बड़े नेताओं की पसंद को तरजीह देने की कोशिश…

उपचुनाव से पहले BJP ने 5 नए चेहरों को बनाया महामंत्री



भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने उपचुनाव से पहले 5 नए महामंत्रियों की नियुक्ति कर दी है. बाकी कार्यकारिणी की घोषणा को फिलहाल आगे के लिए टाल दिया गया है. नए चेहरों को महामंत्री बनाकर वीडी शर्मा ने उपचुनाव के मद्देनजर जातिगत समीकरण साधने, मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने की नाराजगी दूर करने सहित बड़े नेताओं की पसंद को तरजीह देने की कोशिश की है. राज्य में जिन 27 सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमें 16 सीटे ग्वालियर-चंबल संभाग में पड़ती हैं. ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने महामंत्रियों की नियुक्ति में भौगोलिक संतुलन को भी ध्यान में रखा है. इसके अलावा युवाओं को संगठन में आगे लाने की कवायद भी दिखाई देती है. 

नए महामंत्रियों की नियुक्ति के जरिए ओबीसी, ब्राह्मण, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक सिंधी समाज को संगठन में प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी की गई है. इस बहाने इन जातियों को भी साधा गया है. कविता पाटीदार के रूप में पहली बार एक महिला को पार्टी ने महामंत्री पद पर नियुक्त किया है. इसके जरिए प्रदेश संगठन में महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है. वीडी शर्मा ने नए चेहरों को मौका देकर अपनी पकड़ भी दिखाई है. पहले परंपरा थी कि पुराने महामंत्रियों में 60 प्रतिशत को रिपीट कर दिया जाता था. वीडी शर्मा ने इस परंपरा को तोड़ा है. उन्होंने नए चेहरों को लाने के लिए बृजेश लूनावत और विनोद गोटिया जैसे सीनियर नेताओं को ड्रॉप करने में संकोच नहीं किया है. 



हरिशंकर खटीक (तीन बार के एमएलए)

हरिशंकर खटीक भाजपा के पुराने नेता हैं. वह वर्तमान शिवराज कैबिनेट में मंत्री बनते-बनते रह गए थे. हरिशंकर खटीक के महामंत्री बनने से प्रदेश भाजपा संगठन में बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ा है. खटीक अनुसूचित जाति वर्ग के नेता हैं. वह टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा सीट से विधायक हैं. शिवराज सरकार में पहले मंत्री रह चुके हैं. उन्हें महामंत्री बनाकर मंत्रिमंडल में जगह न मिलने की नाराजगी भी दूर करने की कोशिश की गई है. साथ ही उपचुनाव में  ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के दलित वोटर्स पर भी पार्टी की नजर है. वह तीन बार के एमएलए हैं. खटीक को पार्टी संगठन में मौका देकर वीडी शर्मा ने उनके अनुभव का लाभ लेने की कोशिश की है.


भगवानदास सबनानी (उमा भारती के करीबी)

भोपाल के जिलाध्यक्ष रहे भगवान दास सबनानी लंबे समय बाद पार्टी की मुख्यधारा में लौटे हैं. सबनानी पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के करीबी माने जाते हैं. पहले वह दो बार भाजपा छोड़ चुके हैं. एक बार उमा भारती की भारतीय जनशक्ति पार्टी में चले गए थे, दूसरी बार निर्दलीय चुनाव लड़े थे. उनके बगावती तेवर के बावजूद पार्टी ने इन्हें मौका दिया है. सबनानी प्रहलाद पटेल और संघ के भी नजदीकी माने जाते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि संघ के हस्तक्षेप से ही उनकी प्रदेश भाजपा संगठन में वापसी हुई है. भगवानदास सबनानी के जरिए भोपाल के सिंधी समाज भाजपा अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है.


रणवीर सिंह रावत (किसान मोर्चे में बेहतर काम का फल)

भाजपा किसान मोर्चे के अध्यक्ष और शिवपुरी के करेरा से विधायक रह चुके हैं. उपचुनाव को ध्यान में रखकर ओबीसी नेता रावत को संगठन में लिया गया है. किसान मोर्चे में उनकी सक्रियता के चलते रावत को महामंत्री बनाया गया है. वह केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी और शिवराज की पसंद माने जाते हैं. किसान मोर्चे में किए गए उनके बेहतरीन कार्य का फल पार्टी महामंत्री के रूप में मिला है. रणवीर सिंह रावत के जरिए ग्वालियर-चंबल संभाग के ओबीसी वोटर्स पर भी पार्टी की नजर है.


शरदेंदु तिवारी (ब्राह्मण चेहरा, विंध्य क्षेत्र को प्रतिनिधित्व)

शरदेंदु तिवारी: वर्तमान शिवराज सरकार में विंध्य क्षेत्र से कोई मंत्री नहीं है. इसकी भरपाई के लिए चुरहट के विधायक शरदेंदु तिवारी को प्रदेश महामंत्री के पद से नवाजा गया है. शरदेंदु तिवारी को युवा ब्राह्मण चेहरा होने का भी फायदा मिला है. शरदेंदु तिवारी 2018 के विधानसभा चुनाव में पूर्व नेता प्रतिपक्ष और अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह को हराकर सुर्खियों में आए थे. उपचुनाव के मद्दे नजर ब्राह्मण वोटर्स को लुभाने की कोशिश उनके जरिए वीडी शर्मा ने की है.


कविता पाटीदार (महिला और ओबीसी होने का फायदा मिला)

पटवा सरकार में मंत्री रहे दिवंगत नेता भेरूलाल पाटीदार की बेटी कविता पाटीदार को महिला नेता होने के साथ-साथ ओबीसी होने का फायदा मिला है. वह जिला पंचायत इंदौर की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. भाजपा संगठन में पहले प्रदेश मंत्री रही हैं. कविता पाटीदार भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय खेमे की मानी जाती हैं. उनके जरिए पार्टी ने संगठन में महिला प्रतिनिधित्व दिया है. कविता पाटीदार को महामंत्री बनाकर पार्टी ने मालवा अंचल के पाटीदार वोटों को लुभाने का प्रयास किया है.