स्व-सहायता समूह की सदस्य...

महिलायें मास्क बनाकर कोरोना संक्रमण को रोकने में दे रहीं हैं योगदान 


ग्वालियर। स्व-सहायता समूह की महिला सदस्य सूती कपड़े के मास्क बनाकर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में अपना अहम योगदान दे रही हैं। इन मास्क के निर्माण से घर पर ही महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्वालियर जिले के 22 गाँवों में स्व-सहायता समूहों से जुड़कर सवा चार सौ महिलायें मास्क का निर्माण कर घर पर ही रोजगार प्राप्त कर रही है।

स्व-सहायता समूहों द्वारा दो लाख से अधिक मास्क का निर्माण भी किया गया है, जो विभिन्न शासकीय कार्यालयों, संस्थाओं एवं मनरेगा में लगे मजदूरों द्वारा कोरोना के संक्रमण को रोकने में उपयोग किया जा रहा है। जिले में स्व-सहायता समूहों से जुडी महिलायें जो मास्क बना रही हैं, उनमें डबरा जनपद के ग्राम कल्याण समूह द्वारा 70 हजार मास्क बनाये गए हैं। समूह की सदस्य रहीसा, सरोज, नीतू, अनीशा एवं मीना का कहना है कि मास्क निर्माण करने का उनका मुख्य मकसद आमजन को 10 रूपए में मास्क उपलब्ध कराकर कोविड-19 वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकना है। जनता के बीच सकारात्मक संदेश देना है।

महिलाओं ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान मास्क निर्माण से घर पर ही समूहों की महिला सदस्यों को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है। इस कार्य से समूह की सदस्यों को 200 रूपए प्रतिदिन की आय भी हो रही है। सदस्यों ने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण को रोकने में मास्क ही एक ऐसा सरल, सस्ता एवं सुलभ साधन है, जो 10 रूपए में कोई भी व्यक्ति खरीदकर उपयोग कर सकता है। निर्मित मास्क एक परत में तीन फोल्ड में सूती कपड़े का बना होता है। जिसे धोकर पुन: उपयोग किया जा सकता है।

कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने कोरोना महामारी को रोकने में मास्क बनाने वाले समूहों की महिलाओं की सराहना की है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि जिले में सभी विकासखण्डों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मास्क बनाने का कार्य किया जा रहा है। जिले में बनाए गए 2 लाख मास्क में से 70 हजार मास्क अकेले डबरा जनपद के ग्राम कल्याणी समूह द्वारा निर्मित किए गए हैं।