प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान,ग्वालियर के विधि विभाग में ...
स्वर्गीय श्री न्यायमूर्ति एम.ए.शाह की स्मृति में आयोजित"द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय विधि सेमिनार" संपन्न !
प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा स्वर्गीय श्री न्यायमूर्ति एम.ए. शाह की स्मृति में दिनांक 18 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित दो दिवसीय "द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय विधि सेमिनार" का आज दिनांक 19 सितंबर 2026 को समापन सत्र के साथ भव्य समापन हुआ। सेमिनार का मुख्य विषय कानून, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, सुशासन एवं आर्थिक विकास में अंतर-अनुशासनिक दृष्टिकोण रहा। समापन सत्र का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, तत्पश्चात अतिथियों का पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
माननीय श्री न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन जी, मुख्य अतिथि एवं माननीय न्यायाधीश, उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में कहा कि एक न्यायाधीश की वास्तविक पहचान निर्णय लेने की शक्ति में नहीं, बल्कि उस बुद्धिमत्ता, साहस एवं निष्ठा में निहित होती है जिसके साथ न्याय प्रदान किया जाता है। उन्होंने अपने लगभग तीन दशकों के विधिक एवं न्यायिक अनुभव को साझा करते हुए विद्यार्थियों को धैर्य एवं सिद्धांतनिष्ठा के साथ विधि क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर पाँच दशकों से अधिक समय से विधि क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता श्री कैलाश नारायण गुप्ता जी, माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को "लॉ एक्सीलेंस अवार्ड" प्रदान कर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री कैलाश नारायण गुप्ता जी ने पुरस्कार प्राप्ति के उपरांत अपने उद्बोधन में विधि क्षेत्र में अपनी 53 वर्षों की यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि तैयारी, धैर्य, सहनशीलता एवं ईमानदारी के बिना कोई भी शॉर्टकट सफलता नहीं दिला सकता, और एक अच्छे अधिवक्ता को सदैव विधि का विद्यार्थी बने रहना चाहिए। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं को अनुशासन एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनाने की सलाह दी।
इसके पश्चात न्यायिक प्रशासन के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक की सेवा देने वाले माननीय श्री न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार मुद्गल जी, पूर्व न्यायाधीश, माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को "लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड" प्रदान कर सम्मानित किया गया। माननीय श्री न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार मुद्गल जी ने पुरस्कार प्राप्ति के उपरांत अपने उद्बोधन में सिविल जज से लेकर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं म.प्र. मध्यस्थता अधिकरण के अध्यक्ष तक की अपनी न्यायिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुशासन, समर्पण एवं न्याय-प्रशासन के प्रति निष्ठा ही एक सफल न्यायिक जीवन का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को न्याय व्यवस्था की सेवा हेतु प्रेरित किया।
डॉ. कौसर अली शाह, सम्मानित अतिथि एवं ग्रुप चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, शारदा यूनिवर्सिटी ने सम्मानित अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में कहा कि विधि, स्वास्थ्य एवं प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में नेतृत्व के लिए अंतर-अनुशासनिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने व्यापक प्रशासनिक एवं नेतृत्व अनुभव को साझा करते हुए विद्यार्थियों को नवाचार एवं परिवर्तन के प्रति खुला दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
श्री एफ.ए. शाह, अधिवक्ता, माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर ने अपने संबोधन में कहा कि विधि व्यवसाय में सफलता के लिए निरंतर अध्ययन एवं व्यावहारिक अनुभव दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने स्वर्गीय न्यायमूर्ति शाह के जीवन से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए विद्यार्थियों को नैतिकता एवं निष्ठा के साथ विधि व्यवसाय अपनाने की प्रेरणा दी।
