प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग में ...
विधि विभाग द्वारा"इंडस्ट्रियल कनेक्ट एवं लीगल एड कैंप"आयोजित !
प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सहयोग से एक दिवसीय कार्यक्रम "इंडस्ट्रियल कनेक्ट एवं लीगल एड कैंप" का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "अपनी अदालत को जानें, अपने अधिकारों को पहचानें: कानून के विद्यार्थियों के लिए लोक अदालत एवं विधिक सहायता शिविर"रहा। तथा इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विधि विद्यार्थियों को अदालती प्रक्रियाओं और लोक अदालत के व्यावहारिक पक्षों से जोड़कर कानूनी रूप से जागरूक बनाना था। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के न्यू कन्वेन्शन हॉल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के आगमन, दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत के साथ हुआ।
श्री ललित किशोर गर्ग, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था की सुदृढ़ता के लिए युवाओं और विधि छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। लोक अदालतें भारतीय न्याय व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ हैं, जो विवादों के समाधान में समय और धन दोनों की बचत करती हैं। उन्होंने छात्रों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज सेवा और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने में करने का आह्वान किया।
सुश्री मानसी बलुजा, व्यवहार , जूनियर डिविजन, ग्वालियर उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विधि छात्रों के लिए अदालती प्रक्रियाओं और नागरिकों के अधिकारों की समझ होना अत्यंत आवश्यक है। लोक अदालतें त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम हैं, जिससे आम जनता को राहत मिलती है।
सुश्री स्वाति गोयल, व्यवहार , जूनियर डिविजन, ग्वालियर उन्होंने अपने संबोधन में विधि के व्यावहारिक पहलुओं और अदालत की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कानूनी जागरूकता अभियानों और लीगल एड कैंप्स के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित की जा सकती है।
श्री पुष्पेंद्र सिंह, सचिव, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, ग्वालियर उन्होंने जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) की भूमिका और नि:शुल्क कानूनी सहायता योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को लोक अदालतों के संचालन, मुकदमों के सौहार्दपूर्ण निपटारे और विधिक सहायता अभियानों में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) निर्मल्या बंदोपाध्याय ने कहा कि वर्तमान समय में केवल किताबी और सैद्धांतिक ज्ञान ही विधि शिक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को जमीनी स्तर पर अदालती कार्यप्रणाली और व्यावहारिक प्रक्रियाओं की समझ होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार के लीगल एड कैंप और इंडस्ट्रियल कनेक्ट कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल कानूनी धाराओं के अध्ययन तक सीमित न रखकर समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हैं।
विधि विभाग की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) राखी सिंह चौहान ने कहा कि लोक अदालतें और कानूनी सहायता शिविर भारतीय न्याय प्रणाली के ऐसे स्तंभ हैं जो आम नागरिकों को सुलभ, त्वरित और किफ़ायती न्याय प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक कानून के छात्र के रूप में आपको यह समझना होगा कि न्याय की पहुँच समाज के अंतिम व्यक्ति तक कैसे बनाई जाए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को लोक अदालत की वास्तविक कार्यप्रणाली, विवादों के आपसी समझौते से समाधान की प्रक्रियाओं और निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई के दौरान ही समाज में कानूनी जागरूकता फैलाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के सह-प्राध्यापक आबिल हुसैन , सह-प्राध्यापिका डॉ. दीक्षा भदौरिया , सह-प्राध्यापिका ऋचा मित्तल , सह-प्राध्यापिका मानसी सोनी , सह-प्राध्यापिका जिज्ञासा वोहरा सह-प्राध्यापक साहिल वर्मा , सह-प्राध्यापक डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा तथा सह-प्राध्यापक राहुल श्रीवास्तव सहित विधि विभाग के समस्त संकाय सदस्य उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम संचालन धैर्य गोयल , आशि मंगल और आभार व्यक्त सह-प्राध्यापिका मानसी गुप्ता ने किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।



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