमी दोनों ही तिथियों को किया जाएगा।

दश्हरा - शारदीय नवरात्रि की दशमी तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 41 मिनट से हो रहा है, जो 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजे तक है। ऐसे में विजयादशमी या दशहरा का पर्व 25 अक्टूबर यानी रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन देश भर में रावण के पूतले जलाएं जाएंगे। हालांकि इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए आयोजन फीका रह सकता है। दशहरे के अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन होगा। उस दिन सुबह 06:29 बजे से सुबह 08:43 बजे के मध्य दुर्गा विसर्जन कर देना चाहिए।