ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत में नहीं निकल पाया कोई हल…
लद्दाख की गलवान वैली में भारत और चीन के बीच गतिरोध जारी

नई दिल्ली। लद्दाख की गलवान वैली में भारत और चीन के बीच गतिरोध सोमवार को भी जारी रहा. भारत और चीनी सेना के ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत में कोई हल नहीं निकल पाया. लद्दाख में पेंगांग झील के किनारे और गलवान वैली में पिछले एक महीने से दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं. डोकलाम में 2017 में दोनों देशों के बीच 73 दिनों तक चले तनाव के बाद पहली बार लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी (LAC) पर इतने लंबे समय तक सैनिक गतिरोध हुआ है.

सेना की त्रिशूल डिवीजन के डुरबुक में तैनात ब्रिगेड के कमांडर और चीनी ब्रिगेड कमांडर के बीच चर्चा बेनतीजा रही. गलवान में तैनात सेना की बटालियन कमांडरों की बातचीत भी कई दौर के बाद किसी हल तक नहीं पहुंच पाई. सूत्रों का कहना है कि भारत का रुख दो बातों पर बिल्कुल साफ है और उससे किसी भी तरह समझौता नहीं हो सकता. पहली- एलएसी पर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम न रुकेगा न धीमा किया जाएगा और दूसरी बात कि चीन को अब किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा. गलवान वैली पूर्वी लद्दाख के अक्साई चिन के बाहरी हिस्से से लगी हुई है.  

गलवान नदी काराकोरम के पूर्वी हिस्से से निकलकर अक्साई चिन के मैदानों में बहता है और फिर श्योक से मिलता है. भारत ने लद्दाख के सबसे दूर स्थित दौलत बेग ओल्डी इलाके तक पहुंचने वाली दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी या डीएस-डीबीओ रोड पिछले साल खोल दी है. इससे दौलत बेग ओल्डी तक सैनिक और साजोसामान भेजना बहुत आसान हो गया है. 

अगर चीन गलवान वैली में आगे आता है तो ये सड़क खतरे में पड़ जाएगी और चीन के लिए दौलत बेग ओल्डी को काटना आसान हो जाएगा. भारत ने ये भी साफ किया है कि वो चीन के साथ सीमा-विवाद बातचीत के जरिये सुलझाने का इच्छुक है. इसके लिए कई स्तर पर बातचीत चल रही है लेकिन चीन अभी तक अपनी विस्तारवादी नीति छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. सेना के अलावा कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चाओं का दौर चल रहा है लेकिन अभी तक कोई हल निकल पाया है.