अब देखना होगा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कब और किस स्तर पर होगी...
नरवर के तालाबों और किले की खाई पर कब्जा कर अतिक्रमण करने वालों पर NGT की टेढ़ी नजर !
शिवपुरी जिले की ऐतिहासिक नगरी के रिकॉर्ड में दर्ज जलस्रोतों के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने की कवायद तेज होने जा रही है। लखना, नया, राजा का, खटकियाई और पनडूरी तालाब के साथ किले की खाई का मुद्दा, लखना तालाब के सर्वे नंबर 136, 138, 4.62 हेक्टेयर रकबे का है लेकिन राज्य वेटलैंड अथओर्टी मे वेटलैंड एरिया 8.93 हेक्टेयर के उल्लेख ने खड़े किए गंभीर सवाल।
नरवर के प्राचीन तालाबों, जलाशयों और किले के चारों ओर मौजूद खाई को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में चली करीब दो साल की कानूनी जद्दोजहद ने जलस्रोतों के संरक्षण, सीमांकन, अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में अधिवक्ता अभय जैन एवं राशिका नारायण की ओर से पैरवी की गई। NGT के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में नरवर के जल निकायों की स्थिति, उनके सर्वे नंबर, सीमांकन, फेंसिंग, अतिक्रमण और सीवेज रोकने जैसे मुद्दों पर विस्तृत तथ्य दर्ज हैं।
प्रकरण में केवल एक तालाब ही नहीं बल्कि राजस्व दस्तावेजों में दुहाई तालाब, लखना तालाब, नया तालाब, राजा का तालाब, खटकियाई तालाब, पनडूरी का तालाब तथा नगर में स्थित किले के परकोटे की बाहरी हिस्से से लगी प्राचीन नहर प्रणाली (खाई) जैसे जलस्रोतों के संरक्षण का विषय सामने आया है। एक जागरूक नागरिक देवेंद्र चौरसिया शिकायतकर्ता के द्वारा आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया गया कि कुछ जल निकायों अथवा उनकी सीमा वाले क्षेत्रों में मिट्टी-मलबा भरकर जमीन को समतल करने तथा उसके बाद व्यावसायिक गतिविधियां विकसित करने की कोशिश की गई, जिनमें दुकानें, गोदाम, पेट्रोल पंप, रिसॉर्ट, होटल और शॉपिंग मॉल का पक्का निर्माण कर संरचनाओं में बदलाव करने का उल्लेख किया गया है।
लखना तालाब के परिधि से 50 मीटर तक कोई बी निर्माण कार्य नहीं होगा !
NGT के दस्तावेज में लखना तालाब, जो कि पार वाली माता तालाब के नाम से भी जाना जाता है उस तालाब का सर्वे नंबर 136, 138 राजस्व रिकॉर्ड में क्षेत्रफल 4.62 हेक्टेयर दर्ज होने का उल्लेख है। वहीं राज्य वेटलैंड अथॉरिटी ने वेटलैंड रकबा 8.94 हेक्टेयर बताए जाने की बात भी सामने आई है। यही अंतर अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल बन गया है लखना तालाब का सीमांकन अब तालाब के पास निजी सर्वे नंबर होने पर भी राज्य वेटलैंड समिति के संरक्षण नियम के अनुसार वर्ष 2017 से इसकी परिधि से 50 मीटर तक कोई बी निर्माण कार्य नहीं होगा और 2017 के बाद हुए निर्माण को बी हटाया जायेगा
समिति की रिपोर्ट ने कुछ आरोपों को मौके पर नहीं पाया !
इस मामले में NGT द्वारा गठित संयुक्त समिति ने मौके का निरीक्षण किया। और रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें कहा गया कि निरीक्षण के दौरान लखना तालाब अथवा उसके ओवरफ्लो सिस्टम को जमीन समतल करने के लिए मिट्टी-मलबे से भरा हुआ नहीं पाया है जब कि दुहाई तालाब से लगी हुई वर्तमान स्थिति नजर नहीं आई।रिपोर्ट में तालाब के भरे होने और ओवरफ्लो होने का उल्लेख किया गया है।हालांकि, आवेदक की ओर से समिति की पहली रिपोर्ट पर आपत्तियां उठाई गई, इसके बाद जल निकायों के वास्तविक क्षेत्रफल और स्थिति के सत्यापन के लिए दोबारा निरीक्षण की प्रक्रिया सामने आई। यही बिंदु इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है, एक ओर आरोप हैं, दूसरी ओर समिति का स्थल निरीक्षण है और तीसरी ओर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जल निकायों की सीमाएं हैं।
किले की खाई भी सिर्फ इतिहास नहीं, जल निकाय के रूप में रिकॉर्ड में...
