एक मजदूर पिता…
बेटियों के लिए बना श्रवण कुमार

त्रेता में श्रवण कुमार ने माता पिता को काम-वाम में बिठाकर कराई थी यात्रा। और कलयुग में एक मजदूर पिता अपनी बेटियों के लिए बना श्रवण कुमार कावड़ में बिठाकर लेकर चला बेटियों को अपने घर द्वार। 

इश पिताः के लिये जितना लिखू कम है
जितना बोलू उतना कम है । एक पिता का अपने बच्चों के लिए  प्यार किसे कहते है यह यह तस्वीर बेहद प्रेरणादाई है। बच्चों को भी इससे सबक लेना चाहिए कि जब माता-पिता अपने बच्चों में किसी भी प्रकार का फर्क नहीं करते हे। बे अपने  बच्चों के प्यार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने देते है तो बच्चों को भी अपने माता-पिता का पूरा ख्याल रखना चाहिए। 

अपनी बच्चियों को कई किलोमीटर यूं ही इसी प्रकार लेकर चलता यह पिता एक मिसाल है। संकट के दौर में हमने माँ बाप का बच्चो के लिये समर्पण देखा ये सब हम सब बच्चे अपने माँ बाप की सेवा करने का  कोई भी अवसर न छोड़े । माता पिता के चरणों में ही ईश्वर मिलेगा