दंपति ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश…
किसान मारपीट मामले में एसपी-कलेक्टर को हटाया
 
मध्यप्रदेश के गुना में मंगलवार को अतिक्रमण हटाने के लिए गई पुलिस ने किसान दंपति की लाठियों से पिटाई कर दी। इसके बाद दंपति ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुना के कलेक्टर और एसपी को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उन्होंने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जिस प्रकार की कार्रवाई शासन द्वारा की गई है इस प्रकार की कार्रवाई से एक प्रश्न अवश्य उठता है कि प्रशासन के लोग अदालत के आदेश को पारित करवाने में तत्परता दिखाएंगे, क्योंकि कल को कोई भी किसी के भी इसारे(भू माफिया)पर कार्यवाही का विरोध करने के लिए परिवार सहित खड़ा हो जाएगा और अगर प्रशासन ने कार्रवाई की तो कीटनाशक पीकर या मिट्टी का तेल डालकर जान देने की कोशिश करेगा। ऐसे में प्रशासन के लोगों को अपनी नौकरी बचाने के लिए कार्रवाई करने के बारे में 10 बार सोचना पड़ेगा। हां कार्रवाई दोषी पुलिस वालों के खिलाफ जरूर होना चाहिए थी, जिन्होंने निर्ममता के साथ लाठी चलाई उन पर कार्यवाही तो बनती है। यहां यह बताना मुनासिब होगा कि गुना में मॉडल कॉलेज के निर्माण के लिए शासकीय कॉलेज प्रबंधन को जगनपुर चक क्षेत्र में 20 बीघा जमीन आवंटित की गई थी। 

जमीन पर काफी लंबे समय से गब्बू पारदी नाम के व्यक्ति का कब्जा था। कुछ समय पहले राजस्व और पुलिस की टीम ने मिलकर अतिक्रमण हटवा दिया था। हालांकि विभाग की लापरवाही के चलते जमीन पर निर्माण नहीं हो सका। इसकी वजह से अतिक्रमणकारियों ने दोबारा जमीन को घेरना शुरूकर इस पर खेती की जाने लगी।  अब मामला यहां से बनता है कि जब प्रशासन ने जमीन को एक बार कब्जा मुक्त करा दिया था तो दोबारा कब्जा कैसे हो गया। और क्या यह पारदी परिवार इतना शक्तिशाली था कि शासन द्वारा कब्जा मुक्त कराई गई जमीन पर दोबारा से अपने बलबूते पर कब्जा करने में सक्षम था। हालांकि जिस परिवार के साथ पुलिस द्वारा प्रशासन द्वारा मारपीट की गई है उस परिवार का कहना है कि वह ये जमीन बटाई पर लेकर खेती कर रहा था, तो फिर एक बात यह भी सामने आती है कि उसे यह जमीन बटाई पर दी किसने थी। इस जमीन पर वास्तविक कब्जा इस दलित परिवार का था, या इस कब्जे के पीछे कोई और था। निसंदेह इस जमीन के पीछे कोई भूमाफिया रहा होगा।  यह दलित परिवार तो मात्र एक मोहरा बना जिसकी सजा उसे पुलिस प्रशासन द्वारा की गई बेदखली की कार्रवाई के दौरान लाठियों के रूप में मिली। और यह सजा उन प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मचारियों को भी मिली जिन्होंने अदालत के ऑर्डर का पालन करते हुए इस बेदखली की कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाया। 

हां सजा उन पुलिस वालों को मिलना लाजमी है, जिन्होंने बर्बरता पूर्वक  लाठी चलाई उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्हें बेदखली की कार्रवाई से पूर्व इसका विरोध करने वालों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की जा सकती थी । कार्रवाई पूरी होने के बाद इस किसान परिवार को रिहा कर असली भूमाफिया को गिरफ्त में लेना पुलिस का पहला कार्य था जो कि पुलिस ने नहीं किया। रही खड़ी हुई फसल बर्बाद करने की तो शासन की जमीन पर अवैध कब्जा कर लगाई गई फसल को शासन क्यों ना बर्बाद करें क्यों ना शासन अपनी जमीन को मुक्त कराएं क्योंकि एक फसल कटती है तो दूसरी लगा दी जाती है तो ऐसे मे जमीन मुक्त होगी कब ? शासन को उस भू माफिया के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करना चाहिए जिसने इस जमीन पर कब्जा किया और जो नुकसान इस गरीब किसान हुआ है उसका मुआवजा उस भूमाफिया से वसूल कर किसान को दिया जाना चाहिए। घटना के बाद किसने क्या कहा ? वहीं सूबे के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने वीडियो जारी कर कहा, ‘गुना के कैंट थाना क्षेत्र की घटना का वीडियो देखकर व्यथित हूं। इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से बचा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। भोपाल से जांच दल मौके पर जाकर पूरी घटना की जांच करेगा। इसके बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई करेंगे। 

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘ये शिवराज सरकार प्रदेश को कहां ले जा रही है? ये कैसा जंगल राज है? गुना में कैंट थाना क्षेत्र में एक दलित किसान दंपत्ति पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों द्वारा इस तरह बर्बरता पूर्ण लाठीचार्ज।’ उन्होंने कहा, ‘यदि पीड़ित युवक का जमीन संबंधी कोई शासकीय विवाद है तो भी उसे कानूनन हल किया जा सकता है लेकिन इस तरह कानून हाथ में लेकर उसकी, उसकी पत्नी की, परिजनों की व मासूम बच्चों तक की इतनी बेरहमी से पिटाई, यह कहां का न्याय है? इतना ही नहीं उन्होंने तो इस मामले को जाति और धर्म से भी जोड़ दिया मैं कहां हूं उन्होंने कहा है क्या यह सब इसलिए कि वो एक दलित परिवार से है, गरीब किसान है?’ कांग्रेस नेता ने सवाल करते हुए कहा, ‘क्या ऐसी हिम्मत इन क्षेत्रों में तथाकथित जनसेवकों और रसूखदारों द्वारा कब्जा की गई हजारों एकड़ शासकीय भूमि को छुड़ाने के लिए भी शिवराज सरकार दिखाएगी? ऐसी घटना बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। इसके दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो, अन्यथा कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।’ कीटनाशक पी लेने के बाद पुलिस द्वारा दंपति को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां फिलहाल उनकी हालत में सुधार है।