नरवर नगर में किले के परकोटा चारों ओर मौजूद ऐतिहासिक (खाई)नहर प्रणाली का भी NGT के दस्तावेज में उल्लेख है। दस्तावेज में इसके लिए अक्षांश 25.637981 और देशांतर 77.9111 दर्ज हैं।खाई से जुड़े 15 सर्वे नंबरों का उल्लेख किया गया है, जिनमें 1956/5/3, 1956/5/2, 1956/5/3/2, 1956/5/1/3/1, 1956/5/1/2/2, 1956/5/1/2/1, 1956/5/1/1, 1956/4, 1956/3, 1956/2, 1956/1, 1960/2, 1960/1, 1962, 1852 शामिल हैं।
वर्तमान की बात कही जाए तो राजस्व दस्तावेज में इनमें से अधिकांश भूमि को निजी भूमि के रूप में दर्ज किए जाने की बात भी सामने आती है। यही स्थिति अब प्रशासनिक सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बनी हुई है कि ऐतिहासिक जल निकाय के रूप में दर्ज खाई की वास्तविक सीमा और निजी भूमि के राजस्व रिकॉर्ड के बीच स्थिति क्या है।
खाई और सिंघाडी से जुड़े सरकारी और निजी सर्वे नंबर भी दर्ज दस्तावेज में से संबंधित कई सर्वे नंबरों का उल्लेख है, जिनमें निजी और सरकारी दोनों प्रकार की भूमि दर्ज होने की बात सामने आती है। इनमें 1716/3, 1716/2, 1716/1/2, 1716/1/1, 1717/2/2/2, 1717/2/2/1, 1717/2/1, 1717/1, 1721/2, सर्वे नंबर सहित कई प्रविष्टियां हैं।
NGT रिकॉर्ड में सिर्फ कब्जे नहीं, प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी भी...
मामले में बिना उपचारित अथवा आंशिक रूप से उपचारित सीवेज को तालाब में जाने से रोकने की जिम्मेदारी भी नगर परिषद के सामने रखी गई है। संयुक्त समिति ने नगर परिषद नरवर को यह सुनिश्चित करने की सिफारिश की कि बिना उपचारित गंदा पानी सभी तालाब में प्रवेश न करे। इसके साथ ही जल निकायों की पहचान, सर्वे, सीमांकन और संरक्षण तथा अतिक्रमण मिलने की स्थिति में कानूनी नियमों के अनुसार कार्रवाई की बात भी कही गई है। जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने जैसे उपायों का भी उल्लेख है। तालाब के हाई फ्लोड फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर के दायरे में शासकीय गतिविधियां शुरू करने से पहले राज्य वेटलैंड अथॉरिटी से परामर्श लिया जाना चाहिए।
तालाबों की लंबी सूची...
नरवर नगरीय क्षेत्र के अलग-अलग वार्डों में स्थित जल निकाय राजा का तालाब, लखना तालाब, नया तालाब, दुहाई तालाब, खटकियाई तालाब का राजस्व दस्तावेज में उल्लेख है, इन तालाबों के साथ अन्य जल निकाय केवल पानी के स्रोत नहीं बल्कि नरवर नगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हुए हैं। नरवर नगर में किले के परकोटे के आसपास की प्राचीन नहर प्रणाली को प्राकृतिक बरसाती पानी की निकासी व्यवस्था से जुड़े हुए होने की बात भी सामने आई है यह प्रणाली तालाबों, कुओं और बावड़ियों से जुड़ी थी और ऐतिहासिक रूप से नरवर की जल व्यवस्था तथा सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रही है। ऐसे में यदि किसी जल निकाय की सीमा घटती है, उसमें कचरा डालने या मिट्टी डाल कर भराव करने के कारण जल निकासी व्यवस्था बाधित की जा रही है साथ ही बिना उपचारित पानी पहुंचता है तो इसका असर केवल एक तालाब पर नहीं बल्कि पूरे स्थानीय जल-विज्ञान और पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ सकता है।
असली परीक्षा अब जमीन पर अमल की है...
NGT की कार्यवाही ने नरवर के जलस्रोतों को लेकर वर्षों से चले आ रहे सवालों को दस्तावेजी आधार जरूर दिया है, लेकिन असली परीक्षा अब जमीन पर अमल की है। सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रत्येक तालाब का राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार वास्तविक रकबा कितना है, मौके पर उसकी सीमा कहां तक है और वर्तमान में उस सीमा क्षेत्र में क्या स्थिति है।जिन जल निकायों को संरक्षण की जरूरत बताई गई है, क्या उनकी स्थायी फेंसिंग और सीमांकन वास्तव में कर दिया गया है। क्या तालाबों में जाने वाले नालों और सीवेज का प्रवाह पूरी तरह रोका गया है।
अब देखना होगा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कब और किस स्तर पर होगी...
यदि किसी जल निकाय की जमीन पर अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण पाया जाता है तो उसे हटाने की कार्रवाई कब और किस स्तर पर होगी। छह तालाब, एक ऐतिहासिक खाई और विकास के नाम पर बदलता भू-दृश्य, दुहाई तालाब, लखना तालाब, नया तालाब, राजा का तालाब, खटकियाई तालाब और पनडूरी का तालाब तथा नरवर किले की ऐतिहासिक खाई ये सभी नरवर नगर की जल और सांस्कृतिक विरासत की कड़ियां को जोड़ती हैं। तो क्या इनका मूल स्वरूप आमजन को दिखाई देगा।शिकायतकर्ता ने आवेदन में इन जल निकायों की सीमा और आसपास हुए कथित निर्माणों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि संयुक्त समिति की रिपोर्ट ने तालाबों पर हुए अतिक्रमण को हटाने एवं वेटलैंड संरक्षण नियम 2017 के आधार पर पालन करने के निर्देश दिए है




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