भारत की वो प्राचीन परंपरा फिर जीवंत हो उठी…

भूमिपूजन में लगा जैसे सत्ता धर्म के आगे नतमस्तक है : पवैया

पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया आज अयोध्या से लौटने के बाद सीधे आत्म आहुति देने वाले स्वर्गीय दिनेश कुशवाह की माताजी को नमन करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को जिस भव्य मंदिर की शिला रखी गई है, वह अनेकों बलिदान और संघर्षों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अयोध्या से जो खुशी लेकर लौटा हूं, उसे अपना लाल खोने वाली मां की चरणों में चढ़ावा अर्पित कर रहा हूं। 

श्री पवैया जी ने सेवापथ पर उपस्थित राम भक्तों को भूमिपूजन का प्रसाद वितरित करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला के सामने दंडवत करते हुए साक्षात प्रणाम कर रहे थे, तब सवा सौ करोड़ का भारत अपने आराध्य के सामने नतमस्तक हो रहा था। जब उन्होंने मंच पर आकर घुटने के बल बैठकर शीश नीचे लगाकर उपस्थित संतों को नमन किया तो भारत की वो प्राचीन परंपरा फिर जीवंत हो उठी। जब इस देश में राजसत्ता, धर्मसत्ता के आगे नतमस्तक होती थी।

श्री पवैया ने कहा कि भूमिपूजन के सभा मंडप में हम रामभक्तों, संतों की आंखों में खुशी के आंसू बहते रहे, लेकिन अपने खोये हुए कार सेवक अशोक सिंघल, आचार्य गिर्राज किशोर, परमहंस रामचरणदास, महंत अवैद्यनाथ जी जैसे दिवंगत पुण्य आत्मा बार बार याद आती रही। श्री पवैया ने कहा यह राममंदिर भारत के आत्मसम्मान का राष्ट्र मंदिर होगा ओर इससे से देश में सांस्कृतिक स्वाभिमान से जुड़कर प्रचंड देशभक्ति के सकारात्मक परिणाम देश के उत्थान में दिखाई देंगे।