पटवारी और शिक्षक भी हैं कोरोना काल के रियल कोरोना योद्धा 

जी हॉ बंधुओ पूरे 4 माह गुजरने को है। कोरोना के खिलाफ जंग में पुलिस, डाक्टर, नगरीय प्रशासन,सफाई कर्मी, सामान्य प्रशासन आदि ने खूब बाहबाही लूटी। हर जगह इन लोगों को सम्मानित किया गया। परन्तु इस कठिन समय में दो महत्वपूर्ण सिपाही भी महत्वपूर्ण भूमिका में थे जिन्हें हम पटवारी एवं शिक्षक के रूप में जानते हैं। ने भी बहुत कोरोना काल वॉरिअर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दुख इस बात का है कि सम्मानित करने बाले व्यक्तियों अथवा संस्थाओं ने इन दोनों को दरकिनार करते हुये अन्य कोरोना योद्धाओं को फूल माला पहनाकर हौसला बढ़ाया। 

पटवारी - पटवारी जी जो राजस्व विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग की रीढ़ होते है। राजस्व एवं सामान्य प्रशासन विभाग पूर्णतः पटवारी जी पर ही केन्द्रित होते है। जोकि इस कोरोना कोविड 19 के समय अन्तराल में कभी किसी के भी द्वारा सम्मानित नहीं किये गये । कोरोना काल में पटवारी जी द्वारा एक कोरोना वॉरिअर के रूप में अपने घर परिवार से दूर रहकर जनता के बीच के समस्त कार्य , प्रवासी मजदूरों के नगर /ग्राम में प्रवेश करने पर उसके क्वॉराऩटाइन से लेकर भोजन, एवं स्वास्थ्य आदि का जिम्मा पटवारी के पास ही रहा है। बॉर्डर पर सीमा सील्ड है परंतु वहॉ की सारी व्यवस्था पटवारी जी को ही देखना है। सामान्य प्रशासन विभाग का कोई भी अधिकारी कोरोना काल में  जनहित में किये जा रहे प्रत्येक कार्य के लिए पटवारी पर ही निर्भर थे। बाहर से आने बाले लोगों की सूची बनाना /बाहर जाने बालों की सूची बनाना एवं उनकी हर समस्या का समाधान करना भोजन से लेकर रूकने तक की व्यवस्था करना, यह सब पटवारी जी पर ही तो निर्भर था। कोरोना काल में हुई शादियों की निगरानी हो चाहे किसी की अन्त्येष्टि मे सम्मिलित होने बाले लोगों की संख्या हो।सब कुछ पटवारी जी की निगरानी में ही हुआ है। कोरोना का मरीज ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ तो उस मरीज को उसके घर छोड़ने की जिम्मेदारी भी पटवारी जी की ही थी। शायद कोई इन सुपर योद्धाओं की भावनाओं को समझ पाता। कितना त्याग और परिश्रम किया है। अविस्मरणीय। 

शिक्षक - कोरोना महामारी के दौरान शिक्षकों ने भी जबरदस्त मोर्चा संभाला। पूरा शिक्षा विभाग जिसके अधिकॉश शिक्षक एवं अधिकारी कोरोना योद्धा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं। मेंने शिक्षकों को भीड़ में लोगों को सामाजिक दूरी बनाये रखने का पाठ पढ़ाते हुए देखा है। वह चाहे बैंक के बाहर बढ़ रही ग्राहकों की भीड़ हो अथवा दुकानों पर इकट्ठा हुए ग्राहक हों। सभी जगह सोशल डिस्टेंस का पालन कराने का काम इन्ही के द्वारा कराया गया। बॉर्डर चाहे जिला का हो अथवा प्रदेश का सभी जगह शिक्षक महाशय ही तैनात रहे। इतना महत्वपूर्ण योगदान होने के बावजूद भी किसी ने भी इन सिपाहियों को फूल माला पहनाकर सम्मानित नहीं किया। यह बहुत अफसोस का विषय है, कि आखिर धरातल पर दिखने बाला इनका यह कार्य किसी भी समाजसेवी को नहीं दिखा। मेरे दृष्टिकोण में दोनों की कोरोना वॉरिअर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन्हें भी सम्मानित होना चाहिए। क्योंकि इनके द्वारा किया गया कार्य भी धरातल पर स्पष्ट प्रतीत हुआ है। जिसमें इनका कोई निजी स्वार्थ नही था। सिर्फ जनता के प्रति सेवाभाव ही था।