कार्यालय में बदसलूकी, काम में दखल और शैक्षणिक दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोप...
BEO कार्यालय में चपरासी ने खुद किये अधिकारी के हस्ताक्षर, निलंबित !
पिछोर। खनियांधाना के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में पदस्थ भृत्य विजयपाल लोधी के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों के बाद शिक्षा विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की है। उन पर कार्यालयीन कामकाज में बाधा डालने, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने, विकासखंड शिक्षा अधिकारी की गैरमौजूदगी में उनके कक्ष में बैठने और बिना अनुमति शैक्षणिक दस्तावेजों पर अधिकारी की सील लगाकर खुद हस्ताक्षर करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव ने निलंबन आदेश जारी किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। शिकायतों के अनुसार विजयपाल लोधी द्वारा कार्यालय आने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया जाता था।
खनियांधाना के विकासखंड शिक्षा अधिकारी की ओर से जिला शिक्षा कार्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि उनके व्यवहार और कार्यालयीन गतिविधियों में हस्तक्षेप के कारण नियमित कामकाज प्रभावित हो रहा था। इससे कार्यालय में आने वाले कर्मचारियों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी की अनुपस्थिति में विजयपाल लोधी अधिकारी की कुर्सी के पास अपनी कुर्सी लगाकर बैठते थे। इस दौरान कार्यालय आने वाले शिक्षकों से बातचीत करने के साथ कथित तौर पर उन्हें भड़काने और अभद्र व्यवहार करने की शिकायत भी सामने आई। विभाग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की रिपोर्ट जिला शिक्षा कार्यालय को भेजी।
विजयपाल लोधी के खिलाफ कार्यालय समय समाप्त होने के बाद दफ्तर में शराब का सेवन करने की शिकायत भी सामने आई है। रिपोर्ट में इस तरह के आचरण का उल्लेख होने के बाद मामला केवल कार्यालयीन अनुशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी कार्यालय की गरिमा और अनुशासन से भी जुड़ गया। मामले का सबसे गंभीर आरोप शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़ा है। मई 2026 में तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने जिला शिक्षा कार्यालय को रिपोर्ट भेजकर आरोप लगाया था कि विजयपाल लोधी बिना अनुमति और संबंधित अधिकारी की जानकारी के शाला त्याग प्रमाण पत्र (SLC) और मूल टीसी पर अधिकारी की सील लगाकर खुद हस्ताक्षर करते थे। आरोप है कि इस तरह तैयार किए गए दस्तावेजों को प्रमाणित भी किया जाता था।
यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सामान्य कार्यालयीन अनुशासन से कहीं अधिक गंभीर माना जा सकता है, क्योंकि टीसी और अन्य शैक्षणिक प्रमाण-पत्र विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से 13 मई 2026 को विजयपाल लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे लगाए गए आरोपों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। प्राप्त रिपोर्टों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रथम दृष्टया उन्हें दोषी मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव द्वारा जारी आदेश में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत विजयपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नरवर निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता भी प्रदान किया जाएगा। खनियांधाना BEO कार्यालय से सामने आए इस मामले ने सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रमाणिकता से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। खास तौर पर अधिकारी की अनुमति के बिना शैक्षणिक दस्तावेजों पर सील और हस्ताक्षर किए जाने के आरोपों को विभाग ने गंभीरता से लिया है। फिलहाल विभागीय कार्रवाई के तहत भृत्य को निलंबित कर दिया गया है। आगे की जांच में आरोपों की वास्तविकता और शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़े मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।




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