छुक-छुक बंद हुई,जाम नहीं,कभी ग्वालियर की शान रही,आज उपेक्षा और अतिक्रमण की शिकार...
ग्वालियर नेरोगेज की बेशकीमती जमीन पर सड़क बनाइए,शहर को जाम और कब्जों से बचाइए !
-रवि यादव
ग्वालियर। कभी शहर की पहचान और लोगों की यादों का अहम हिस्सा रही छुक-छुक चलने वाली छोटी लाइन अर्थात नेरोगेज रेलगाड़ी अब इतिहास के पन्नों में सिमट चुकी है। एक समय ग्वालियर से चलने वाली यह रेल केवल परिवहन का साधन नहीं थी, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान और आमजन की सुविधाओं से जुड़ी एक जीवंत धरोहर थी। लेकिन शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम का हवाला देकर इसे बंद कर दिया गया।
उस समय शहरवासियों को यह उम्मीद दिलाई गई कि रेल बंद होने के बाद यातायात सुगम होगा, सड़कें खुलेंगी और जाम से राहत मिलेगी। मगर आज सवाल यह है कि रेल तो बंद हो गई, लेकिन ट्रैफिक जाम क्यों नहीं खत्म हुआ?
आज भी ग्वालियर की प्रमुख सड़कें सुबह से रात तक वाहनों के दबाव से कराह रही हैं। कहीं निर्माण कार्य के कारण रास्ते संकरे हैं, तो कहीं फुटपाथों और सड़क किनारे के अतिक्रमण ने यातायात की गति रोक दी है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि शहर के योजनाकार और शासन-प्रशासन पुराने निर्णयों की समीक्षा करें तथा नेरोगेज रेलवे की खाली पड़ी जमीन के जनहितकारी उपयोग पर गंभीरता से विचार करें।
नेरोगेज कॉरिडोर बन सकता है ग्वालियर का नया ट्रैफिक विकल्प !
ग्वालियर रेलवे स्टेशन से लेकर घोसीपुरा रेलवे स्टेशन तक शहर के बीच से गुजरने वाली पुरानी नेरोगेज रेलवे लाइन का बड़ा हिस्सा आज उपयोगहीन पड़ा है। यह भूमि शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ते हुए ऐसे मार्ग से गुजरती है, जो अधिकांश स्थानों पर मुख्य आबादी और व्यस्त बाजारों के बाहरी हिस्से से होकर निकलता है।
यदि रेलवे और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर इस उपलब्ध भूमि का तकनीकी सर्वे कराया जाए और व्यवहार्यता के आधार पर यहां एलिवेटेड रोड, लिंक रोड अथवा नियंत्रित यातायात मार्ग विकसित किया जाए, तो शहर के यातायात दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यह मार्ग शहर के भीतर एक वैकल्पिक ट्रैफिक कॉरिडोर के रूप में विकसित हो सकता है। इससे मुरार, पूर्वी क्षेत्रों और शहर के अन्य हिस्सों की ओर जाने वाले वाहनों को मुख्य बाजारों और संकरी सड़कों से गुजरने की मजबूरी कम हो सकती है।
आज जब शहर के बीचोंबीच एलिवेटेड रोड निर्माण पर भारी धनराशि खर्च की जा रही है और निर्माण कार्य के कारण नागरिक धूल, धुएं, गंदगी तथा लंबे ट्रैफिक जाम से परेशान हैं, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या एलिवेटेड रोड की योजना बनाते समय नेरोगेज रेलवे की उपलब्ध जमीन को एक वैकल्पिक यातायात कॉरिडोर के रूप में गंभीरता से परखा गया था?
यदि नहीं, तो अब भी देर नहीं हुई है। शहर की भविष्य की यातायात जरूरतों को देखते हुए इस पूरे कॉरिडोर का आधुनिक यातायात सर्वे कराया जाना चाहिए।
रेल बंद हुई तो शुरू हो गया बेशकीमती जमीन पर कब्जे का खेल !
नेरोगेज रेल सेवा बंद होने के बाद रेलवे की इस बेशकीमती जमीन पर निगरानी और उपयोग की स्पष्ट योजना न होने का लाभ धीरे-धीरे आसपास के लोगों द्वारा उठाया जाने लगा। कई स्थानों पर जमीन के किनारों पर अस्थायी निर्माण, चबूतरे, टीनशेड और अन्य प्रकार के कब्जे दिखाई देने लगे हैं। कहीं निजी उपयोग के लिए जगह घेर ली गई, तो कहीं पशुओं को बांधने अथवा अन्य गतिविधियों के लिए भूमि का इस्तेमाल शुरू हो गया।
आज स्थिति यह है कि यदि समय रहते इस भूमि की सीमाओं का सर्वे, सुरक्षा और उपयोग सुनिश्चित नहीं किया गया, तो भविष्य में यह पूरा कॉरिडोर छोटे-बड़े अतिक्रमणों की चपेट में आ सकता है।
सरकारी और सार्वजनिक भूमि को वर्षों तक खाली छोड़ देना अक्सर अतिक्रमण को निमंत्रण देने जैसा साबित होता है। इसलिए इस जमीन को केवल कब्जों से मुक्त कराने की कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि इसके स्थायी और जनहितकारी उपयोग की योजना भी तैयार करनी होगी। यदि इस कॉरिडोर पर सड़क अथवा कोई आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित होती है, तो एक साथ कई समस्याओं का समाधान संभव है—
- रेलवे की बेशकीमती जमीन सुरक्षित रहेगी।
- अवैध कब्जों की संभावना कम होगी।
- शहर को एक वैकल्पिक यातायात मार्ग मिल सकता है।
- मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव घट सकता है।
- भविष्य की शहरी यातायात योजना को नई दिशा मिल सकती है।
- एक तरफ एलिवेटेड रोड, दूसरी तरफ सड़कों पर अतिक्रमण!
