सांस्कृतिक संध्या के साथ चार दिवसीय महोत्सव का भव्य समापन,प्रस्तुतियों ने मोहा मन...
भक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर आधारित,‘स्पंदन–2026’ की यादगार विदाई !
ग्वालियर। प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के चार दिवसीय वार्षिक महोत्सव ‘स्पंदन–2026’ का 4 नवंबर को जीवाजी विश्वविद्यालय के सभागार में भव्य सांस्कृतिक संध्या एवं समापन समारोह के साथ यादगार समापन हुआ। चार दिनों तक चली विभिन्न शैक्षणिक, प्रबंधन, तकनीकी, कला, संगीत एवं विधि आधारित प्रतियोगिताओं के बाद अंतिम संध्या पूरी तरह विद्यार्थियों की रचनात्मकता, कला और सांस्कृतिक प्रतिभा के नाम रही। विद्यार्थियों ने नौ आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से भक्ति, भारतीय संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, खेल और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों को मंच पर जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिवाकर सिंह राजपूत ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि सांस्कृतिक आयोजन शिक्षा का अभिन्न अंग हैं और व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व को निखारने के मंच हैं। विद्यार्थियों को अपनी परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि डीआईजी, ग्वालियर रेंज डॉ. असित यादव ने युवाओं को अनुशासन, कानून के सम्मान और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा को कला, खेल और रचनात्मक गतिविधियों में सही दिशा मिले तो वह राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर आधारित प्रस्तुति की सराहना करते हुए महिलाओं के सम्मान को अपने व्यवहार और संस्कार का हिस्सा बनाने की अपील की।
संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) निर्मल्य बंद्योपाध्याय ने अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘स्पंदन’ केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्रायोजकों और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
नौ प्रस्तुतियों ने बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ गणेश वंदना से हुआ। इसके बाद कृष्ण लीला नृत्य के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक लीलाओं की झलक प्रस्तुत की गई। फैशन रिवोल्यूशन में बदलते दौर के फैशन और पहनावे को आकर्षक अंदाज में दर्शाया गया, वहीं इंडियन कल्चर नृत्य में देश की विविध परंपराओं और लोक संस्कृतियों के रंगों ने अनेकता में एकता का संदेश दिया।
वीमेन एम्पावरमेंट प्रस्तुति के जरिए नारी शक्ति, आत्मविश्वास और समानता का संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया। एजुकेशन इवोल्यूशन में पारंपरिक शिक्षा से आधुनिक शिक्षा तक के सफर को दर्शाया गया, जबकि स्पोर्ट्स रिवोल्यूशन ने खेल भावना, टीम वर्क और खिलाड़ियों के उत्साह को मंच पर उतारा। हॉरर 2.0 अपनी रहस्यमयी थीम, आकर्षक वेशभूषा, प्रकाश और अभिनय के कारण संध्या का विशेष आकर्षण रही।
कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों की संयुक्त नृत्य प्रस्तुति से हुआ। शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की इस साझा प्रस्तुति ने आपसी सामंजस्य और संस्थान की टीम भावना को खूबसूरती से प्रदर्शित किया। हर प्रस्तुति पर दर्शकों की तालियों से सभागार गूंजता रहा।
सांस्कृतिक संध्या की समन्वयक सहायक प्राध्यापक स्वीटी दुबे एवं स्पंदन–2026 की समन्वयक सहायक प्राध्यापक सोनम कुशवाह ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन को सफल बनाने में समापन समारोह की समन्वयक डॉ. आम्रपाली चावला सहित पूरी आयोजन टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर संस्थान के शिक्षकगण, स्टाफ सदस्य और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। संस्थान ने मुख्य प्रायोजक OPPO तथा सह-प्रायोजक पंजाब नेशनल बैंक (PNB), ललित जैन केटरिंग एंड हॉस्पिटैलिटी सर्विस, SK पेंटर्स, एनकोर कंस्ट्रक्शन्स, क्राफ्टन इंडिया एस्पोर्ट्स एवं स्टूडियो SAPL – स्पेस आर्किटेक्ट्स प्रा. लि. सहित सभी अतिथियों, निर्णायकों, प्रतिभागियों और विद्यार्थी स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। इस तरह ‘स्पंदन–2026’ का समापन विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना की अमिट छाप छोड़ गया।




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