एक कदम अनलॉक 1.0 की ओर 

देश की बंद आर्थिक-सामाजिक गतिविधियों को धीरे-धीरे खोलने का काम हो रहा है । इस सिलसिले में सबसे बड़ी छूट यह दी गई है कि देशवासियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर रोक हट रही है । रेलवे ने 200 जोड़ी ट्रेनें चलाने का ऐलान कर दिया है जिसमें बुकिंग सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप हो रही है। रात के कर्फ्यू की अवधि भी शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक के पुराने ढर्रे से 4 घंटे घटा दी गई है। अब यह रात 7 बजे से सुबह 5 बजे तक ही लागू रहेगा। यानी नाइट लाइफ तो अभी दूर की बात है लेकिन लोग शाम को बाजार से बिना किसी हड़बड़ी के घर आ सकते हैं और सूरज निकलने से पहले सैर पर जा सकते हैं।

मॉल, होटल, रेस्ट्रॉन्ट और धार्मिक स्थलों को 8 जून से खोलने की बात है। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान आदि पैरंट्स तथा अन्य स्टेकहोल्डर्स से चर्चा करके जुलाई में खोले जा सकेंगे। हां, जो इलाके कंटेनमेंट एरिया में आते हैं, वहां ये छूटें नहीं लागू होंगी। कम से कम 30 जून तक वहां लॉकडाउन की सारी बंदिशें जारी रहेंगी। एक और शर्त इन छूटों के साथ यह जुड़ी है कि कोई राज्य सरकार जरूरी समझे तो वह अपने यहां इनमें से कोई भी छूट वापस ले सकती है। यानी भले केंद्र सरकार ने एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने की छूट दे दी हो, कोई राज्य सरकार चाहे तो अपना बॉर्डर सील कर सकती है।

इसके अलावा लॉकडाउन की निरंतरता में कुछ प्रमुख पाबंदियां, जैसे इंटरनैशनल फ्लाइट, मेट्रो रेल, सिनेमा हॉल, जिम, बार, स्विमिंग पूल आदि पर रोक पहले की ही तरह लागू रहेगी। इनके हटने की कोई समयसीमा नहीं तय की गई है। याद रहे, लॉकडाउन हटाने की प्रक्रिया दुनिया के कई देशों में जारी है, लेकिन बेहतर होगा कि हम खुद को उस पांत से बाहर ही मानें। दोनों अमेरिकी महाद्वीपों में अकेले कनाडा को छोड़कर लॉकडाउन को कहीं और गंभीरता से लागू ही नहीं किया, लेकिन कोरोना वायरस की गिरफ्त में बुरी तरह आने के बाद सख्ती से लॉकडाउन लागू करने वाले इटली, स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में महामारी अभी या तो स्थिर है या उतार पर है।

इसके उलट अपने देश में बीमारी से जुड़े सारे चिंताजनक आंकड़े हर रोज ही बढ़े हुए आ रहे हैं। और तो और, नॉर्थईस्ट जैसे उन गिनती के इलाकों में भी वायरस तेजी से फैल रहा है जो हाल तक इससे बचे माने जा रहे थे। जाहिर है, ऐसे में लॉकडाउन से बाहर आने की कोशिश खतरों से खाली नहीं है। लोगों की रोजी-रोटी बचाने के लिए यह खतरा हमें उठाना होगा, लेकिन फूंक-फूंककर कदम रखने और जरूरी हो तो एक कदम पीछे हट जाने की समझ लेकर चलें तो यह कठिन दौर भी हम एक दिन पार कर लेंगे।