निर्माण क्षेत्रों में उड़ती धूल, वाहनों से निकलता धुआं, जगह-जगह गंदगी, संकरे मार्ग और लगातार लगने वाला जाम आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। कई स्थानों पर वाहन चालकों को छोटे से रास्ते से गुजरने में लंबा समय लग रहा है।
शहरवासी इस परेशानी को विकास की अस्थायी कीमत मानकर सहन भी कर रहे हैं, लेकिन सवाल तब उठता है जब प्रशासन स्वयं यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के बजाय सड़कों और फुटपाथों पर अनियंत्रित अतिक्रमण को नजरअंदाज करता दिखाई देता है। जब सड़कें पहले से ही निर्माण कार्य के कारण संकरी हो गई हैं, तब उनके किनारों और बीच के हिस्सों में ठेले, रेडियां और अस्थायी बाजार लगने देना यातायात व्यवस्था को और अधिक जटिल बना रहा है।
डीडी मॉल के पीछे सड़क पर सजता ड्राई फ्रूट मार्केट !
डीडी मॉल के पीछे, गोपाचल पर्वत के सामने स्थित मार्ग शहर के महत्वपूर्ण यातायात मार्गों में शामिल है। शहर के भीतर से मुरार और पूर्वी क्षेत्रों की ओर जाने वाला बड़ी संख्या में वाहन इसी सड़क से होकर गुजरता है।
लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर प्रतिदिन सुबह लगभग 11 बजे के बाद ड्राई फ्रूट विक्रेताओं का अस्थायी बाजार सजना शुरू हो जाता है, जो देर रात तक चलता है। सड़क की चौड़ाई सीमित होने और पर्याप्त फुटपाथ व्यवस्था न होने के बावजूद सड़क किनारे दुकानें लगने से वाहनों के लिए उपलब्ध स्थान और कम हो जाता है। नतीजा यह होता है कि थोड़ी सी वाहन संख्या बढ़ते ही यहां जाम की स्थिति बन जाती है। दोपहिया वाहन चालक जगह तलाशते हुए आगे बढ़ते हैं, चारपहिया वाहन धीमे हो जाते हैं और कई बार पूरे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि...
क्या सड़क पर लगने वाला यह बाजार नगर निगम और यातायात पुलिस को दिखाई नहीं देता ? यदि दिखाई देता है, तो इसे व्यवस्थित करने अथवा यातायात बाधित होने से रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
इस समस्या को मीडिया द्वारा भी कई बार उठाया जा चुका है। इसके बावजूद यदि स्थिति जस की तस बनी हुई है, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
जाम पर मौन क्यों हैं जिम्मेदार ?
शहर में ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन विभागों की है, वे यदि केवल यातायात चालान, औपचारिक निरीक्षण और सीमित कार्रवाई तक ही अपनी भूमिका रखते हैं, तो शहर की वास्तविक समस्या का समाधान संभव नहीं होगा।
यातायात प्रबंधन का अर्थ केवल वाहन चालकों पर नियम लागू करना नहीं है। इसके लिए सड़क की उपलब्ध चौड़ाई, अतिक्रमण, फुटपाथ, पार्किंग, बाजार व्यवस्था, निर्माण कार्य और वैकल्पिक मार्गों पर एक साथ काम करना आवश्यक है।
नगर निगम की जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त रखे तथा छोटे व्यापारियों के लिए व्यवस्थित स्थान विकसित करे। वहीं यातायात पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़क पर ऐसी गतिविधियां न हों, जिनसे वाहनों की आवाजाही बाधित हो।
लेकिन जब सड़क पर दुकानें लगती रहें, वाहन जाम में फंसे रहें और जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय मौन बने रहें, तब आम नागरिकों का यह पूछना स्वाभाविक है कि क्या शहर की सड़कें यातायात के लिए हैं या अनियोजित बाजारों के लिए ?
शासन को देखना होगा पूरा शहर, केवल परियोजना नहीं !
