अधूरे पड़े निर्माण कार्य के कारण आ सकती है जलभराव की समस्या...
वर्षा काल में रेत उत्खनन पूरी तरह होगा प्रतिबंधित : खनिज अधिकारी

ग्वालियर।  लॉक डाउन का पांचवा चरण शुरू हो चुका है दो माह से अधिक समय से  घरों में कैद जनता के सामने  न केवल भयावह आर्थिक संकट खड़ा हो गया है बल्कि  आने वाली वर्षा ऋतु को ले कर भी आने वाली समस्याओं की चिंता मुह बाए खड़ी है जिस पर सरकार व प्रशाशन ने शीघ्र ध्यान नही दिया तो जन मानस के लिए कोरोना , आर्थिक संकट के साथ साथ बारिश भी बड़ा संकट होगी । वर्षा ऋतु प्रारम्भ होने को है , शहर में कई निर्माण अधर में अटके हुए है , कई जगह बेसमेंट खुदे पड़े है जिन्हें बारिश के पूर्व निर्माण करना  आवश्यक है अन्यथा अडोस - पड़ोस की इमारतों को खतरा उतपन्न हो  सकता है ।  

शहर में हज़ारों कच्चे मकानों में निवास करने वालो को अपनी  छतों दीवारों आदि  की मरम्मत व प्लास्टर कर बारिश से बचने के इंतजाम किए जाने की दरकार भी है। बारिश होते ही रेत संकट भी खड़ा होता है जिसको लेकर भी निर्माण उद्योग में चिंता दिखाई दे रही है । NGT की 15 जून से रेत खनन पर लगने वाली रोक पर सरकार का मत स्पष्ट नही हुआ है । ऐसे में यदि समय रहते अतिशीघ्र निर्माण कार्यो , व बारिश से जुड़े व्यापारों को राहत नही दी गयी तो बारिश भी एक बड़ा संकट होगी ।उधर खनिज अधिकारी गोविंद शर्मा जी का कहना है की बरसात में रेत उत्खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। ऐसे में अगर कोई अवैध रूप से रेत उत्खनन कर्ता है या करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ वैधानिक रूप से सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

एक बार पकड़े जाने पर सामान्य जुर्माना दूसरी बार पकड़े जाने पर, दोगुना, तीसरी बार पर 3 गुना और इसी प्रकार जुर्माने की रकम भी बढ़ती जाती है। इसलिए उनका स्पष्ट कहना है कि रेत का अवैध उत्खनन क्षेत्र में बिल्कुल नहीं होने दिया जाएगा और यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। अवैध रेत का उत्खनन और उस का जमाव करना भी अपराध की श्रेणी में आता है इसलिए ऐसा करने वालों के खिलाफ भी प्रशासन कार्यवाही करेगा। निर्माण कार्य मे लगने वाली रेत ,गिट्टी , मोरम ,ईंट आदि सामग्री ट्रक द्वारा रात में ही सप्लाय की जाती है क्योंकि दिन में ट्रकों का प्रवेश प्रतिबंधित होता है । रात में 9:00 से सुबह 5:00 तक अभी लाक डाउन के कारण यातायात सड़कों पर पूरी तरह बंद रखे जाने के आदेश हैं। 

ऐसे में यदि 5 हज़ार स्कवेयर फ़ीट के निर्माण की अनुमति दी गयी है तो उन तक निर्माण सामग्री कैसे सप्लाय हो सकेगी यह स्पष्ट नही है । ऐसे में जिनके निर्माण कार्य अधूरे हैं उनके यहां बारिश से खतरा उतपन्न हो सकता है उन्हें विशेष अनुमति प्रदान की जाए व बाकी कंटेनमेन्ट एरिये को छोड़ कर सभी निर्माण कार्य को छूट प्रदान की जाए । इन कार्यो के लिए उचित समय भी चाहिए , एक या दो दिन में ये कार्य नही किये जा सकते है । जिला प्रशाशन द्वारा लॉक डाउन 5 के अंतर्गत दी जाने वाली छूट में निर्माण सामग्री के सप्लाय सम्बन्धी कोई गाइड लाइन नही दी गयी है ।