अपराधियों के डेटाबेस से मैच कर सेकंडों में संदिग्धों की अब तक 2500सटीक पहचान ...
जंतर-मंतर पर धरने में शामिल,2500 उपद्रवियों की FRS सिस्टम ने खोज निकाली आपराधिक कुंडली !
FRS (फेशियल रिकग्निशन सिस्टम) एक AI-बेस्ड तकनीक है जो कैमरों की मदद से चेहरों का 3D एनालिसिस कर 'फेशियल प्रिंट' बनाती है. इसे अपराधियों के डेटाबेस से मैच करके सेकंडों में संदिग्धों की सटीक पहचान की जाती है, जिससे भीड़ में छिपे उपद्रवियों को तुरंत पकड़ा जा सकता है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के हिंसक प्रदर्शनों के बीच एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है और वो है FRS (फेशियल रिकग्निशन सिस्टम). जब आंदोलन की आड़ में उपद्रवियों ने पुलिस पर हमले किए, तब दिल्ली पुलिस ने अत्याधुनिक FRS कैमरों की मदद से महज 3 दिनों के भीतर 2500 से ज्यादा शातिर अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर्स को पहचान कर बेनकाब कर दिया. लेकिन आखिर यह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक काम कैसे करती है और कैसे यह भीड़ में छिपे चेहरे को सेकंडों में पकड़ लेती है? आइए जानते हैं...
FRS सिस्टम एडवांस एल्गोरिदम और मशीन लर्निंग पर काम करता है. यह किसी भी व्यक्ति की बायोमेट्रिक पहचान करने के लिए 4 मुख्य चरणों से गुजरता है:
1. चेहरा डिटेक्ट करना: भीड़भाड़ वाले इलाके में लगे CCTV, ड्रोन या FRS वैन के कैमरे सबसे पहले घूमते-फिरते इंसानी चेहरों को पहचानते हैं और उनका स्नैपशॉट लेते हैं.
2. चेहरे की मैपिंग और 3D विश्लेषण: कैमरा व्यक्ति के चेहरे का एक 3D मैप तैयार करता है. यह आंखों के बीच की दूरी, नाक की लंबाई-चौड़ाई, माथे की बनावट और गाल की हड्डियों के गैप जैसे दर्जनों नोडल पॉइंट्स को मापता है.
3. फेशियल प्रिंट में बदलना: जैसे हर इंसान के हाथों की उंगलियों के निशान अलग होते हैं, वैसे ही FRS चेहरे के इन मापों को एक यूनिक गणितीय कोड में बदल देता है, जिसे 'फेशियल प्रिंट' कहा जाता है.
4. अपराधियों के डेटाबेस से मैचिंग: सिस्टम इस फेशियल प्रिंट की तुलना पुलिस के पास पहले से मौजूद वांटेड क्रिमिनल्स, हिस्ट्रीशीटर्स और एफआईआर (FIR) में दर्ज आरोपियों के डेटाबेस से करता है. जैसे ही चेहरा मैच होता है, पुलिस कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट चला जाता है.
सुरक्षा और जांच एजेंसियों के लिए क्यों वरदान है FRS?
त्वरित पहचान: हजारों की बेकाबू भीड़ में भी यह सिस्टम चंद सेकंडों में वांटेड अपराधियों को ढूंढ निकालता है.
गुमशुदा लोगों की मदद: इसका उपयोग मेले, रैलियों या हादसों में खोए बच्चों और लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में भी होता है.
सटीक साक्ष्य: यह किसी भी आपराधिक घटना के समय घटनास्थल पर संदिग्ध की मौजूदगी का पुख्ता और डिजिटल प्रमाण पेश करता है.



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