कलेक्टर ने नगरीय निकायों के सीएमओ को दिये निर्देश...

चुनाव की तर्ज पर बाढ़ राहत के लिये कम्यूनिटी प्लान बनायें : कलेक्टर 


मुरैना। कोटा बैराज या अधिक वर्षा होने से मुरैना जिले के कई गांव एवं नगरीय निकायों के वार्ड के वार्डों में बाढ़ जैसे हालात निर्मित न हों। इससे निजात पाने के लिये चुनाव की तर्ज पर प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर कम्यूनिटी प्लान 7 दिवस के अंदर बनाकर तैयार करें। इसके साथ ही डूब प्रभावित जिले के 52 गांव जो चम्बल नदी के उफान से टापू की स्थिति में बन जाते है, उन गांवों से एक-एक व्यक्ति एवं उसी गांव में नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी का मोबाइल नम्बर भी शामिल होना चाहिये। यह निर्देश प्रियंका दास आईएएस कलेक्टर मुरैना ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में उपस्थित अधिकारियों को दिये। इस अवसर पर अपर कलेक्टर एसके मिश्रा, समस्त एसडीएम, जनपद सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ, सिंचाई विभाग के सभी अधिकारी उपस्थित थे।

कलेक्टर प्रियंका दास ने कोटा बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की माॅनीटरिंग निरंतर जारी रहे और यह भी सुनिश्चित किया जाये कि जितना पानी छोड़ा जाये उस पानी से चम्बल नदी के आसपास कोन-कोन से गांव टापू बन जाते है। इस प्रकार का सूचना तंत्र मजबूत होना चाहिये। बाढ़ के दौरान आवश्यक सामग्री, नाव, बोट, रस्सा, टोर्च आदि की सूची बनाकर लिस्टिंग करें, आवश्यक होने पर डिमाण्ड नोट भेजें, बजट का अभाव हो तो मेरे से डीओ लेटर शासन को भेजा जावे। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर डिजास्टर मैनेजमेंट बना हुआ है, उसी तर्ज पर तहसील स्तर पर भी डिजास्टर मैनेजमेंट बनायें।

उन्होंने समस्त एसडीएम को निर्देश दिये है कि उनके अंतर्गत एक या दो तहसील आती है, वहां भी डिजास्टर मैनेजमेंट बनना चाहिये। कलेक्टर ने कहा कि राहत कैम्प इस प्रकार होना चाहिये कि सोशल डिस्टेसिंग का पालन पूरी तरह हो। इसके लिये नजदीकी शासकीय भवन, स्कूल, पंचायत भवन, आंगनवाड़ी या स्थानीय टेंट से वाटरपू्रफ के प्रबंध अभी से चिन्हित करें। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी कोई आंगनवाड़ी केंद्र भवन है जिसकी छत से पानी टपकता हो तो उसकी भी रिपेयरिंग करा सकते है जो राहत कैम्प में सहायता बन सके। उन्होंने कहा कि मोटरबोट मैकेनिक, गोताखोर की लिस्टिंग और मोबाइल भी रखना सुनिश्चित करें। संबंधित अधिकारियों के वाहन में पीए सिस्टम (लाउडस्पीकर) होना चाहिये।

कलेक्टर ने कहा कि जिले स्तर पर, तहसील स्तर पर कंट्राॅल रूम व कर्मचारियों का चयन कर सूची तैयार की जावे। जिससे जिले में बाढ़ के हालात निर्मित होने पर कंट्राॅल रूम तत्काल कार्य प्रारंभ कर सकें। उन्होंने कहा कि पगारा, कुतवार, पिलुआ डेम में कहीं कोई रिपयेरिंग कार्य हो तो 15 जून तक करा लिया जावे। इसके साथ ही अधिकाारियों के वाहन मरम्मत योग्य है तो रिपेयरिंग कराई जावे। डूब वाले क्षेत्रों में विद्युत खंभे पर बांस लगाकर झण्डी लगाई जावे। जिससे विद्युत पोल की पहचान डूब के समय आसानी हो सके और जिसके कारण नाव या व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त न हो सके। कलेक्टर ने नगर निगम कमिश्नर एवं नगरीय निकायों के सीएमओ को निर्देश दिये कि नगरीय क्षेत्रों के वार्डों में नाली एवं नालों की सफाई कार्य बरसात के पूर्व ही करा लिया जाना सुनिश्चित करें। क्योंकि अधिकारी, कर्मचारी कोरोना की जंग में जूझ रहे है, वर्षा प्रारंभ होेने से बाढ़ जैसे हालात न बनें। इसलिये समय से पूर्व यह बैठक की जाना उचित था।