चौथी पारी में मन की नहीं कर पा रहे मुख्यमंत्री…
आये थे आप हमदर्द बनकर रह गये केवल राहज़न बनकर : शिवराज

भोपाल। मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही कवायद के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान अंदरखाने सब-कुछ ठीक नहीं होने के संकेत दे रहे हैं। बुधवार को सीएम ने कहा- 'जब भी मंथन होता है अमृत निकलता है और विष शिव पी जाते हैं।' इस बयान के कई कयास लगाए जा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने मंगलवार देर शाम भी एक ट्वीट भी किया। इसमें उन्होंने कहा- 

दरअसल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए दिल्ली दौरा काफी कड़वा रहा है। मुख्यमंत्री की चौथी पारी में शिवराज पहली बार सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब मंत्रिमंडल की लिस्ट को केंद्रीय नेतृत्व ने रिजेक्ट कर दिया। इससे पहले तीन कार्यकाल में शिवराज ने जिसको चाहे मंत्री बनाया। हर बार केंद्रीय नेतृत्व ने शिवराज की बात मानी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को शिवराज के पिछले कार्यकालों में लगातार दो या तीन बार मंत्री रहे वरिष्ठ विधायकों को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, अभी कैबिनेट विस्तार में कई पेंच हैं। पार्टी नेतृत्व ने शिवराज कैबिनेट में नए चेहरों को मौका देना चाहती है। क्योंकि 2018 के विधानसभा चुनाव में 17 कैबिनेट मंत्री चुनाव हार गए थे। पुराने अनुभव को देखते हुए आलाकमान शिवराज के पुराने साथियों को कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहती है। उसका साफ कहना है कि पार्टी में नए लोगों को मौका दिया जाए। लेकिन, शिवराज सिंह अपने पुराने 12 विश्वस्त साथियों को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर अड़े हुए हैं। 

केंद्रीय नेतृत्व उनमें से 12 लोग को ड्रॉप करना चाहती है। इसमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो 3 बार मंत्री रह चुके हैं। कई ऐसे विधायक हैं, जिन्हें कभी कैबिनेट में मौका नहीं मिला है। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा शिवराज को सुझाए गए फाॅर्मूले के तहत ही भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भोपाल आ रहे हैं। अगर फिर भी सहमति नहीं बनी तो आज रात तक मुख्यमंत्री एक बार फिर दिल्ली जा सकते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने खेमे से एक डिप्टी सीएम और 11 मंत्री चाहते हैं। अगर ऐसा होता है तो भाजपा को भी अपने खेमे से एक डिप्टी सीएम बनाना होगा। लेकिन, मुख्यमंत्री इसके लिए तैयार नहीं हैं। सिंधिया चाहते हैं कि तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए। इसी बात को लेकर उनकी कांग्रेस पार्टी से नाराजगी थी। दूसरी तरफ नरोत्तम मिश्रा का कद मध्य प्रदेश सरकार में लगातार बड़ा हो रहा है। इस बात मुहर इस बात से लगी है कि शिवराज जब मंत्रिमंडल नामों पर चर्चा करने दिल्ली गए तो अचानक नरोत्तम को दिल्ली बुलाया गया।

इसके बाद दिल्ली में सारे समीकरण बदल गए और मंगलवार को सुबह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली से खाली हाथ वापस आ गए। राज्य सरकार को अभी 24 सीटों पर उप चुनाव का सामना करना है। इनमें से 16 सीटें ग्वालियर चंबल संभाग की हैं। इन सभी 16 सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बागी होकर आए पूर्व विधायकों के लिए सिंधिया लगातार बैटिंग कर रहे हैं। सिंधिया इनमें से कम से कम आठ के लिए मंत्रीपद चाहते हैं। पांच सदस्यीय मंत्रिमंडल में सिंधिया के अभी दो मंत्री हैं। छह को और मंत्री बनाने का दबाव बना रहे हैं। इसके समानांतर 16 सीटों पर 2018 में हारे भाजपा प्रत्याशी, पुराने नेता उप चुनाव में टिकट मिलने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।  सिंधिया के समर्थक इस पूरी लड़ाई को सिंधिया बनाम कांग्रेस बनाकर जीतने के पक्ष में हैं। शिवराज सिंह चौहान का खेमा चाहता है, यह हवा और सूरत दोनों बदलनी चाहिए। भाजपा के पुराने नेताओं का सम्मान भी बने रहना चाहिए।