भोपाल में 4 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने निकाली रैली

प्रदेश में लेनदेन प्रभावित...

भोपाल में 4 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने निकाली रैली


भोपाल। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर भोपाल सहित प्रदेशभर में देखने को मिला, इसके चलते बैंकों का कामकाज प्रभावित रहा। इस दौरान बैंकों ने ग्राहकों को मैसेज भेजकर कहा कि हड़ताल के दौरान इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सर्विसेज चालू रहीं। बैंकों की हड़ताल से मप्र की 5 हजार शाखाओं के 40 हजार बैंक अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इससे पूरे प्रदेश में शुक्रवार को 7 करोड़ रुपए का बैंकिंग व्यवसाय प्रभावित हुआ है।

यूएफबीयू के समन्वयक वीके शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि भोपाल जिले में 1 लाख 50 हजार रुपए का कारोबार और इंदौर में सवा लाख करोड़ रुपए का बैंकिंग व्यवसाय प्रभावित रहा। भोपाल में बैंकों की 446 शाखाएं और इंदौर की 600 शाखाओं में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा।

उन्होंने बताया कि वेतनवृद्धि सहित अन्य विभिन्न मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी शुक्रवार और शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं। गुरुवार को इंडियन बैंक एसोसिएशन और संगठनों के बीच हुई बैठक का बेनतीजा रही थी, इसे लेकर बैंककर्मियों और अधिकारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया था।

यूएफबीयू कोऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि हड़ताल के मद्देनजर आज भोपाल के एमपी नगर स्थित ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स के रीजनल आफिस के समीप लगभग 4 हजार बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी एकत्रित हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी तथा प्रदर्शन किया। इस दौरान बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने रैली भी निकाली। उन्होंने बताया कि भोपाल में सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी हड़ताल पर हैं।

इसके अलावा ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, होशंगाबाद, रीवा, सतना, शहड़ोल सहित प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी हड़ताल पर हैं, जिसके चलते बैंकों के कामकाज प्रभावित हुआ। इस दौरान बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया।

हड़ताल के कारण प्रदेश के करीब 15 लाख अधिकारी, कर्मचारी और पेंशनरों को जनवरी का वेतन और पेंशन मिलने में देरी होगी। बैंककर्मी लंबित मांगों का निराकरण नहीं करने से नाराज हैं। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो बैंक यूनियनों ने 1 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। इससे पहले देशव्यापी हड़ताल अक्टूबर 2019 में बुलाई गई थी। तब बैंकों के विलय के विरोध में हड़ताल हुई थी।

लगातार 3 दिन तक बैंकों में कामकाज बंद रहने की स्थिति में बड़ा असर पड़ेगा। एटीएम में भी कैश की किल्लत बढ़ सकती है। हालांकि, हड़ताल के दौरान नेट बैंकिंग के सामान्य रूप से काम करने की संभावना है। इससे पहले इसी महीने 8 जनवरी को भी बैंक हड़ताल पर थे। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में 8 जनवरी को 'भारत बंद'  का ऐलान किया था। इसको लेकर बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल पर चले गए थे।

सभी बैंकों ने ग्राहकों को मैसेज भेजकर कहा है कि, "हड़ताल के दौरान हमारे डिजिटल चैनल, जैसे इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सर्विसेज चालू रहेंगे। इनके जरिए अपनी बैंकिंग जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।"

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियनों के नेताओं का कहना है कि वेतन पुनर्गठन समझौते को लागू नहीं किया जा रहा है। यह लागू हो जाता तो बैंककर्मियों को आर्थिक मदद मिलती। केंद्र एक के बाद एक बैंकों को मर्ज करते जा रहा है, लेकिन इन बैंकों के बकाया वसूली को लेकर कोई ठोस नीति नहीं है।

हजारों करोड़ों का बकाया डूब जाएगा। इसका नुकसान बैंक, उनमें काम करने वाले कर्मचारी और देश को हो रहा है। इसी कारण आर्थिक सुस्ती देखी जा रही है और बैंकों को मर्ज करने से रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं।

बैंक यूनियनों ने अप्रैल में भी अनिश्चतकालीन हड़ताल का भी ऐलान किया है। लगातार 3 दिन 11, 12 और 13 मार्च को भी बैंक ने हड़ताल करने का निर्णय किया है। मार्च में होली और अन्य छुट्टी को मिलाकर करीब 8 दिन बैंक बंद होने के आसार हैं।

यूनियन की ओर से जारी सूचना के अनुसार अगर मांगें पूरी नहीं होती हैं तो बैंक 1 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश होगी। मौजूदा समय में बैंक अधिकारी के रूप में जो नए लोग नियुक्त हो रहे हैं उनका वेतन प्राइमरी के शिक्षक से थोड़ा नहीं, लगभग 10 हजार रुपए कम है। वहीं, नए नियुक्त हो रहे क्लर्क का वेतन राज्य और केंद्र सरकार के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से भी कम है।

ये हैं मांगें :-

  • वेतन में कम से कम 20 फीसदी की वृद्धि की जाए। 
  • बैंकों में हफ्ते में 5 दिन ही काम हो। 
  • बेसिक पे में स्पेशल भत्ते का विलय हो। 
  • एनपीएस को खत्म किया जाए। 
  • परिवार को मिलने वाली पेंशन में सुधार।
  • स्टाफ वेलफेयर फंड का परिचालन लाभ के आधार पर बांटना। 
  • रिटायर होने पर मिलने वाले लाभ को आयकर से बाहर करना। 
  • कांट्रैक्ट और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट के लिए समान वेतन।
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