G News 24 : ममता बनर्जी के 'एपांग ओपांग झपांग' पर चला शुवेंदु सरकार का चाबुक, सभी स्कूलों से होगी गायब !

 सरकार ने स्कूल की सभी लाइब्रेरी से इस पुस्तक को हटाने का किया ऐलान...

ममता बनर्जी के 'एपांग ओपांग झपांग' पर चला शुवेंदु सरकार का चाबुक, सभी स्कूलों से होगी गायब !

पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगातार एक के बाद एक झटके मिल रहे हैं. पहले उनकी पार्टी TMC के कुछ विधायकों ने बगावत कर दी तो वहीं अब खुद मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी से उन्हें एक और बड़ा झटका मिला है. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की किताब 'एपांग ओपांग झपांग' विवादों में है. बताया जा रहा है कि बंगाल सरकार ने स्कूल की सभी लाइब्रेरी से इस पुस्तक को हटाने का ऐलान किया है.  बता दें कि पश्चिम बंगाल के पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष की ओर से ऐलान किया गया है कि सरकार की तरफ से सहायता प्राप्त पुस्तकालयों से 'एपांग ओपांग झपांग' को हटाया जाएगा. 

मंत्री की इस घोषणा के बाद से बंगाल की लाइब्रेरी में रखी जाने वाली किताबों को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है. बता दें कि  'एपांग ओपांग झपांग' पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की किताबों में से एक है. इसे राज्य के लगभग सभी पुस्तकालयों में रखा गया है.  

लाइब्रेरी से हटेगी ममता की किताब

पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष ने कहा कि लाइब्रेरी नॉलेज पाने की जगह है. ऐसे में वहां बच्चों के बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय चेतना के लिए जरूरी किताबें ही होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 'एपांग ओपांग झपांग' जैसी अर्थहीन कविताओं से पुस्तकालयों को बर्बाद नहीं किया जाएगा. इससे पढ़ने वालों के व्यक्तित्व के विकास में कोई योगदान नहीं हो मिल रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष ने कहा कि पुस्तकालय लोग ज्ञान की प्राप्ति के लिए जाते हैं. ऐसे में वहां वहीं किताबें मिलेंगी, जिससे ज्ञान प्राप्त किया जा सके.  

'इन किताबों से जगह बर्बाद नहीं करूंगा...'

मंत्री ने कहा,' पश्चिम बंगाल के सभी पुस्तकालयों से 'एपांग ओपांग झपांग' हटा दी जाएंगी.' मंत्री से जब पूछा गया कि क्या ममता बनर्जी की ओर से लिखी किताबें भी पुस्तकालय में नहीं होंगी, तो इसको लेकर उन्होंने कहा,'मैं उन सभी किताबों को रखकर जगह बर्बाद नहीं करूंगा, जिन्हें पढ़ने से बच्चे का ब्रेन डेवलप नहीं होता. उनकी जगह लाइब्रेरी में रवींद्रनाथ, नजरुल इस्लाम और विवेकानंद की किताबें होंगी. शिवाजी और राणा प्रताप की जीवनियां होंगी.'   

क्या है एपांग ओपांग झपांग का अर्थ?  

बता दें कि पश्चिम बंगाल में TMC की सरकार के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्कूल की सभी लाइब्रेरी में अपनी ओर से लिखी तकरीबन 90 किताबों को शामिल करने का आदेश दिया था. इसके लिए स्कूलों को वित्तीय मदद भी पहुंचाई गई थीं. अब शुवेंदु की सरकार ने इसे फैसले को पलट दिया है. सराकर केवल ज्ञान देने वाले साहित्यों पर जोर दे रही है. वहीं 'एपांग ओपांग झपांग' मुख्य रूप से बच्चों की एनर्जी ड्रिंक के एक ऐड का जिंगल था. इसका बंगाली भाषा में कोई साफ मतलब नहीं है. भाजपा लगातार इन शब्दों के इस्तेमाल से  TMC पर तंज कसती रहती है.  

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