विदेशी मुद्रा भंडा 740 अरब डॉलर के पार...
GDP के बाद अब सरकारी खजाने में हुई छप्पर फाड़ ग्रोथ !
एक ही हफ्ते में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए डबल खुशखबरी आई है. पहली GDP के मोर्चे पर गुडन्यूज मिली. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी पर पहुंच गया, जो अनुमान से बेहतर था. अब विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर खुशखबरी आई है. खाड़ी युद्ध और होर्मुज संकट के बीच महंगा कच्चा तेल और बढ़ता आयात बिल भी भारत के खजाने को बढ़ने से रोक नहीं पाया है. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार बढ़ोतरी हुई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $11.47 अरब बढ़कर रिकॉर्ड $740.80 अरब पर पहुंच गया है.
ये लगातार दूसरा हफ्ता है, जब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी देखने को मिली है. इस हफ्ते की बढ़ोतरी के साथ भारत का फॉरैक्स रिजर्व रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया है. दो हफ्ते में इसमें 23.9 अरब डॉलर की बड़ी बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले 21 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 729.328 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. बता दें कि 27 फरवरी को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिसका रिकॉर्ड भी अब टूट गया है.
28 अगस्त को खत्म हुए हफ्ते में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 11.475 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 740.803 अरब डॉलर के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया. पहले जीडीपी और अब विदेशी मुद्रा में बढ़ोतरी भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दर्शाता है.मार्च से लेकर तक विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 49.70 अरब डॉलर का इजाफा हो चुका है. बीते साल से 46.57 अरब डॉलर बढ़ा है. फॉरैक्स रिजर्व के सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट (FCAs)का होता है. इस बार इसमें 9.337 अरब डॉलर की बढ़त दर्ज की गई. भारत का कुल विदेशी करेंसी एसेट बढ़कर 600.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
हालांकि स्पेशल ड्राइंग राइट्स यानी SDR में 43 मिलियन डॉलर की गिरावट आई है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के पास भारत की रिजर्व पोजीशन में 11 मिलियन डॉलर की कमी आई है. भारत ता गोल्ड रिजर्व भी बढ़ा है. इस बार गोल्ड रिजर्व में 2.19 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है और यह उछलकर 116.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया. बता दें कि फॉरेक्स रिजर्व केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई विदेशी संपत्तियां होती हैं, जिसमें मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा, सोना और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास आरक्षित कोष शामिल होते हैं.
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त का सिलसिला जून 2026 के बाद से तेज हो गया है. दरअसल इस तेजी के पीछे RBI का वो प्लान है, जिसकी बदौलत करीब 127 अरब डॉलर भारत आए हैं. RBI के खास फॉरेक्स स्वैप प्रोग्राम के तहत 31 अगस्त तक 127.23 अरब डॉलर की रकम विदेश में रहने वाले भारतीयों ने भारतीय बैंकों में जमा भेजा. FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम के तहत करीब 132 अरब डॉलर से अधिक का नया फ्लो मिला है. जून 2026 में रिजर्व बैंक ने प्रवासी भारतीयों के लिए विशेष जमा कार्यक्रम की शुरुआत की. FCNR(B) स्कीम के जरिए 31 अगस्त तक 100 अरब डॉलर का निवेश प्रवाह भारत में आया. स्कीम को इतना अच्छा रिस्पांस मिला कि इसे समय से पहले बंद करना पड़ा.
फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) अकाउंट विदेशी में रहने वाले NRI के लिए एक फिक्स्ड टर्म डिपॉजिट प्लान होता है. विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी कमाई को भारत में विदेशी करेंसी में जमा कर सकते हैं. इसकी खासियत होती है कि मूलधन और उसपर मिलने वाला ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही वापस मिलता है. मतलब करेंसी को बदलने की जरूरत नहीं होती है. विदेशी मुद्रा का इनफ्लो बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक को इस स्कीम की शुरुआत करनी पड़ी, ताकि देश में अधिक डॉलर आए और रुपये को मजबूती मिले. इस स्कीम से रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है.




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