चंबल कमिश्नर ने की योजनाओं की समीक्षा…
सभी पात्र छात्र-छात्राओं कोसमय पर मिले छात्रवृत्ति : श्री मिश्रा

मुरैना। चंबल संभाग के कमिश्नर रवीन्द्र कुमार मिश्रा ने आदिवासी तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अधिकारियों से कहा है कि छात्रावासों में खाली पड़़ी सीटों को भरने के लिये हर संभव प्रयास करें। इसके लिये व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। भिण्ड जिले के 55 अनुसूचित जाति छात्रावासों में 340 सीटें, इसी तरह श्योपुर जिले में अनुसूचित जनजाति के 16 छात्रवासों में 42 सीटें अभी भी रिक्त है। सीटें खाली नहीं रहना चाहिये। छात्रावासों की क्षमताओं का उपयोग होना चाहिये। सभी पात्र छात्र-छात्राओं को समय पर छात्रवृत्ति स्वीकृत होकर उन्हें वितरित होना चाहिये। इसमें किसी भी तरह का विलंब बर्दाश्त नहीं होगा। चंबल कमिश्नर श्री मिश्रा हाल ही आदिवासी तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की संभागीय बैठक को संबोधित कर रहे थे।

 बैठक मंे अपर आयुक्त अशोक कुमार चैहान, संयुक्त आयुक्त विकास राजेन्द्र सिंह, आदिवासी एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की संभागीय उपायुक्त ऊषा सिंह, मुरैना, भिण्ड और श्योपुर जिले के जिला संयोजक सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे। समीक्षा के दौरान कमिश्नर ने कहा कि पिछड़ा वर्ग छात्रावासों की सीटें अगर खाली है तो उनको अन्य वर्गों के गरीब छात्रों से भरें। रिक्त सीटों को भरने के लिये बैनर, हाॅर्डिग्स आदि लगायें। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जो फैक्ल्टी दी गई है, उनका लाभ उन तक पहुंचना चाहिये। उन्होंने कहा कि छात्रावासों का नियमित निरीक्षण होता रहे। उनकी साफ-सफाई रंगाई-पुताई होती रहे। पलंगो की बैडशीट चादर बदलते रहे। इन्फ्राटेक्चर का जो बजट दिया जाता है उसका उपयोग बजट के अनुसार प्लानिंग से करें। 

अनुपयोगी सामग्री की नीलामी करें। सभी छात्र-छात्राओं को बेनीफिट मिलता रहे, आश्रमों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का प्रशिक्षण होता रहे। आश्रमों में रहने वाले बच्चों का मेडीकल चैकअप नियमित होता रहे। कमिश्नर ने वनाधिकार दावों की समीक्षा करते हुये कहा कि जितने भी प्रकरण है, उनका निराकरण टाईम लिमिट के अंदर होना चाहिये, जो लोग पात्र है उनके प्रकरण अकारण निरस्त नहीं किये जाये। किसी के अधिकारों को टेक्नीकल ग्राउण्ड पर निरस्त नहीं करना चाहिये। दावों का गंभीरता के साथ परीक्षण करें, कमजोर वर्ग है तो उसे कैसे भी विकास की मैन स्कीम में लायें। समीक्षा के दौरान बताया गया कि मुरैना में 157, भिण्ड मंे 30 और श्योपुर जिले में 5166 ऐसे टोटल 5353 दावों की संख्या है जो पोर्टल में दर्ज है। 

बैठक में अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजनाओं की भी समीक्षा की गई, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2019-20 में मुरैना के स्वीकृत 28 कार्यों पर 1 करोड़ 1 लाख 50 हजार रूपये, भिण्ड में स्वीकृत 35 कार्यो पर 2 करोड़ 11 लाख 17 हजार रूपये और श्योपुर में स्वीकृत 12 निर्माण कार्यों पर 1 करोड़ 33 लाख 58 हजार रूपये व्यय किये गये है। चालू वित्तीय वर्ष के दौरान श्योपुर जिले में 23 निर्माण कार्यों पर 2 करोड़ 23 लाख 38 हजार रूपये व्यय किये गये है। मुरैना जिले को 8 लाख 83 हजार रूपये का बजट प्राप्त हुआ है। कमिश्नर श्री मिश्रा ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति वस्तियों के विकास के लिये आने वाला पैसा किसी भी स्थिति में लैप्स नहीं होना चाहिये। संपूर्ण बजट का सही सदुपयोग हो। अपने क्षेत्र के विकास के लिये सभी जिला संयोजक सजग रहे।