ट्रस्ट की जमीनें कैसे बेच सकते हैं सिंधिया !

कांग्रेस ने सिंधिया पर लगाया 500 करोड़ रूपये की जमीन बेचने का आरोप

ग्वालियर। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आज भाजपा के राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया पर एक बडा हमला किया है। कांग्रेस ने राज्य सभा सदस्य को दस्तावेज के आधार पर पुन: 502 करोड की मंदिर की भूमि को बेचने का आरोप लगाते हुये भू माफिया घोषित किया वहीं कहा कि सिंधिया ने तो मंदिर तक की जमीन को नहीं छोडा। मप्र कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारीलाल दुबे ने पत्रकारों को बताया कि सिंधिया ने 1944 में औकाफ में दर्ज कोटेश्वर मंदिर की जमीन को जो कि उनके द्वारा सूची 4 में थी और वह भारत सरकार को समर्पित की थी को दस्तावेजों में कूटरचित बनाकर , छेडछाड कर अपनी व्यक्तिगत संपत्ति घोषित करवा लिया। इतना ही नहीं उसे एक न्यास में सम्मलित करा दिया। 

अब प्रश्र उठता है कि जब जमीन मूर्ति कोटेश्वर महादेव की थी तो उसे सिंधिया ने कैसे बेच डाला। उन्होने आरोप लगाते हुये कहा कि इतना ही नहीं सिंधिया ने कोटेश्वर मंदिर में धार्मिक आयोजन पर भी रोक लगाई। साथ ही भूतेश्वर मंदिर के पुजारी को भी भगाने का पूरा प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि माधवराव सिंधिया की मृत्यु के नाम वारिसान में जमीन को ट्रस्ट के नाम कैसे किया जा सकता है। जो कि ट्रस्ट के नाम सिंधिया ने नामांतरित करा दी। उन्होंने कहा कि सिंधिया ३०० साल से राज करने का हवाला देते हैं। लेकिन वह यह भूल गये कि वह स्वयं पेशवा के सूबेदार थे और उन्हें भी धोखा देकर सत्ता पर काबिज हुये थे। 

उन्होंने कहा कि १९४७ में जब भारत में सिंधिया राज परिवार का विलय हुआ तब क्या क्या संपत्ति को उन्होंने भारत सरकार को सौंपा इसका जबाब वह नहीं देते। वहीं शासकीय कागजों में कूट रचित लाल पेन से स्याही लगाकर अपनी संपत्ति बताते हैं। उन्होंने कहा कि सिंधिया सरकार के साथ धोखा कर रहे हैं। उनका मानसिक संतुलन खराब हो गया है। केके मिश्रा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने एक एडीशनल सीएस मनोज श्रीवास्तव की भू माफिया को लेकर जांच कमेटी बनाई थी उसकी जांच रिपोर्टको सार्वजनिक करें। 

क्योंकि उसमें भी सिंधिया का नाम सुर्खियों में था। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन कलेक्टर अनुराग चौधरी और एडीएम किशोर कान्याल ने कितनी सरकारी जमीन को सिंधिया के नाम किया है कलेक्टर उसे भी सार्वजनिक करें। केके मिश्रा से यह पूछे जाने पर कि वह उच्चतम न्यायालय कब जायेंगे के उत्तर में उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद वह उच्चतम न्यायालय का रूख करेंगे। पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ एडवोकेट विनोद शर्मा, संजय शुक्ला एवं जिला प्रवक्ता धर्मेन्द्र शर्मा भी मौजूद थे।