फूलबाग शहीद मैदान में मां सरस्वती, दुर्गा और काली की त्रिमूर्ति के दर्शन...
आठ दिन से भक्ति और संस्कृति की धूम,शीतला माता हादसे के बाद आगामी कार्यक्रम स्थगित !
ग्वालियर। ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर का फूलबाग क्षेत्र पिछले आठ दिनों से धार्मिक आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक आयोजनों से गुलजार है। फूलबाग के मुख्य मैदान में जहां रामायण पर आधारित रामलीला का मंचन श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ रहा है, वहीं मानस भवन में बंगाली समाज द्वारा अष्टभुजी मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। दूसरी ओर, फूलबाग के शहीद मैदान में मां सरस्वती, मां दुर्गा और मां काली की त्रिमूर्ति श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
इन आयोजनों के माध्यम से फूलबाग क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की अनूठी छटा देखने को मिल रही है। पिछले आठ दिनों से यहां लगातार धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां चल रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी भाग ले रहे हैं। प्रतिदिन आरती के दौरान शहर के अनेक गणमान्य नागरिक भी शामिल होते रहे हैं। इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, व्यवसायी, पेशेवर और समाजसेवी शामिल हैं।
शहीद मैदान में पांच वर्षों से हो रही मां की आराधना
फूलबाग के शहीद मैदान में मां की स्थापना और नौ दिवसीय आराधना का सिलसिला पिछले पांच वर्षों से लगातार जारी है। पत्रकार संजय भारद्वाज, रवि यादव, दीपक शर्मा,अजय दुबे, रवि सिकरवार, संजय शर्मा, कमल शर्मा सहित अनेक साथी मिलकर इस धार्मिक आयोजन को आगे बढ़ा रहे हैं।
आयोजन के दौरान आरती में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी उमेश गुप्ता, आदर्श गौशाला लाल टिपारा के संत ऋषिश्वर महाराज, अचलेश्वर ट्रस्ट के नवनियुक्त अध्यक्ष राजेश ऐरन, पूर्व अध्यक्ष हरिदास अग्रवाल, प्रोफेसर अनिल शर्मा, आकाश सर, कांग्रेस नेता सुनील शर्मा, वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक पटसारिया सहित शहर के अनेक समाजसेवी, राजनेता, सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए।
नवरात्र के नौ दिनों तक सभी साथी मां की आराधना में लीन रहते हैं और शहर, प्रदेश तथा देश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना करते हैं। यह आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी सहयोग, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का माध्यम भी बना हुआ है।
गरबा-डांडिया से लेकर कवि सम्मेलन तक होते हैं आयोजन
शहीद मैदान में प्रतिवर्ष धार्मिक कार्यक्रमों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। गरबा और डांडिया यहां के प्रमुख आकर्षण होते हैं। इसके अतिरिक्त कवि सम्मेलन, बच्चों के नृत्य और गायन सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाता है। इन आयोजनों में धर्म और संस्कृति के साथ सामाजिक सहभागिता की भावना भी दिखाई देती है। बच्चों, युवाओं और परिवारों की भागीदारी इस आयोजन को सामूहिक उत्सव का स्वरूप देती है।
शीतला माता हादसे के बाद कार्यक्रम स्थगित करने का निर्णय
इसी बीच, रविवार और सोमवार की दरमियानी रात शीतला माता मंदिर के समीप हुए हृदयविदारक हादसे में 15 लोगों की जान जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया। इस हादसे के मद्देनजर फूलबाग स्थित शहीद मैदान में आगामी दो दिनों के लिए निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं।
आयोजन से जुड़े साथियों का यह निर्णय हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना और शोक की भावना से जुड़ा है। उत्सव और उल्लास के बीच हुई इस दुखद घटना ने धार्मिक आयोजनों के माहौल को भी प्रभावित किया है।
आस्था के साथ संवेदनशीलता का संदेश
फूलबाग में चल रहे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन ग्वालियर की सांस्कृतिक विविधता तथा सामूहिक आस्था की झलक प्रस्तुत करते हैं। एक ओर रामलीला के माध्यम से मर्यादा और आदर्शों का संदेश दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के जरिए श्रद्धालु सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
हालांकि, शीतला माता मंदिर के समीप हुई दुखद दुर्घटना के बाद कार्यक्रम स्थगित करने का निर्णय यह भी दर्शाता है कि धार्मिक उत्सवों के बीच मानवीय संवेदनाएं सर्वोपरि हैं। मां की आराधना के साथ पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना और दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देना इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।




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