ग्वालियर में एलिवेटेड रोड जैसी बड़ी परियोजनाएं शहर के भविष्य के लिए आवश्यक हो सकती हैं, लेकिन किसी एक परियोजना के निर्माण से यातायात समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके लिए समग्र शहरी यातायात योजना बनानी होगी।
नेरोगेज रेलवे की खाली पड़ी भूमि, वैकल्पिक मार्गों का विकास, सड़कों से अतिक्रमण हटाना, फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रखना, ठेला और रेडी व्यापारियों के लिए व्यवस्थित बाजार विकसित करना तथा निर्माण कार्य के दौरान प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन इन सभी बिंदुओं पर एक साथ काम करना होगा।
शासन और प्रशासन को यह भी समझना होगा कि सड़क किनारे छोटे व्यापारियों की आजीविका महत्वपूर्ण है, लेकिन व्यापार के नाम पर सड़क को स्थायी बाजार में बदल देना भी उचित नहीं है। समाधान कार्रवाई और संरक्षण के बीच संतुलन से निकलेगा। ठेला और रेडी विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए जाएं...
मुख्य यातायात मार्गों को अतिक्रमण से मुक्त रखा जाए...
- ग्वालियर स्टेशन से घोसीपुरा तक नेरोगेज भूमि का संयुक्त तकनीकी सर्वे कराया जाए।
- रेलवे, राज्य शासन और नगर निगम मिलकर इस कॉरिडोर पर सड़क, एलिवेटेड रोड अथवा सार्वजनिक परिवहन मार्ग की व्यवहार्यता जांचें।
- नेरोगेज की भूमि की सीमाओं का सीमांकन कर अवैध कब्जों को रोका जाए।
- जहां अतिक्रमण हो चुका है, वहां कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर भूमि को सुरक्षित किया जाए।
- एलिवेटेड रोड निर्माण क्षेत्रों में धूल नियंत्रण, सफाई और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था मजबूत की जाए।
- डीडी मॉल के पीछे और अन्य व्यस्त मार्गों पर सड़क किनारे लगने वाले बाजारों का यातायात प्रभाव का सर्वे कराया जाए।
- ठेला-रेडी व्यापारियों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित किए जाएं, ताकि रोजगार भी सुरक्षित रहे और सड़क भी खाली रहे।
- नगर निगम और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम नियमित निरीक्षण कर यातायात बाधित करने वाले अतिक्रमणों पर कार्रवाई करे।
रेल बंद करने से जाम खत्म नहीं हुआ…
अब सवाल यह है कि रेल चली गई,पटरी खाली हो गई,जमीन पर कब्जे शुरू हो गए,सड़कें फिर भी जाम हैं, एलिवेटेड रोड बन रही है,धूल और धुएं में शहर परेशान है और सड़क के बीच बाजार भी सज रहे हैं ! फिर ग्वालियर की यातायात समस्या का जिम्मेदार कौन?
पूछता है ग्वालियर...
- जब नेरोगेज रेलवे की जमीन शहर के बीच से गुजरते हुए एक वैकल्पिक यातायात कॉरिडोर बन सकती है, तो उसके उपयोग पर गंभीर योजना क्यों नहीं बनाई जा रही?
- जब एलिवेटेड रोड निर्माण के कारण सड़कें पहले ही संकरी हैं, तो व्यस्त मार्गों पर सड़क किनारे बाजार लगने की अनुमति क्यों है?
- मीडिया द्वारा बार-बार मुद्दा उठाए जाने के बाद भी नगर निगम और यातायात पुलिस की कार्रवाई दिखाई क्यों नहीं देती?
- क्या शासन केवल नई परियोजनाओं पर ध्यान देगा या उपलब्ध सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर उपयोग भी करेगा?
ग्वालियर को केवल नई सड़कें नहीं, बल्कि दूरदर्शी यातायात नीति चाहिए। नेरोगेज रेलवे की जमीन शहर के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। यदि समय रहते इस भूमि को अतिक्रमण से बचाकर योजनाबद्ध तरीके से सड़क अथवा वैकल्पिक यातायात कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाता है, तो यह आने वाले वर्षों में शहर की यातायात व्यवस्था को बड़ी राहत दे सकता है।
वहीं दूसरी ओर, एलिवेटेड रोड निर्माण के दौरान सड़कों पर बढ़ती अव्यवस्था और व्यस्त मार्गों पर अनियंत्रित बाजार व्यवस्था को भी तत्काल नियंत्रित करना होगा।
ग्वालियर को जाम से मुक्ति केवल कंक्रीट के नए ढांचे से नहीं मिलेगी, बल्कि उपलब्ध जमीन के सही उपयोग, अतिक्रमण पर नियंत्रण और जिम्मेदार यातायात प्रबंधन से मिलेगी।
निर्णय अब शासन को करना है...
नेरोगेज की जमीन को कब्जों के हवाले छोड़ना है या उसे ग्वालियर के सुगम यातायात का नया रास्ता बनाना है?



0 Comments