हाईकोर्ट के आदेश पर जर्जर और धंसी सड़कों की जांच के लिये भरे गये सैम्पल...
सड़क को गहरा खोदकर लिये गये सेम्पल, नेशनल लैब में होगी क्रॉस चैकिंग !
ग्वालियर। गुढ़ा-गुढ़ी नाका रोड के सैंपल कलेक्ट करते हुए टीम। - Dainik Bhaskarग्वालियर. सड़कों की जर्जर हालत, छलनी और धंसी हुई सड़कों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने कड़ा रूख अपनाया है। सड़कों के निमर्ताण की गुणवत्ता की जमीनी हकीकत जानने के लिये हाईकोर्ट के आदेश के बाद रविवार को ऑन-स्पॉट सैम्पलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। हाईकोर्ट द्वारा गठित अभिभाषकों के विशेष कमीशन और तकनीकी विशेषों की टीम ने सबसे पहले गुढा-गुढी का नाका चौराहा पहुंच कर सड़कों का निरीक्षण किया। टीम ने निरीक्षण स्थल पर ही सड़क खोदकर सैम्पल एकत्र किये है। हाईकोर्ट का मानना है कि सड़कों की वास्तविक गुणवत्ता जांचने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करने के लिये सैम्पलिंग सबसे सटीक तरीका है।
जांच टीम ने ड्रिल मशीन से सड़क में छेद कर लिए सैंपल ...
सॉइल टेस्ट के लिये केन्द्रीय परीक्षण प्रयोगशाला वैन के साथ -साथ विशेष कमीशन में एडवोकेट हिमांशु शर्मा, पवन रघुवंशी और गौरव समाधिया, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, एनएचएआई, नगरनिगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी के साथ भारी पुलिस बल मौके पर साथ मौके मौजूद रहें।
एक सड़क चार सैम्पल लिये
एक सड़क के चार सैम्पल लिये गये है। एक सैम्पल जिला न्यायालय के मालखाने में 2 सैम्पल जांच के लिये और 1 सैम्पल निगमायुक्त कार्यालय भेजा जायेगा।
जनहित याचिका से शुरू हुई सड़कों की जंग, 25 अगस्त पर टिकीं नजरें
ग्वालियर की बदहाल सड़कों, जानलेवा गड्ढों और सड़कें धंसने के मुद्दे को मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। कोर्ट में लगातार हुई सुनवाई के बाद अब सड़कों की वास्तविक गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपलिंग का रास्ता चुना गया है। अब सभी की नजरें 25 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। इस दौरान सैंपलिंग की शुरुआती जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर खराब सड़कें बनाने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर फैसला हो सकता है।



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