आयोजन करने का सरकार का मुख्य मकसद...

पशुपालन मंत्री श्री यादव ने किया वन मेले का शुभारंभ


ग्वालियर 15 जनवरी 2020 पशुपालन, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास मंत्री  लाखन सिंह यादव ने कहा कि शासन द्वारा वन मेलों का आयोजन करने के पीछे मुख्य मकसद जड़ी बूटियों से निर्मित औषधियों का प्रचार.प्रसार कर लोगों की जानकारी में लाना है। जिससे लोग विभिन्न बीमारियों के उपचार में इनका उपयोग कर सकें।

पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव बुधवार को श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला प्रांगण में मण्प्रण् राज्य लघुवनोपज संघ भोपाल द्वारा आयोजित वन मेला 2020 के शुभारंभ कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में मेला समिति के सदस्य श्री मेहबूब भाई चैनवालेए कांग्रेस नेता भीकम सिंह यादवए केदार सिंह किरारए सुरेन्द्र गुर्जर, वन मंडलाधिकारी अभिनव पल्लव सहित वन विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

मंत्री श्री यादव ने वन मेले में विभिन्न वन औषधि एवं जड़ीबूटी विक्रेताओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी निरीक्षण कर वन औषधियों के बारे में जानकारी ली। लाखन सिंह यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वन मेलों का आयोजन करने का सरकार का मुख्य मकसद वन औषधियों एवं जड़ीबूटियों को संरक्षित कर उनके औषधीय गुणों की जानकारी आम जनता को देना है। .

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वन मेलों के माध्यम से वन औषधियों एवं जड़ी बूटियों का प्रचार.प्रसार भी करना है। जिससे इन वनोषधियों को और मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा यह खुशी की बात है कि गत मेले में स्टॉल के माध्यम से एक वन औषधी विक्रेता ने एक लाख 50 हजार रूपए का मुनाफा लिया जो इस बात का प्रतीक है कि लोगों का वन औषधियों एवं आयुर्वेदिक औषधियों के प्रति रूझान बढ़ रहा है।

पशुपालन मंत्री लाखन सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि भविष्य में वन मेला, भोपाल वन मेले की तर्ज पर आयोजित हों। जिससे वन औषधियों से जुड़े प्रदेश के लोगों को रोजगार प्राप्त होगाए वहीं लोगों को इन औषधियों के उपयोग से उपचार में भी लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम के शुरू में वनमंडल अधिकारी अभिनव पल्लव ने वन मेलों के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मेले का मुख्य उद्देश्य आम जनता को वन औषधियों से अवगत कराने के साथ विक्रेताओं को बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि यह मेला 15 जनवरी से 15 फरवरी 2020 तक आयोजित होगा।

उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि भविष्य में यह वन मेला राज्य स्तरीय वन मेले के रूप में आयोजित होए जिससे प्रदेश भर के वन औषधि के जानकार एवं विक्रेता इन मेलों का लाभ ले सकें। उन्होंने बताया कि मेले में गत वर्ष 6 लाख की वन औषधि विक्रय की गई थी। जबकि इस वर्ष अभी तक 50 हजार की वन औषधि विक्रय हो गई है।

कार्यक्रम में श्योपुरए जबलपुरए छतरपुरए छिंदवाड़ा आदि जिलों के वैध एवं वन औषधि विक्रेता उपस्थित थे। इस मौके पर विभाग द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदाय किया गया। अंत में सभी का आभार एसडीओ वन श्री जी के चन्द्र ने व्यक्त किया।