कोरोना काल के दौरान संस्थानों की स्थिति खराब हो गई…
पत्रकारों की स्थिति को बेहतर करने सरकार ले ठोस निर्णय : वांदिल
पत्रकारों , संस्थानों एवं पत्रकारों ...
ग्वालियर। सर्व पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष नारायण बांदिल ने बताया कि वर्तमान में देश और प्रदेश के अंदर पत्रकारों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है जहां एक ओर पत्रकारिता के कार्य में परेशानी पैदा होती जा रही वहीं अब उनकी नौकरियां भी दाब पर लग गई हैं । वर्तमान में जिले के अंदर ही कई पत्रकारों को उनके संस्थानों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है । जिसका कारण संस्थानों के ऊपर वित्तीय भार का बढ़ना है और उसको वह संभाल नहीं पा रहे हैं जिसके चलते वह लोगो को नौकरियों से निकालकर अपने संस्थान को चलाये रखने की स्थिति पैदा कर रहे हैं । 

वर्तमान स्थिति के लिये देश व प्रदेश की सरकारें और राजनीतिक दलों द्वारा कभी भी पत्रकारों के हित के लिये विधायिका , न्यायपालिका और कार्यपालिका की तर्ज पर कोई भी ठोस निर्धय नहीं लिया है । इस कोरोना महामारी के दौरान देश भर के पत्रकारों ने सरकार का साथ पूरी मजबूती से दिया और गरीब एवं कमजोर तबके के लोगों की आवाज को भी सरकार तक पहुंचाने में पूरी ताकत लगा दी । लेकिन इस महामारी के दौरान जहां सरकार ने अपने नौकरशाहों और कर्मचारियों के लिये खजाने खोल दिये वहीं दूसरी ओर इस महामारी के बीच में मौत से लडते पत्रकारों के लिये कोई भी प्रबंध नहीं किया गया है । 

वहीं इनके संस्थानों की स्थिति में कोरोना काल के दौरान और भी खराब हो गई जिसका कारण सरकार द्वारा पूर्व की भांति इन समाचार पत्रों एवं खबरिया इलेक्ट्रोनिक चैनलों को दिये जाने वाले विज्ञापन आदि में कटौती  करना बताया गया है । जिससे हमारे भाईयों को रोजी रोटी से मोहताज होना पड़ रहा है । भाईयों देश के अंदर अखबारों एवं न्यूज चैनलों में हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है जिससे उनके परिवारों की आजीविका चल रही है लेकिन अब लगातार होती छंटनी और सरकार के दबाव की बनती स्थिति के चलते कमजोर होती इस पत्रकारिता को बचाना है और इसके लिये अब सर्व पत्रकार संघ सरकार से ऐसी स्थिति को दूर करने की मांग कर रहा है । 

प्रदेश में अखबारों को एवं न्यूज चैनलों को बेहतर बनाने के लिये सरकार किसी ठोस नीति को बनाये जिससे भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा न हो । क्योंकि यह स्थिति देश व प्रदेश के आंतरिक लोकतंत्र के लिये बहुत ही खराब होगी । जब गरीब , कमजोर , और मजलूम लोगों की आवाज सरकार और उनके नुमाईदों तक नहीं पहुंच पायेगी । वहीं वर्तमान में जिले के अंदर लगातार धारा 384 , 385 का उपयोग भी पत्रकारों के खिलाफ होने लगा है जिससे पत्रकारों में भय व्याप्त है और वह गलत कृत्य करने वाले लोगों के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर सोचने लगे हैं जिसका कारण वर्तमान में सरकार , शासन व प्रशासन से उनको कोई मदद की उम्मीद नहीं लग रही है । 

इससे पहले भी कई पत्रकार साथी जानलेवा हमलों में काल कल्वित हो चुके हैं और सरकारों ने उनके परिवार को लेकर कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है जिसके चलते कई परिवारों की स्थिति काफी भयाभय हो गई है । वहीं पत्रकारों के उपचार एवं उनके बच्चों की शिक्षा दीक्षा को लेकर भी कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है जिसके चलते पत्रकार हर तरफ शोषण का शिकर खुद की व्यथा किससे कहे और किसे बताये सोचने को विवश है ।