प्रो. (डॉ.) निर्मल्य बंद्योपाध्याय, निदेशक, पीआईएमआर ने समापन सत्र के स्वागत भाषण में सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सेमिनार शैक्षणिक ज्ञान को वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जोड़ने की दिशा में एक सफल प्रयास रहा, तथा इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच विद्यार्थियों की दृष्टि को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रो. (डॉ.) राखी सिंह चौहान, प्राचार्या, विधि विभाग, पीआईएमआर ने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि इन दो दिनों में हुई विचार-गोष्ठियों एवं प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को विधि, प्रौद्योगिकी, सुशासन एवं सतत विकास के अंतर-संबंधों को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए सेमिनार को अत्यंत सफल बताया।
सह-प्राध्यापिका मानसी गुप्ता ने स्वर्गीय श्री न्यायमूर्ति एम.ए. शाह के जीवन एवं न्यायिक योगदान को पुनः स्मरण करते हुए कहा कि उनका विधि क्षेत्र के प्रति समर्पण एवं न्यायिक दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा, तथा यह सेमिनार उन्हीं की स्मृति को समर्पित रहा।
इस अवसर पर स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के विभिन्न बैचों के मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा उत्कृष्ट पूर्व छात्रों को एलुमनाई अवार्ड से सम्मानित किया गया, जिनका विवरण निम्नानुसार है:
स्नातक पाठ्यक्रम
बैच 2019–2024: बीए एलएलबी में गोल्ड मेडल सुश्री बार्बी सोनकर को तथा बीबीए एलएलबी (ऑनर्स) में गोल्ड मेडल श्री कपिल कुमार को प्रदान किया गया। बेस्ट एलुमनाई अवार्ड श्री ऋषभ शर्मा को प्रदान किया गया।
बैच 2020–2025: बीए एलएलबी में गोल्ड मेडल सुश्री खुशी दुबे को, बीबीए एलएलबी में सुश्री प्राची अग्रवाल को तथा बीकॉम एलएलबी में सुश्री एशिका ठाकुर को प्रदान किया गया। बेस्ट एलुमनाई अवार्ड श्री शिवेंद्र प्रताप को प्रदान किया गया।
बैच 2021–2026: बीए एलएलबी में गोल्ड मेडल सुश्री सुरभि छपरिया को, बीबीए एलएलबी में सुश्री विधि श्रीवास्तव को तथा बीकॉम एलएलबी में सुश्री कृतिका शर्मा को प्रदान किया गया। बेस्ट एलुमनाई अवार्ड श्री सैयद फरहान लियाकत को प्रदान किया गया।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम
बैच 2022–2024: गोल्ड मेडल सुश्री अजैता सिंह को प्रदान किया गया।
बैच 2023–2025: गोल्ड मेडल सुश्री रिशिका सचदेवा को प्रदान किया गया। बेस्ट एलुमनाई अवार्ड सुश्री हर्षिता अग्रवाल को प्रदान किया गया।
बैच 2024–2026: गोल्ड मेडल सुश्री श्रुति को प्रदान किया गया। बेस्ट एलुमनाई अवार्ड श्री भानु प्रताप को प्रदान किया गया।
इसके साथ ही ऑनलाइन तकनीकी सत्रों में डॉ. शिल्पा राव रस्तोगी , विभागाध्यक्ष (विधि), विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर; प्रो. (डॉ.) देवांशु श्रीवास्तव, प्रोफेसर ऑफ लॉ, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, राँची; डॉ. गुरदीप कौर , विभागाध्यक्ष, स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़, सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली; तथा डॉ. मौमिता सेन चक्रवर्ती , डायरेक्टर, स्कूल ऑफ लॉ, गीतम यूनिवर्सिटी, विशाखापत्तनम ने भी संसाधन व्यक्ति के रूप में अपनी विशेषज्ञता से विद्यार्थियों को लाभान्वित किया।
समापन सत्र के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत शोध-पत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को "बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड" तथा समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र हेतु "बेस्ट पेपर अवार्ड" प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में मंच पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों को विधि विभाग की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया तथा इस अवसर पर विधि विभाग के सह-प्राध्यापक आबिल हुसैन , सह-प्राध्यापक राहुल श्रीवास्तव , सह-प्राध्यापिका मानसी सोनी , सह-प्राध्यापक साहिल वर्मा , सह-प्राध्यापक डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा तथा इस अवसर पर सेमिनार की समन्वयक सह-प्राध्यापिका डॉ0 ऋचा मित्तल तथा सह-समन्वयक सह-प्राध्यापिका डॉ0 दीक्षा भदोरिया उपस्थित रही.सह-प्राध्यापिका जिज्ञासा वोहरा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।




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