गुरुवार को है बुद्ध पूर्णिमा


आज वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और गुरुवार का दिन है । पूर्णिमा तिथि आज शाम 4 बजकर 15 मिनट तक रहेगी । उसके बाद ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि लग जायेगी। शास्त्रों में वैशाख मास की पूर्णिमा का बहुत महत्व है । आज के दिन भगवान सत्यनारायण के निमित्त व्रत रखने का विधान है । आज के दिन जो व्यक्ति भगवान सत्यनारायण की पूजा करता है, उनकी कथा का पाठ करता है और भगवान को केले की फली, तुलसीदल आदि का भोग लगाता है, उसके परिवार में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है।

वैशाख पूर्णिमा को विशेष तौर पर बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है । बौद्ध धर्म में इस दिन का बहुत महत्व है । क्योंकि इसी दिन शाक्य मुनि गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था । साथ ही भगवान गौतम बुद्ध को सात वर्षों की कठिन तपस्या के बाद बिहार के बोध गया के बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति भी इसी दिन हुई थी । इसके अलावा भगवान गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण समारोह, यानी उनके जीवन का अंतिम दिवस भी वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है ।  बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का बहुत महत्व है।

गौतम बुद्ध ने ग्रंथों में कई ऐसे विचारों के बारे में बताया हैं जिनका अनुसरण करने से हर व्यक्ति बहुत कुछ सीख सकता है। इन विचारों को पढ़ने से निराश व्यक्ति के मन में भी आशा की ज्योति जल जाती है। जानिए ऐसे ही गौतम बुद्ध के कुछ अनमोल विचार जिससे आपको जीवन की नई दिशा मिल सकती हैं।


  • चाहे आप जितने ही पवित्र शब्द पढ़ लें या बोल लें, ये शब्द आपका भला तब तक नहीं करेंगे जब तक आप इनको उपयोग में नहीं लाते हैं।
  • मैं कभी नहीं देखता हूं कि क्या किया जा चुका है। मैं हमेशा देखता हूं कि क्या किया जाना बाकी है।
  •  सत्य के मार्ग पर चलते हुए कोई दो गलतियां कर सकता है, एक पूरा रास्ता न तय कर पाना और दूसरी - उसकी शुरुआत ही नहीं करना।
  • अपनी मुक्ति के लिए काम करो। दूसरों पर निर्भर मत रहो।
  • क्रोध को पाले रखना, गर्म कोयला को किसी और पर फेंकने के लिए पकड़े रहने के समाना है, इसमें हमारा हाथ भी जलता है। 
  • बीते समय को याद नहीं रखना चाहिए। भविष्य के लिए सपने देखना चाहिए, बल्कि अपने दिमाग में वर्तमान में केंद्रित रखना चाहिए। 
  • अज्ञानी व्यक्ति से कभी भी उलझना और बहस नहीं करना चाहिए। अज्ञानी व्यक्ति बैल के समान होता है। वह ज्ञान में नहीं, सिर्फ आकार में बड़ा दिखता है।
  • न ही सुख स्थायी और न ही दुख। बुरा समय आने पर उसका डटकर सामना करना चाहिए और हमेशा रोशनी की तलाश करनी चाहिए।