ग्वालियर संभाग की कृषि उपज मंडीयो का हाल है बदहाल

मध्यप्रदेश की कृषि मंडियों में सचिवों की बल्ले-बल्ले...

ग्वालियर संभाग की कृषि उपज मंडीयो का हाल है बदहाल 


ग्वालियर संभाग के अपर संचालक आरपी चक्रवर्ती के ढुलमुल रवैये के कारण , संभाग की मंडियों की हालत दिनों दिन खस्ताहाल होती जा रही है। इन दिनों मंडियों में सभी व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं । यह हाल भी तब है जब अभी मंडियां में नई फसलो की आवक शुरू नहीं हुई है । क्योंकि जब नई फसल आएगी तब इन मंडियों की हालत बद से बदतर होना तय है।

मंडियों के प्रांगण में जगह-जगह गंदा पानी कीचड़ एकत्रित है।  सूअर घूम रहे हैं। गंदगी का आलम पसरा हुआ है । विश्राम गृह में ताले पड़े हुए हैं । तो कहीं कैंटीन में ताले पड़े हुए हैं । जो कैंटीन खुली हुई है उनमें कैंटीन के नाम पर केवल समोसे और पकोड़े की दुकान नजर आ रही है ।

ऐसे में जब भूखा प्यासा किसान भोजन के लिए मंडी की कैंटीन की तरफ रुख करें तो उसे यहां भरपेट भोजन तो छोड़िए जनाब उसे ढंग का ताजा नाश्ता भी नहीं मिलेगा क्योंकि इन मंडियों में एक थाली के अंदर 4-6 समोसे और पाओ दो पाओ पकौड़ी ही नजर आएंगी ।

इतना ही नहीं इन कैंटिनो में सरेआम घरेलू गैस गैस के सिलेंडर व बड़े-बड़े इलेक्ट्रिक हीटर  का उपयोग होते हुए हमारी टीम ने पकड़ा।  कृषि उपज मंडी अंबा पोरसा पिछोर मगरोनी मुरैना शिवपुरी कैलारस जैसी तमाम मंडियों में देखने को मिली मंडी पिछोर में नीलामी के समय दी जाने वाली 371 पर्ची भी कच्ची दी जा रही थी।

ऐसा नजारा लगभग सभी मंडियों मैं हमारी टीम को देखने को मिला । सबसे ज्यादा खराब हालात अंबाह,पोहरी, शिवपुरी, पिछोर मगरोनी, मुरैना जोरा कैलारस सबलगढ़ की मंडियों में देखने को मिली।  अधिकतर मंडियों पक्की तौल पर्ची के स्थान पर किसानों को कच्ची पर्ची तमाई जा रही थी। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि शासन को किस प्रकार राजस्व का चूना लगाए जाने मैं यह मंडियां अपना निर्वहन कर रही हैं।

मेहगांव, गोहद, करेरा, नरवर, की मंडी की स्थिति बेहतर मिली इसके साथ ही भितरवार मंडी की स्थिति भी संतोषजनक देखने को मिली। इन मंडियों में स्टॉप भी पाया गया सचिव भी अपने कक्ष में स्टाफ के साथ कार्य करते हुए पाए गए।

अंबाह मंडी में तो नजारा इस कदर का था , की फसल खरीदने के लिए प्राइवेट व्यक्तियों के द्वारा सचिव के ऑफिस के सामने ऑफिस के दरवाजे पर फसल बेचने के लिए अपना मोबाइल नंबर चस्पा किया था। इस मोबाइल नंबर पर हमने कॉल लगाया तो पहले तो यह व्यक्ति फसल खरीदने के लिए तैयार हो गया लेकिन उसे बातचीत के दौरान कुछ डाउट हुआ तो फिर उसने फोन काट दिया फिर दोबारा रिसीव नहीं किया।

लेकिन इससे जितनी भी बातचीत हुई उससे यह पता लगा कि हमसे यह व्यक्ति फसल मंडी के बाहर तो तुलवाना चाह रहा था चाह रहा था क्योंकि मंडी में तो कोई था ही नहीं। मंडी सचिव के दफ्तर के अंदर गधे घूम रहे थे स्टाफ के नाम पर मंगरौनी, पिछोर अंबाह की मंडियों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ना । कहां तक उचित है ।

इसके अलावा मंडी प्रांगण में मवेशी बेचने वालों के डेरे जमे हुए थे आसपास ही उनके मवेशी बंधे हुए थे । लेकिन मंडी में का स्टाफ नदारद था इस संबंध में जब हमने चपरासी से पूछा तो उसने बताया कि सचिव तो लगभग 1 महीने की छुट्टी पर गए हैं।

मंडियों में गधे और सूअर घूम रहे हैं जगह-जगह पानी भरा हुआ है प्राइवेट लोगों द्वारा फसल बिक्री के लिए कार्यालयों पर अपने फोन नंबर मोबाइल नंबर चस्पा किए गए हैं फसल बेचने के लिए मंडी के बाहर किसानों की फसल तुलवाई जा रही है। कॉल के अतिरिक्त, भार से ज्यादा फसल का भाग लेना ।

इससे सरकार को राजस्व का घाटा और किसान को उसकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाना एक प्रश्न चिन्ह तो व्यवस्था पर अवश्य लगाता है। और यह सब होते हुए देखना मंडी निरीक्षक को भार साधकों और यहां तक की अपर संचालक मंडी विपणन बोर्ड संभाग ग्वालियर का मुक दर्शक बने रहना व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह अवश्य लगाता है।
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